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विभागीय लापरवाही से उपकेंद्र बदहाल, आमजन को नहीं मिल पा रहा लाभ,
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चंदौसी/धनारी। कोरोना महामारी के दौरान लोगों की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भरता बढ़ी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में बने स्वास्थ्य उपकेंद्र बदहाल हालत में हैं। विभागीय अधिकारियों और एएनएम की लापरवाही के चलते जर्जर हालत में हैं। इनका आमजन को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। गांव में एएनएम ग्राम प्रधान अथवा आंगनबाड़ी केंद्र पर टीकाकरण करती हैं।
गुन्नौर ब्लॉक क्षेत्र में करीब 20 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। सभी उपकेंद्रों का निर्माण वर्ष 2008 से लेकर 2012 के मध्य तक किया गया। अधिकांश ऐसे उपकेंद्र हैं जहां निर्माण होने के बाद एएनएम एक बार भी उपकेंद्र पर नहीं पहुंचीं। वर्तमान में यह उपकेंद्र टूटी फूटी हालत में हैं। कहीं ग्रामीणों ने कब्जे कर लिए हैं, तो कहीं असामाजिक तत्वों ने दीवार तोड़ दी। कुछ की खिड़की व दरवाजे तक उखाड़कर ले गए। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह उपकेंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
ब्लॉक क्षेत्र के गांव खलीलपुर में करीब एक दशक पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था। उसके बाद से एएनएम उपकेंद्र पर टीकाकरण करने के लिए नहीं पहुंचीं। वर्तमान में हालत बदतर है। मुख्य दरवाजा टूटा है। बाहरी ओर पशु बंधते हैं, चारों ओर घास फूस उग आई है।
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एएनएम गांव में बैठक कर टीकाकरण करती हैं। कुछ समय पहले इसकी पुताई कर इसे हेल्थ एंड वेल्सनेस सेंटर का नाम दिया, फिर भी इसके दिन नहीं बदले।
क्षेत्र के गांव भिरावटी में भी स्वास्थ्य उपकेंद्र बना है। केंद्र के नाम पर उसके गेट पर ताला लटका रहता है। भवन बदहाल हालत में है। दरवाजे को जंग खा चुका है। जंग खाया दरवाजा कभी भी गिर सकता है। स्वास्थ्य सेवा के नाम पर केवल बदहाल भवन खड़ा है। जिसकी खबर विभागीय अधिकारियों ने सालों से नहीं ली है।
गांव ईसमपुर डांडा में बने स्वास्थ्य उपकेंद्र की हालत बदतर थी। पिछले दिनों की उसकी मरम्मत करा दी गई। इसके बाद भी एएनएम वहां नहीं बैठती हैं। उसके गेट पर ताला लटका रहता है। वहीं गांव भकरौली में करीब 2009 स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था। वर्तमान में जर्जर हालत में हैं। कुछ दरवाजे व खिड़की टूटे हैं। लोगों का कब्जा है। एक कोने में बरामद में ग्रामीणों ने पशु बांधने शुरू कर दिए हैं। भवन ऐसा है कि कभी भी गिर सकता है।
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गुन्नौर ब्लॉक क्षेत्र में करीब 20 स्वास्थ्य उपकेंद्र हैं। सभी उपकेंद्रों का निर्माण वर्ष 2008 से लेकर 2012 के मध्य तक किया गया। अधिकांश ऐसे उपकेंद्र हैं जहां निर्माण होने के बाद एएनएम एक बार भी उपकेंद्र पर नहीं पहुंचीं। वर्तमान में यह उपकेंद्र टूटी फूटी हालत में हैं। कहीं ग्रामीणों ने कब्जे कर लिए हैं, तो कहीं असामाजिक तत्वों ने दीवार तोड़ दी। कुछ की खिड़की व दरवाजे तक उखाड़कर ले गए। विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते यह उपकेंद्र अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं।
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ब्लॉक क्षेत्र के गांव खलीलपुर में करीब एक दशक पहले स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था। उसके बाद से एएनएम उपकेंद्र पर टीकाकरण करने के लिए नहीं पहुंचीं। वर्तमान में हालत बदतर है। मुख्य दरवाजा टूटा है। बाहरी ओर पशु बंधते हैं, चारों ओर घास फूस उग आई है।
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एएनएम गांव में बैठक कर टीकाकरण करती हैं। कुछ समय पहले इसकी पुताई कर इसे हेल्थ एंड वेल्सनेस सेंटर का नाम दिया, फिर भी इसके दिन नहीं बदले।
क्षेत्र के गांव भिरावटी में भी स्वास्थ्य उपकेंद्र बना है। केंद्र के नाम पर उसके गेट पर ताला लटका रहता है। भवन बदहाल हालत में है। दरवाजे को जंग खा चुका है। जंग खाया दरवाजा कभी भी गिर सकता है। स्वास्थ्य सेवा के नाम पर केवल बदहाल भवन खड़ा है। जिसकी खबर विभागीय अधिकारियों ने सालों से नहीं ली है।
गांव ईसमपुर डांडा में बने स्वास्थ्य उपकेंद्र की हालत बदतर थी। पिछले दिनों की उसकी मरम्मत करा दी गई। इसके बाद भी एएनएम वहां नहीं बैठती हैं। उसके गेट पर ताला लटका रहता है। वहीं गांव भकरौली में करीब 2009 स्वास्थ्य उपकेंद्र बना था। वर्तमान में जर्जर हालत में हैं। कुछ दरवाजे व खिड़की टूटे हैं। लोगों का कब्जा है। एक कोने में बरामद में ग्रामीणों ने पशु बांधने शुरू कर दिए हैं। भवन ऐसा है कि कभी भी गिर सकता है।