संभल में बड़ा खुलासा: वक्फ संपतियों को बेचे जाने की पुष्टि, पुलिस चाैकी विवाद के बाद हुई जांच.. मुकदमा दर्ज
संभल जामा मस्जिद के पास बन रही पुलिस चौकी की जमीन वक्फ संपत्ति होने का दावा जांच में गलत पाया गया। जांच में करोड़ों की वक्फ संपत्तियों को एग्रीमेंट के जरिए खुर्दबुर्द किए जाने का खुलासा हुआ। डीएम के निर्देश पर समिति ने जांच की, जिसके आधार पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई।
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संभल जामा मस्जिद के नजदीक बन रही पुलिस चौकी की जमीन को वक्फ संपत्ति बताए जाने की दावे की जांच में तो पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन वक्फ संपत्तियों को खुर्दबुर्द किए जाने की बात सामने आई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
जामा मस्जिद के नजदीक सत्यव्रत पुलिस चौकी का निर्माण चल रहा है। कई लोगों का दावा था कि पुलिस चौकी का निर्माण वक्फ की जमीन पर किया जा रहा है। दावा करने वाले लोगों ने प्रशासन के सामने जो दस्तावेज पेश किए वह वैध नहीं मिले। इसके बाद डीएम ने एसडीएम वंदना मिश्रा के नेतृत्व में जांच समिति का गठन किया।
इसमें सीओ अनुज कुमार और पालिका ईओ मणिभूषण तिवारी को भी शामिल किया। तीन सदस्य समिति ने अपनी जांच में पाया कि जो संपत्तियां खुर्दबुर्द की गई हैं। उनका बैनामा नहीं कराकर एग्रीमेंट से बेचा गया। करोड़ों रुपये की संपत्तियों को खुर्दबुर्द किया गया है। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि ईओ की तहरीर के आधार पर संभल कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है।
वक्फ संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता है। लेकिन शहर में कई संपत्तियों को एग्रीमेंट के माध्यम से बेचा गया है। जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर यह रिपोर्ट दर्ज हुई है। आगे भी जांच जारी रहेगी। उसके आधार पर कार्रवाई भी की जाएगी। -डॉ. राजेंद्र पैंसिया, डीएम संभल
चार किलोमीटर के दायरे में संपत्ति होने के वक्फनामे से खुला मामला
प्रशासन को जो जमीन का वक्फनामा दिया गया है, उसमें 20 संपत्तियां दर्ज हैं। जामा मस्जिद के नजदीक जमीन की चौहद्दी (चारों ओर की सीमा) चार किलोमीटर के दायरे में है। एक सीमा बिछौली, दूसरी सीमा तुर्तीपुर इल्हा में लगती है। इससे स्पष्ट हो गया कि जो दस्तावेज दिए वह वैध नहीं थे और उनको फर्जी तरीके से तैयार किया गया था।
1100 गज जमीन की चौहद्दी चार किलोमीटर के दायरे में कैसे फैल सकती है। इसी सवाल के उठने के बाद डीएम द्वारा तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया था। जिसमें हकीकत भी सामने आ गई। डीएम डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि जो वक्फ संपत्ति के दस्तावेज दिए गए हैं। वह 23 अगस्त 1929 के हैं।
उसमें 20 संपत्तियों की जानकारी है। जिस जमीन में पुलिस चौकी जामा मस्जिद के नजदीक बन रही है। उसकी चौहद्दी चार किलोमीटर लंबे दायरे में दर्ज हैं। दस्तावेज के हिसाब से पूरा शहर और आसपास के गांव शामिल हो रहे हैं। इससे फर्जी दस्तावेज होने का प्रमाण मिला है।
पुलिस चौकी जहां बन रही है उसके स्वामित्व का उल्लेख नहीं है। वर्तमान में इस जमीन पर कोई मकान भी नहीं बना है। भौतिक सत्यापन के दौरान यह जानकारी सामने आई है। इसके आधार पर ही कार्रवाई की जा रही है।
वक्फ अल औलाद और अलल खैर क्या है
वक्फ अल औलाद : यह ऐसी संपत्ति होती है जिसे कोई व्यक्ति मुस्लिम समुदाय को दान में देता है। इसका मकसद किसी व्यक्ति या परिवार के कल्याण के लिए होता है।
वक्फ अलल खैर : यह ऐसी संपत्ति होती है, जिसका मालिक कोई नहीं होता। इसका मकसद आम जनता के कल्याण के लिए होता है। इस संपत्ति की देखभाल की जिम्मेदारी वक्फ बोर्ड की होती है। वक्फ बोर्ड इस संपत्ति के लिए एक प्रबंधक यानी मुतवल्ली नियुक्त करता है।