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कांग्रेस में मची रार की भेंट चढ़ी राहुल गांधी की जनसभा
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
Updated Sun, 02 Oct 2016 02:21 AM IST
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राहुल गांधी
- फोटो : amar ujala
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कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की जनसभा के लिए स्थान तय हो गया। टेंट भी बुक हो गया। सुरक्षा के लिए एसपीजी आ गई। कांग्रेसियों ने भीड़ जुटाने के लिए दौरे शुरू कर दिए लेकिन अचानक कार्यक्रम निरस्त कर दिया गया। इससे तमाम कांग्रेसियों को झटका लगा है।
यह सवाल भी उठ रहा है पहले कार्यक्रम दिया गया और फिर अचानक क्यों छीन लिया गया। कार्यक्रम को किसी ने निरस्त कराया है या फिर हाईकमान ने ही इसे निरस्त किया है? इन सवालों के उठते ही कांग्रेस में रार है। शहर अध्यक्ष ने सीधे जिलाध्यक्ष पर कार्यक्रम को निरस्त कराने का आरोप लगाया है जबकि जिलाध्यक्ष का कहना है कि कार्यक्रम सुरक्षा संबंधी मानक पूरे न होने की वजह से निरस्त किया गया है।
संभल में तीन अक्तूबर को राहुल गांधी को संभल आना था। उनकी संभल के कुरुक्षेत्र मैदान में जनसभा होनी थी। मैदान को एसपीजी ने उपयुक्त माना था। टेंट और माइक संबंधी तमाम व्यवस्थाओं तो अंतिम रूप देने के लिए एसपीजी और संभल के जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने चुनिंदा कांग्रेसियों की बैठक की। बैठक निरीक्षण भवन में शुक्रवार को रात्रि 10 बजे तक बैठक चली। इस दौरान सब कुछ तय हो गया।
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कांग्रेस की जिलाध्यक्ष विमलेश कुमारी और शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद टेंट बुक कराने के लिए रात्रि 11 बजे पहुंचे। जिलाध्यक्ष चंदौसी चली गईं। शहर अध्यक्ष टेंट को लगवाने की तैयारी में जुट गए। इसी बीच रात्रि में टीम पीके और जिलाध्यक्ष के बीच हुए संवाद के बाद राहुल गांधी का कार्यक्रम निरस्त हो गया।
इसकी जानकारी शहर अध्यक्ष को सुबह नौ बजे तब मिली जब उन्होेंने टेंट की कुर्सियां मंगवाने के लिए ट्रैक्टर भेज रहे थे। वह सन्न रह गए। कार्यक्रम क्यों निरस्त हुआ? जिलाध्यक्ष के बताए पर यकीन करें तो कुरुक्षेत्र में सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हो पा रहे थे। जबकि शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद का कहना है कि कार्यक्रम निरस्त कराने के पीछे राजनीतिक स्वार्थ है।
पार्टी नेतृत्व के सामने शहर कांग्रेस के संगठन को कमजोर साबित कराने की साजिश थी। यह जाहिर किया गया कि संभल में कांग्रेसी टेंट और तमाम व्यवस्थाएं नहीं कर पाएंगे। जबकि हकीकत यह है कि अकेले शहर कांग्रेस ही राहुल गांधी के कार्यक्रम को कराने में सक्षम है। यह बात नेतृत्व तक पहुंचाई गई होती तो शायद कार्यक्रम निरस्त नहीं होता। शहर के ही नहीं जिले भर के कांग्रेसियों का हौसला बढ़ता पर कांग्रेस की जिलाध्यक्ष ने ही राहुल गांधी का कार्यक्रम निरस्त करा दिया। जबकि हम व्यवस्था में पूरी तरह सक्षम थे। कहीं कोई कमी नहीं थी। - तौकीर अहमद, अध्यक्ष, शहर कांग्रेस संभल
कांग्रेस की तैयारी बैठक से निकलते ही छलके थे जिलाध्यक्ष के आंसू
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे के संबंध में एक बैठक हुई थी जिसमें कई कांग्रेसियों के साथ साथ टीम पीके के सदस्य थे। कौन मंच पर रहेगा और कौन वीआईपी गैलरी में होगा। इन नामों के साथ टेंट के खर्चे भी विचार विमर्श हुआ। इसी दौरान एक नेता ने कहा कि वह 50 हजार रुपये आयोजन खर्चे के नाम पर देने को राजी हैं लेकिन जिलाध्यक्ष मंच पर न बैठें। बताते हैं कि जिलाध्यक्ष इस बात राजी हो गईं। लेकिन पार्टी के अंदरूनी विचार विमर्श के दौरान जो बातें हुईं उसे सुनकर वह काफी आहत थीं और जब वह बैठक से बाहर आईं तो उनके आंसू छलक आए।
पहले शीला का कार्यक्रम निरस्त हुआ अब राहुल का
संभल। पहले शीला दीक्षित का कार्यक्रम निरस्त हुआ। अब राहुल गांधी भी नहीं आएंगे। संभल जिले के कांग्रेसियों में इससे मायूसी है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष शिवकिशोर गौतम का कहना है कि बड़े नेता आते तो कार्यकर्ताओँ का उत्साह बढ़ता लेकिन हमारे ही नेता कार्यक्रम को टलवा रहे हैं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।
हाईकमान तक पहुंची खींचतान की खबर
