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तो निर्दलीय विजेताओं की बिसात पर चुना जाएगा जिला पंचायत अध्यक्ष, रणनीति तैयार करने में जुटे दिग्गज
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संभल। जिला पंचायत सदस्यों का परिणाम आ चुका है। भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर हुई है। दिग्गज भी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। गुरुवार को इसका असर भी देखने को मिला। दिग्गज जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी तैयार करने में जुटे हैं। जिस दल के पास निर्दलीय समर्थन मिला वह दल अपना जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी पर बैठा लेगा। भाजपा और सपा के पास 11-11 समर्थित प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। सपा के पाले में चार प्रत्याशी वह हैं जो सपा से ताल्लुक रखते हैं।
दो प्रत्याशी फ्री वार्ड से चुनाव जीते हैं और सपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। सपा के दो बागी कार्यकर्ताओं ने चुनाव जीता है। अब सपा नेताओं का कहना है कि उन पर बगावत करने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। वह लोग भी सपा के साथ हैं। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सपा का खेमा मजबूत है।
भाजपा भी निर्दलीय जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों से संपर्क बनाना शुरू कर रही है। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी उसके हिस्से में जाएगी जो 18 जिला पंचायत सदस्यों की टीम बना लेगा। भाजपा और सपा के दो दिग्गज नेताओं के परिवार के सदस्य ही इस चुनाव में अब तक दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा के पूर्व एमएलसी और सपा के पूर्व विधायक के परिवार से दावेदार के मैदान में आने की चर्चा दबी जुबान से चल रही है। संभवता होना भी यही है। क्योंकि इन परिवारों की ओर से पहले ही रणनीति बनाए जाने की चर्चा आम है। अब देखना यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष किस दल का होगा।
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दो प्रत्याशी फ्री वार्ड से चुनाव जीते हैं और सपा के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। सपा के दो बागी कार्यकर्ताओं ने चुनाव जीता है। अब सपा नेताओं का कहना है कि उन पर बगावत करने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। वह लोग भी सपा के साथ हैं। इस बार जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी के लिए सपा का खेमा मजबूत है।
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भाजपा भी निर्दलीय जीत हासिल करने वाले प्रत्याशियों से संपर्क बनाना शुरू कर रही है। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी उसके हिस्से में जाएगी जो 18 जिला पंचायत सदस्यों की टीम बना लेगा। भाजपा और सपा के दो दिग्गज नेताओं के परिवार के सदस्य ही इस चुनाव में अब तक दावेदार माने जा रहे हैं। भाजपा के पूर्व एमएलसी और सपा के पूर्व विधायक के परिवार से दावेदार के मैदान में आने की चर्चा दबी जुबान से चल रही है। संभवता होना भी यही है। क्योंकि इन परिवारों की ओर से पहले ही रणनीति बनाए जाने की चर्चा आम है। अब देखना यह है कि जिला पंचायत अध्यक्ष किस दल का होगा।
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