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जिंदगी-मौत के बीच रही 30 सेकेंड की दूरी: लघुशंका ने बचा लिया जीवन, बार-बार कर रहा ईश्वर का धन्यवाद

Sat, 18 Mar 2023 05:45 PM IST
पूजा त्रिपाठी अमर उजाला नेटवर्क, संभल
अमर उजाला नेटवर्क, संभल Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sat, 18 Mar 2023 05:45 PM IST
सार

बदायूं के फैजगंज बहटा थानाक्षेत्र के बझेड़ा गांव के सोमपाल व नरोत्तम भी शीतगृह में काम कर रहे थे। दोनों सुबह नौ बजे काम पर पहुंचे थे। दोपहर करीब ग्यारह बजे तक यहां आलू की बोरियां रखी जा रहीं थीं।

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Sambhal news 30 seconds of time saved narottam life as he went for toilet
संभल कोल्ड स्टोरेज की छत गिरी, दबे लोगों की तलाश करते कर्मी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शीतगृह हादसे ने कई जिंदगी खत्म कर दीं तो कई परिवारों को ताउम्र के लिए ऐसे जख्म दे दिए। जिन्हें भरने में सालों बीत जाएंगे। इन सब के बीच मजदूर नरोत्तम खुद को खुशनसीब समझ रहा है। जिस वक्त शीतगृह की छत गिरी।
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उससे बमुश्किल तीस सेकेंड पहले ही नरोत्तम अपने साथी मजदूरों से ये कहकर निकला था कि टाॅयलेट जा रहा हूं और एक मिनट में आ जाऊंगा। इसी दौरान हादसा हो गया और उसकी जिंदगी बच गई।
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बदायूं के फैजगंज बहटा थानाक्षेत्र के बझेड़ा गांव के सोमपाल व नरोत्तम भी शीतगृह में काम कर रहे थे। दोनों सुबह नौ बजे काम पर पहुंचे थे। दोपहर करीब ग्यारह बजे तक यहां आलू की बोरियां रखी जा रहीं थीं।
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अचानक से नरोत्तम ने आलू की बोरी छोड़ दी और उसने सोमपाल व अन्य मजदूरों से कहा कि वह टॉयलेट जा रहा है। एक मिनट में वापस आ जाऊंगा। अभी नरोत्तम ने शीतगृह से बाहर निकलकर एक दो कदम ही रखे थे कि अचानक कुछ गिरने की आवाज आई।

उसने पीछे मुड़कर देखा तो धूल का गुबार उठ रहा था और कुछ दिखाई नहीं दिया। वह घबराकर बाहर की ओर नीचे भागा। कुछ ही पल में शीतगृह गिर गया। कुछ दूर पहुंचने के बाद वह जमीन पर बैठ गया और सांस लेने के बाद उसने शोर मचाया। इसके बाद आस पड़ोस के लोग भी मौके की ओर दौड़े और बचाव कार्य में लग गए।

नरोत्तम अब बार-बार ईश्वर को याद कर रहे हैं। उसका कहना है कि वह बोरी छोड़ी बाहर नहीं आया होता तो वो ही दब सकता था। उनका कहना है कि मेरे साथी बोल रहे थे कि दस बारह बोरियां और हैं। इन्हें रखने के बाद ही चले जाना लेकिन मैंने किसी की बात नहीं सुनी और बाहर निकल आया। जिस कारण मेरी जिंदगी बच गई।

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