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Sambhal News: 1986 और 1992 दंगों की भी पड़ताल करेंगी पुलिस

Thu, 23 Jan 2025 01:48 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Updated Thu, 23 Jan 2025 01:48 AM IST
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Police will also investigate 1986 and 1992 riots
संभल। 1978 के दंगे के बाद अब 1986 और 1992 के दंगों में दर्ज हुए मामलों की भी पुलिस जांच शुरू करेगी। दंगों में जो मामले दर्ज हुए थे उनकी वर्तमान स्थिति क्या है, उसका रिकॉर्ड मुरादाबाद से निकलवाया जाएगा। एसपी कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि मुकदमों की स्थिति देखने के बाद शासन को अवगत कराया जाएगा। शासन के निर्देश के बाद आगे की कार्रवाई होगी।
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संभल हिंसा की जांच के लिए मंगलवार को पहुंची पहुंची न्यायिक आयोग की टीम ने लोगों के बयान दर्ज किए थे। इस दौरान टीम के सामने 1986 और 1992 के दंगों के पीड़ितों ने दंगों की जांच कराकर न्याय दिलाने की मांग की थी। शशांक अग्रवाल ने अपने पिता दिनेश चंद्र शर्मा की हत्या में न्याय नहीं मिलने का हवाला दिया था और कोटपूर्वी निवासी राष्ट्रबंधू रस्तोगी ने दंगे में अपने पिता को खोने और उन्हें न्याय नहीं मिलने की जानकारी दी थी। दोनों ही पीड़ितों की मांग पर पुलिस ने 1986 और 1992 के दंगों में दर्ज हुए मामलों में रूचि ली है। एसपी का कहना है कि दंगों में कितने लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई थी और उन मुकदमों में क्या स्थिति है। जो परिवार न्याय नहीं मिलने की बात कह रहे हैं, उनको कहां अन्याय का सामना करना पड़ा। इसकी पूरी जानकारी जुटाकर शासन को अवगत कराया जाएगा।
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ट्यूशन पढ़ाने निकले थे मेरे पिता फिर घर नहीं लौटे
शशांक अग्रवाल ने बताया था कि उनका परिवार 1992 तक हातिम सराय में रहता था। उनके पिता दिनेश चंद्र शर्मा बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे। बताया कि शाम के समय उसके पिता ट्यूशन पढ़ाने के लिए घर से निकले थे, उसी दौरान दंगा शुरू हो गया। जब देर रात तक पिता घर नहीं लौटे। अगले दिन शहजादी सराय में एक तालाब में पिता का शव मिला था। उनकी हत्या कर शव फेंका गया था। शशांक ने दावा किया कि उनके पिता की हत्या दंगाइयों ने की थी। लेकिन उनके परिवार को अभी तक इंसाफ नहीं मिला। अभी भी दंगे का दर्द उनके परिवार के सीने में रहता है।
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चीनी लेने गए थे पिता, दंगाइयों ने कर दी थी हत्या

मोहल्ला कोटपूर्वी निवासी राष्ट्र बंधू रस्तोगी के पिता भगवत सरन की हत्या 1986 के दंगे के दौरान हुई थी। राष्ट्रबंधू रस्तोगी ने न्यायिक आयोग को बताया था कि उनके पिता चीनी लेने के लिए बाजार गए थे। शहर में नेजा मेला लगा था। इसी दौरान दंगा शुरू हो गया था। एक दुकानदार ने दंगे की सूचना के बाद उनके पिता को दुकान में बंद कर लिया था और अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या कर दी थी। दुकानदार और उसके साथियों को सजा नहीं मिली। परिवार वर्षों से न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन अभी तक न्याय नहीं मिल सका है। उन्होंने भी न्याय दिलाने और दंगे की जांच कराने के लिए मांग की थी।
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1978 में हुए दंगे का रिकॉर्ड एकत्र कर रही पुलिस

1978 दंगे में हिंदू परिवार पलायन करने के लिए मजबूर भी हुए थे और कई लोगों ने अपनी जान भी गंवाई थी। शासन ने 1978 दंगे का रिकॉर्ड मांगा है। उसी रिकॉर्ड को एकत्र करने में संभल पुलिस जुटी है। इस रिकॉर्ड को शासन के लिए भेजा जाएगा। इस दंगे में 16 मुकदमे दर्ज हुए थे। जिसमें हत्या, लूट, आगजनी, बलवा और अन्य कई गंभीर आरोप शामिल थे। 1993 में दर्ज मुकदमों में से आठ मुकदमे वापस हो गए थे। इन मुकदमों की वापसी के बारे में लिखा 23 दिसंबर 1993 का एक पत्र सोशल मीडिया पर वायरल भी हुआ था। जो आरडी शुक्ला विशेष सचिव न्याय विभाग ने मुरादाबाद के तत्कालीन डीएम को लिखा था।

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न्यायिक आयोग के सामने 1986 और 1992 के दंगा पीड़ित परिवारों ने अपनी बात रखी थी। इन परिवारों को न्याय मिले इसके लिए प्रयास किया जाएगा। फिलहाल दोनों दंगों के रिकॉर्ड खंगाले जाएंगे और मुकदमों की क्या स्थिति है, इसकी जानकारी कराई जाएगी। उसके बाद शासन को अवगत कराया जाएगा। -कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी, संभल
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