सुरक्षा कारणों के साथ-साथ कहीं न कहीं यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस की गुटबाजी और खींचतान ने भी राहुल गांधी के कार्यक्रम को निरस्त कराया है। सियासी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के दौरे की तैयारी के लिए आई टीम पीके ने जिले में कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच चल रही खींतचान के बारे में हाईकमान तक खबर दी थी। इसके बाद ही कार्यक्रम निरस्त हुआ है।
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यह सवाल भी उठ रहा है पहले कार्यक्रम दिया गया और फिर अचानक क्यों छीन लिया गया। कार्यक्रम को किसी ने निरस्त कराया है या फिर हाईकमान ने ही इसे निरस्त किया है? इन सवालों के उठते ही कांग्रेस में रार है। शहर अध्यक्ष ने सीधे जिलाध्यक्ष पर कार्यक्रम को निरस्त कराने का आरोप लगाया है जबकि जिलाध्यक्ष का कहना है कि कार्यक्रम सुरक्षा संबंधी मानक पूरे न होने की वजह से निरस्त किया गया है।
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संभल में तीन अक्तूबर को राहुल गांधी को संभल आना था। उनकी संभल के कुरुक्षेत्र मैदान में जनसभा होनी थी। मैदान को एसपीजी ने उपयुक्त माना था। टेंट और माइक संबंधी तमाम व्यवस्थाओं तो अंतिम रूप देने के लिए एसपीजी और संभल के जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने चुनिंदा कांग्रेसियों की बैठक की। बैठक निरीक्षण भवन में शुक्रवार को रात्रि 10 बजे तक बैठक चली। इस दौरान सब कुछ तय हो गया।
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कांग्रेस की जिलाध्यक्ष विमलेश कुमारी और शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद टेंट बुक कराने के लिए रात्रि 11 बजे पहुंचे। जिलाध्यक्ष चंदौसी चली गईं। शहर अध्यक्ष टेंट को लगवाने की तैयारी में जुट गए। इसी बीच रात्रि में टीम पीके और जिलाध्यक्ष के बीच हुए संवाद के बाद राहुल गांधी का कार्यक्रम निरस्त हो गया।
इसकी जानकारी शहर अध्यक्ष को सुबह नौ बजे तब मिली जब उन्होेंने टेंट की कुर्सियां मंगवाने के लिए ट्रैक्टर भेज रहे थे। वह सन्न रह गए। कार्यक्रम क्यों निरस्त हुआ? जिलाध्यक्ष के बताए पर यकीन करें तो कुरुक्षेत्र में सुरक्षा के मानक पूरे नहीं हो पा रहे थे। जबकि शहर अध्यक्ष तौकीर अहमद का कहना है कि कार्यक्रम निरस्त कराने के पीछे राजनीतिक स्वार्थ है।
पार्टी नेतृत्व के सामने शहर कांग्रेस के संगठन को कमजोर साबित कराने की साजिश थी। यह जाहिर किया गया कि संभल में कांग्रेसी टेंट और तमाम व्यवस्थाएं नहीं कर पाएंगे। जबकि हकीकत यह है कि अकेले शहर कांग्रेस ही राहुल गांधी के कार्यक्रम को कराने में सक्षम है। यह बात नेतृत्व तक पहुंचाई गई होती तो शायद कार्यक्रम निरस्त नहीं होता। शहर के ही नहीं जिले भर के कांग्रेसियों का हौसला बढ़ता पर कांग्रेस की जिलाध्यक्ष ने ही राहुल गांधी का कार्यक्रम निरस्त करा दिया। जबकि हम व्यवस्था में पूरी तरह सक्षम थे। कहीं कोई कमी नहीं थी। - तौकीर अहमद, अध्यक्ष, शहर कांग्रेस संभल
कांग्रेस की तैयारी बैठक से निकलते ही छलके थे जिलाध्यक्ष के आंसू
राहुल गांधी के प्रस्तावित दौरे के संबंध में एक बैठक हुई थी जिसमें कई कांग्रेसियों के साथ साथ टीम पीके के सदस्य थे। कौन मंच पर रहेगा और कौन वीआईपी गैलरी में होगा। इन नामों के साथ टेंट के खर्चे भी विचार विमर्श हुआ। इसी दौरान एक नेता ने कहा कि वह 50 हजार रुपये आयोजन खर्चे के नाम पर देने को राजी हैं लेकिन जिलाध्यक्ष मंच पर न बैठें। बताते हैं कि जिलाध्यक्ष इस बात राजी हो गईं। लेकिन पार्टी के अंदरूनी विचार विमर्श के दौरान जो बातें हुईं उसे सुनकर वह काफी आहत थीं और जब वह बैठक से बाहर आईं तो उनके आंसू छलक आए।
पहले शीला का कार्यक्रम निरस्त हुआ अब राहुल का
संभल। पहले शीला दीक्षित का कार्यक्रम निरस्त हुआ। अब राहुल गांधी भी नहीं आएंगे। संभल जिले के कांग्रेसियों में इससे मायूसी है। कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के जिलाध्यक्ष शिवकिशोर गौतम का कहना है कि बड़े नेता आते तो कार्यकर्ताओँ का उत्साह बढ़ता लेकिन हमारे ही नेता कार्यक्रम को टलवा रहे हैं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है।
हाईकमान तक पहुंची खींचतान की खबर
सुरक्षा कारणों के साथ-साथ कहीं न कहीं यह भी माना जा रहा है कि कांग्रेस की गुटबाजी और खींचतान ने भी राहुल गांधी के कार्यक्रम को निरस्त कराया है। सियासी सूत्रों के मुताबिक राहुल गांधी के दौरे की तैयारी के लिए आई टीम पीके ने जिले में कांग्रेस के कुछ नेताओं के बीच चल रही खींतचान के बारे में हाईकमान तक खबर दी थी। इसके बाद ही कार्यक्रम निरस्त हुआ है।