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मढ़ावली रसूलपुर में बुखार का प्रकोप पर नहीं हुई कोरोना की जांच, स्वास्थ्य विभाग बेखबर
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संभल। असमोली क्षेत्र के मढ़ावली रसूलपुर गांव में बुखार का प्रकोप है। ढाई हजार की आबादी वाले गांव में एक पखवार से बुखार का प्रकोप है लेकिन गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के लिए नहीं पहुंची। अधिकांश बुखार पीड़ित अपने घर पर अपंजीकृत चिकित्सकों से इलाज करा रहे हैं।
बुखार पीड़ित लोग या तो अपंजीकृत चिकित्सकों से लोग उपचार करा रहे हैं या फिर पड़ोसी जनपद अमरोहा के कस्बा सैदनगली में उपचार के लिए जा रहे हैं लेकिन संभल का स्वास्थ्य विभाग इससे बेखबर बना हुआ है।
गांव के नव निर्वाचित प्रधान महेश चंद्र ने बताया कि गांव में लोग बुखार से पीड़ित हैं। इस समय भी 20-25 लोगों को बुखार है। बुखार पीड़ित सुदेश कुमारी, शिवचरन, मुकेश समेत चार-पांच लोगों के घर वह खुद गए हैं। उन्होंने बताया कि बुखार पीड़ितों की अगर हालत बिगड़ती है तो पड़ोसी जनपद के सैदनगली में उपचार के लिए जाते हैं और निजी चिकित्सकों से उपचार कराते हैं लेकिन अधिकांश बुखार पीड़ित गांव में ही उपचार करा रहे हैं। गांव में एक 38 वर्षीय व्यक्ति कोरोना संक्रमित का निकला था लेकिन अब वह ठीक है और होम क्वारंटीन है।
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उदाहरण एक
घर के बाहर चारपाई पर जयप्रकाश को ग्लूकोज चढ़ाया
मढ़ावली रसूलपुर
समय 3.15 बजे
जयप्रकाश पांच दिन से बुखार पीड़ित हैं। इससे पहले उसकी पत्नी दस दिन तक बुखार से पीड़ित रहीं हैं। अब वह ठीक हो चुकी हैं। जय प्रकाश ने बताया कि शहर में जाएं तो डाक्टर देखते नहीं। फीस भी ज्यादा है। सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी बंद है। इसलिए गांव के अपंजीकृत डाक्टर से ही दवाई ली। कमजोरी थी तो डाक्टर घर में ही दवाई के साथ ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। जयप्रकाश अपने घर के बाहर बोतल चढ़वाते हुए चारपाई पर लेटे मिले।
उदाहरण दो
बुखार आया तो अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार लेकर घर में ही आराम कर रहे गोपाली
मढ़ावली रसूपुर
समय-3.30 बजे
गोपाली बुखार पीड़ित हैं। उन्हें गांव के ही चिकित्सक ने दवाई दी है। सुबह दस बजे ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई गई। गोपाली ने बताया कि सात दिन पहले पोते रवि को बुखार आया था। वह तो ठीक हो गया लेकिन अब उन्हें बुखार आ गया। घर में ही आराम कर रहे हैं और गांव के पंजीकृत चिकित्सक से दवाई ले रहे हैं। गोपाली का दावा था कि इसी दवाई से फायदा हो रहा है। कोरोना की कोई जांच नहीं कराई है।
उदाहरण तीन
परिजनों का बुखार ठीक हुआ तो रवली हुई बीमार
मढ़ावाली रसूलपुर
समय 4.10 बजे
