Sambhal Shiv Mandir: मंदिर खुलने बाद सुबह और शाम आरती जारी, उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़... लग रही कतार
संभल में दशकों बाद खग्गू सराय के प्राचीन शिव मंदिर और सरायतरीन के राधा कृष्ण मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। दंगों के बाद बंद हुए इन मंदिरों में अब सुरक्षा के साथ पूजा-अर्चना और प्रसाद वितरण शुरू हो गया है।
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संभल में वर्षों बाद मंदिरों के कपाट खुलने की जानकारी के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने के लिए पहुंच रहे हैं। खग्गू सराय स्थित प्राचीन शिव मंदिर और सरायतरीन के मोहल्ला कछवायन स्थित राधा कृष्ण मंदिर पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ लगी रही। श्रद्धालुओं ने दर्शन करने के साथ ही पूजा की और प्रसाद वितरण किया।
खग्गू सराय स्थित शिव मंदिर 1978 के दंगों के बाद बंद हो गया था। अब पुलिस प्रशासन के सहयोग से इस मंदिर के कपाट खोले गए हैं। इस मंदिर की देखभाल रस्तोगी समाज के लोग करते थे। 1978 में हुए दंगों के बाद रस्तोगी समाज के लोग इस इलाके से पलायन कर गए। इसलिए मंदिर की देखभाल नहीं हो सकी।
मुस्लिम आबादी के बीच मंदिर होने के कारण पूजा पाठ भी बंद कर दिया था। अब सुरक्षा के लिए लिए पुलिसकर्मी तैनात हैं और सीसीटीवी कैमरे लगे हैं। वहीं दूसरी ओर सरायतरीन के मोहल्ला कछवायन में स्थित राधा कृष्ण मंदिर को भी 32 वर्ष बाद सैनी समाज के लोगों ने खोला है।
इस मंदिर में भी 1992 के दंगों के बाद नियमित पूजा पाठ नहीं की गई। इस मंदिर पर भी दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ लग रही है।
चंदौसी में मिली 150 साल पुरानी बावड़ी में दिखी सुरंग, चार कमरे भी मिले
चंदौसी के मुस्लिम बहुल मोहल्ला लक्ष्मणगंज में बांकेबिहारी मंदिर के बाद कुछ ही दूरी पर खाली प्लाॅट में दबी मिली 150 पुरानी बावड़ी की तलाश में दूसरे दिन रविवार को खोदाई शुरू की गई। अब तक हुई खोदाई में बावड़ी में चार कमरे निकले हैं। बावड़ी में सुरंग जैसा भी रास्ता है। अधिकारियों का कहना है कि बावड़ी की खुदाई सोमवार को जारी रहेगी।
बांकेबिहारी मंदिर के पास स्थित बावड़ी शनिवार को मिली थी। रविवार की सुबह प्रशासन और नगर पालिका की टीम वहां पर पहुंची और खोदाई शुरू की गई। खोदाई में बावड़ी में बने चार कमरे नजर आए, जिसमें सुरंग नजर आ रही है। बावड़ी में कमरे और सुरंग मिलने की जानकारी पर डीएम राजेंद्र पैंसिया और एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई मौके पर पहुंच गए।
डीएम ने राजस्व टीम को मौके पर बुला कर बावड़ी की भूमि का नक्शा देखा और जायजा लिया। डीएम बताया कि अभिलेखों में 400 वर्ग मीटर एरिया में बावड़ी तालाब के रूप में दर्ज है। यह बावड़ी बिलारी के राजा के नाना के समय की बताई जा रही है, जो लगभग 150 साल पुरानी है। डीएम ने बताया कि खोदाई में बावड़ी तीन मंजिल की निकली है। दो मंजिल संगमरमर से बनी हैं। एक मंजिल ईंटों से बनी है।