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हमने न मंडी व्यवस्था को खत्म किया और न ही एमएसपी को छेड़ा : जफर इस्लाम
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संभल के गांव सलखना में किसान चौपाल को संबोधित करते भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता जफर इस्लाम।
- फोटो : SAMBHAL
संभल। भाजपा ने संभल तहसील के सलखना गांव में गुरुवार की दोपहर किसान चौपाल का आयोजन किया। इसमें किसानों ने सीधा सवाल पूछा कि किसानों के हित में सरकार काम कर रही है तो फिर कृषि कानूनों में न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी क्यों नहीं दी गई।
मुख्य अतिथि के रूप में आए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा के सदस्य जफर इस्लाम ने कहा कि एमएसपी जैसी थी वैसी ही रहेगी। हमने न मंडी की व्यवस्था को खत्म किया और न ही एमएसपी को छेड़ा। सिर्फ किसान को उपज बेचने के दूसरे विकल्प दिए हैं। जो कानून पारित हुए हैं उनसे किसान को अपनी उपज पूरे देश की किसी भी मंडी में बेचने की आजादी मिल रही है। बंदिशें खत्म हो रहीं हैं। उन्हें यकीन है कि इन कानूनों से आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। धीरे-धीरे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। 2022 तक आमदनी दोगुनी हो जाएगी। किसान और खरीदार के बीच से बिचौलिए बाहर हो जाएंगे।
सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा तो खुद भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष भोले सिंह त्यागी ने उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के मुकाबले इस सरकार में कुछ अधिकारी अब ज्यादा रिश्वत चाहते हैं। किसानों के सवालों पर चौपाल में कुछ पलों के लिए माहौल गर्मा गया। चारपाइयों पर बैठे तमाम किसानों ने जब भोले सिंह के मुंह से किसानों का दर्द सुना तो ताली बजाकर समर्थन किया।
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संचालन हरेंद्र सिंह रिंकू और खिलेंद्र सिंह ने किया। किसान चौपाल को उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मत्री गुलाब देवी, प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह, जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह खड़गवंशी ने संबोधित किया। चौधरी महीपाल सिंह, परमेश्वर लाल सैनी, कमल कुमार कमल, विपिन गुप्ता, प्रेमराज त्यागी, संजय सांख्यधर, नरेंद्र सिंह मौजूद रहे। पूर्व ब्लाक प्रमुख चौधरी नरेंद्र सिंह, किसान अजय सिंह, भाकियू के नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाए जाने की मांग उठाई।
धान के दाम में इतनी मंदी क्यों
भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष चौधरी आनंद सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 1000 रुपये प्रति क्विंटल धान का दाम कम मिल रहा है। इतनी मंदी क्यों है, इस सवाल के साथ एमएसपी लागू करने के लिए कानून की मांग उठाई और पराली जलाने और गन्ने की पत्ती जलाने पर हो रही कार्रवाई का विरोध किया। साथ ही समस्या के समाधान के लिए विकल्प देने की मांग की।
एमएसपी से कम दाम पर न हो खरीद
किसान धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि एमएसपी से कम दाम पर मंडी से लेकर बाहर कहीं कोई खरीद नहीं होनी चाहिए। जब एमएसपी घोषित है तो उससे कम दाम पर खरीद क्यों होती है। अगर खरीद होती है तो फिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। अगर सरकार को धान के सही दाम दिलाने हैं तो गांवों तक क्रय केंद्र क्यों नहीं बनाए गए।
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मुख्य अतिथि के रूप में आए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं राज्यसभा के सदस्य जफर इस्लाम ने कहा कि एमएसपी जैसी थी वैसी ही रहेगी। हमने न मंडी की व्यवस्था को खत्म किया और न ही एमएसपी को छेड़ा। सिर्फ किसान को उपज बेचने के दूसरे विकल्प दिए हैं। जो कानून पारित हुए हैं उनसे किसान को अपनी उपज पूरे देश की किसी भी मंडी में बेचने की आजादी मिल रही है। बंदिशें खत्म हो रहीं हैं। उन्हें यकीन है कि इन कानूनों से आने वाले दिनों में कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। धीरे-धीरे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। 2022 तक आमदनी दोगुनी हो जाएगी। किसान और खरीदार के बीच से बिचौलिए बाहर हो जाएंगे।
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सरकारी कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार का मुद्दा तो खुद भाजपा किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष भोले सिंह त्यागी ने उठाया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों के मुकाबले इस सरकार में कुछ अधिकारी अब ज्यादा रिश्वत चाहते हैं। किसानों के सवालों पर चौपाल में कुछ पलों के लिए माहौल गर्मा गया। चारपाइयों पर बैठे तमाम किसानों ने जब भोले सिंह के मुंह से किसानों का दर्द सुना तो ताली बजाकर समर्थन किया।
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संचालन हरेंद्र सिंह रिंकू और खिलेंद्र सिंह ने किया। किसान चौपाल को उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा मत्री गुलाब देवी, प्रदेश उपाध्यक्ष और पूर्व सांसद सत्यपाल सिंह, जिलाध्यक्ष ओमवीर सिंह खड़गवंशी ने संबोधित किया। चौधरी महीपाल सिंह, परमेश्वर लाल सैनी, कमल कुमार कमल, विपिन गुप्ता, प्रेमराज त्यागी, संजय सांख्यधर, नरेंद्र सिंह मौजूद रहे। पूर्व ब्लाक प्रमुख चौधरी नरेंद्र सिंह, किसान अजय सिंह, भाकियू के नेता चौधरी वीरेंद्र सिंह ने किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाए जाने की मांग उठाई।
धान के दाम में इतनी मंदी क्यों
भाकियू के प्रांतीय उपाध्यक्ष चौधरी आनंद सिंह ने कहा कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष 1000 रुपये प्रति क्विंटल धान का दाम कम मिल रहा है। इतनी मंदी क्यों है, इस सवाल के साथ एमएसपी लागू करने के लिए कानून की मांग उठाई और पराली जलाने और गन्ने की पत्ती जलाने पर हो रही कार्रवाई का विरोध किया। साथ ही समस्या के समाधान के लिए विकल्प देने की मांग की।
एमएसपी से कम दाम पर न हो खरीद
किसान धर्मेंद्र सिंह ने कहा कि एमएसपी से कम दाम पर मंडी से लेकर बाहर कहीं कोई खरीद नहीं होनी चाहिए। जब एमएसपी घोषित है तो उससे कम दाम पर खरीद क्यों होती है। अगर खरीद होती है तो फिर कोई कार्रवाई क्यों नहीं होती। अगर सरकार को धान के सही दाम दिलाने हैं तो गांवों तक क्रय केंद्र क्यों नहीं बनाए गए।