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संभल हिंसा: बवाल के 87 दिन बाद विवेचकों ने दाखिल की चार्जशीट, पुलिस ने दर्ज की थी सात एफआईआर

Fri, 21 Feb 2025 12:54 PM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 21 Feb 2025 12:54 PM IST
सार

संभल बवाल मामले में पुलिस ने छह मामलों में चार्जशीट दाखिल की है। उधर, नखासा के मोहल्ला हिंदूपुरा खेड़ा निवासी फरहाना को सीजेएम न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं होने पर बरी कर दिया।  बवाल में पुलिस ने चार महिलाओं को आरोपी बनाया था।

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Sambhal violence: Investigators filed chargesheet 87 days after riot, police had filed seven FIR
संभल में बवाल - फोटो : संवाद

विस्तार

संभल बवाल के 87वें दिन बृहस्पतिवार को विवेचकों ने छह मुकमदों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। जबकि सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ दर्ज एफआईआर में अभी चार्जशीट दर्ज नहीं की गई है। संभल में 24 नवंबर 2024 को हुए बवाल में पुलिस की ओर से सात एफआईआर दर्ज हुई थीं।

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जिसमें पांच एफआईआर कोतवाली संभल और दो थाना नखासा में हुई थीं। बवाल के 87 दिन के बाद बृहस्पतिवार को छह एफआईआर के विवेचक मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्चना सिंह के न्यायालय में अपराध संख्या 337/24 जिसमें लगभग 900 पेज हैं और 50 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
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अपराध संख्या 336/24 जिसमें लगभग 700 पेज हैं और 37 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसी प्रकार अपराध संख्या 333/24 जिसमें लगभग 650 पेज हैं और 39 लोगों को आरोपी बनाया गया है, अपराध संख्या 334/24 जिसमें लगभग 650 पेज हैं और 34 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
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थाना नखासा के अपराध संख्या 304/24 जिसमें लगभग 375 पेज हैं और 25 लोगों को आरोपी बनाया गया है व अपराध संख्या 305/24 जिसमें लगभग 750 पेज हैं और 23 लोगों को आरोपी बनाया गया है।

मुकदमों की चार्जशीट विवेचक अजय कुमार त्यागी, लोकेंद्र कुमार त्यागी, अमर पाल सिंह, अमित कुमार, सत्येंद्र पंवार व आलोक सिंह ने दाखिल की है। आरोपियों के अधिवक्ताओं द्वारा चार्जशीट की नकल मांगने पर न्यायालय ने सभी विवेचकों को चार्जशीट की नकल दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है।

साक्ष्यों के अभाव में संभल बवाल की आरोपी एक महिला बरी
संभल बवाल में आरोपी नखासा के मोहल्ला हिंदूपुरा खेड़ा निवासी फरहाना को सीजेएम न्यायालय ने पर्याप्त साक्ष्य न होने एक लाख रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया है। जामा मस्जिद बवाल में पुलिस ने हिंदूखेड़ा निवासी फरहाना समेत चार महिलाओं को आरोपी बनाया था।

अपराध संख्या 304/24 के विवेचक एसआईटी के लोकेंद्र कुमार त्यागी द्वारा साक्ष्य के अभाव में फरहाना को रिहा करने की प्रार्थना की गई थी। फरहाना के अधिवक्ता जकी अनवर ने बताया कि विवेचक द्वारा सीजेएम न्यायालय में कथन किया गया कि साक्षी के बयान आदि के साक्ष्य संकलन करने के आधार पर 28 नवंबर 2024 तक आरोपी फरहाना, रुकईया, नजराना, सुभान उर्फ मुन्ना, फैज आलम, छोटू, शहबाज उर्फ टिल्लन के नाम प्रकाश में आए थे।

जिसमें फरहाना, रुकईया व नजराना को न्यायालय के समक्ष पेश कर जिला कारागार में भेज दिया गया। एसपी द्वारा गठित की गई एसआईटी टीम के आदेश के अनुपालन में लोकेंद्र कुमार त्यागी को उपरोक्त मुकदमे में विवेचक बनाया गया। विवेचना के दौरान 34 आरोपियों के नाम प्रकाश में आए।

जिसमें से 26 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया और जिला कारागार मुरादाबाद भेज दिया गया। 25 आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की गई है। अब तक की जांच के बाद फरहाना की अपराध में संलिप्तता के पर्याप्त साक्ष्य न होने के कारण विवेचना से अलग कर दिया गया है।

विवेचक की प्रार्थना पर रिमांड पत्रावली व केस डायरी का अवलोकन करने के बाद फरहाना के विरुद्ध पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध न होने के कारण विवेचक के प्रार्थना पत्र को स्वीकार कर लिया और फरहाना को एक लाख रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहा किए जाने के आदेश दिए हैं।

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