छेदालाल की बेटी रवली अपने ही घर पर लेटी थी और बुखार होने की वजह से गांव के ही अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार चल रहा है। चिकित्सक ने खाने की दवाई दी है और ग्लूकोज की बोतल भी चढ़ाई है लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई है। रवली के परिजनों ने बताया कि उनका पूरा परिवार बुखार से पीड़ित हो चुका है लेकिन जब बाकी लोग ठीक हुए तो रवली बीमार हो गई लेकिन उसकी कोई जांच नहीं कराई गई है।
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बुखार पीड़ित लोग या तो अपंजीकृत चिकित्सकों से लोग उपचार करा रहे हैं या फिर पड़ोसी जनपद अमरोहा के कस्बा सैदनगली में उपचार के लिए जा रहे हैं लेकिन संभल का स्वास्थ्य विभाग इससे बेखबर बना हुआ है।
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गांव के नव निर्वाचित प्रधान महेश चंद्र ने बताया कि गांव में लोग बुखार से पीड़ित हैं। इस समय भी 20-25 लोगों को बुखार है। बुखार पीड़ित सुदेश कुमारी, शिवचरन, मुकेश समेत चार-पांच लोगों के घर वह खुद गए हैं। उन्होंने बताया कि बुखार पीड़ितों की अगर हालत बिगड़ती है तो पड़ोसी जनपद के सैदनगली में उपचार के लिए जाते हैं और निजी चिकित्सकों से उपचार कराते हैं लेकिन अधिकांश बुखार पीड़ित गांव में ही उपचार करा रहे हैं। गांव में एक 38 वर्षीय व्यक्ति कोरोना संक्रमित का निकला था लेकिन अब वह ठीक है और होम क्वारंटीन है।
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उदाहरण एक
घर के बाहर चारपाई पर जयप्रकाश को ग्लूकोज चढ़ाया
मढ़ावली रसूलपुर
समय 3.15 बजे
जयप्रकाश पांच दिन से बुखार पीड़ित हैं। इससे पहले उसकी पत्नी दस दिन तक बुखार से पीड़ित रहीं हैं। अब वह ठीक हो चुकी हैं। जय प्रकाश ने बताया कि शहर में जाएं तो डाक्टर देखते नहीं। फीस भी ज्यादा है। सरकारी अस्पतालों में भी ओपीडी बंद है। इसलिए गांव के अपंजीकृत डाक्टर से ही दवाई ली। कमजोरी थी तो डाक्टर घर में ही दवाई के साथ ग्लूकोज की बोतल चढ़ा दी। जयप्रकाश अपने घर के बाहर बोतल चढ़वाते हुए चारपाई पर लेटे मिले।
उदाहरण दो
बुखार आया तो अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार लेकर घर में ही आराम कर रहे गोपाली
मढ़ावली रसूपुर
समय-3.30 बजे
गोपाली बुखार पीड़ित हैं। उन्हें गांव के ही चिकित्सक ने दवाई दी है। सुबह दस बजे ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई गई। गोपाली ने बताया कि सात दिन पहले पोते रवि को बुखार आया था। वह तो ठीक हो गया लेकिन अब उन्हें बुखार आ गया। घर में ही आराम कर रहे हैं और गांव के पंजीकृत चिकित्सक से दवाई ले रहे हैं। गोपाली का दावा था कि इसी दवाई से फायदा हो रहा है। कोरोना की कोई जांच नहीं कराई है।
उदाहरण तीन
परिजनों का बुखार ठीक हुआ तो रवली हुई बीमार
मढ़ावाली रसूलपुर
समय 4.10 बजे
छेदालाल की बेटी रवली अपने ही घर पर लेटी थी और बुखार होने की वजह से गांव के ही अपंजीकृत चिकित्सक से उपचार चल रहा है। चिकित्सक ने खाने की दवाई दी है और ग्लूकोज की बोतल भी चढ़ाई है लेकिन कोई जांच नहीं कराई गई है। रवली के परिजनों ने बताया कि उनका पूरा परिवार बुखार से पीड़ित हो चुका है लेकिन जब बाकी लोग ठीक हुए तो रवली बीमार हो गई लेकिन उसकी कोई जांच नहीं कराई गई है।