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पहले से सरकारी आवास मिला होता तो नहीं जाती मासूम की जान
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बहजोई के मैथरा धर्मपुर गांव में बारिश से गिरी मकान की दीवार
- फोटो : CHANDAUSI
बहजोई। गांव मैथरा-धर्मपुर में बारिश के चलते मकान की कच्ची दीवार गिरने से मलबे के नीचे दबने से एक मासूम शहजाद की मौत व दूसरे गुफरान के घायल होने जाने के बाद मौके पर एकत्र ग्रामीणों का कहना था कि यदि पहले सर्वे कराकर यदि सरकार की ओर से मिलने वाला आवास अलीजान मिल जाता, तो शायद अब मकान की कच्ची दीवार गिरने के चलते मासूम की जान न जाती।
ग्रामीणों का कहना था कि सरकारी तंत्र की ढिलाई के चलते कच्चा मकान होने के बावजूद अलीजान को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका और वह अपने छोटे बच्चों के साथ कच्चे मकान में ही रहने को मजबूर था।
यह हाल तब है जबकि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से गरीबों को आवास उपलब्ध कराए जाने के लिए योजना संचालित है और आए दिन सत्ताधारी राजनेताओं व प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों की ओर से आवास योजना का बखान किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक अलीजान गांव-गांव फेरी लगाकर बच्चों के खाने का सामान बेचकर परिवार के साथ गुजर-बसर करता था।
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ऐसे में न तो अलीजान को कच्चा मकान होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सका और न ही मुख्यमंत्री आवास योजना।
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वैसे तो जिले भर में गांव-गांव सर्वे कराकर वर्ष 2011 की सूची के पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मुहैय्या करा दिए गए हैं। अलीजान का नाम वर्ष 2011 की सूची में न होने के कारण आवास नहीं मिल सका होगा। रही बात मुख्यमंत्री आवास योजना की, तो मुख्यमंत्री आवास योजना में चार कैटेगरी के लोगों को ही आवास मुहैय्या कराया जा सकता है, जिनमें कि व्यक्ति मुसहर जाति का हो, कालाजार रोग से पीड़ित हो, दैवीय आपदा से प्रभावित हो या फिर इंसेफ्लाइटिस बीमारी से ग्रस्त हो। रमेश चंद्र, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, जिला संभल।
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ग्रामीणों का कहना था कि सरकारी तंत्र की ढिलाई के चलते कच्चा मकान होने के बावजूद अलीजान को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिल सका और वह अपने छोटे बच्चों के साथ कच्चे मकान में ही रहने को मजबूर था।
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यह हाल तब है जबकि केंद्र व राज्य सरकार की ओर से गरीबों को आवास उपलब्ध कराए जाने के लिए योजना संचालित है और आए दिन सत्ताधारी राजनेताओं व प्रशासनिक व विभागीय अधिकारियों की ओर से आवास योजना का बखान किया जाता है। ग्रामीणों के मुताबिक अलीजान गांव-गांव फेरी लगाकर बच्चों के खाने का सामान बेचकर परिवार के साथ गुजर-बसर करता था।
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ऐसे में न तो अलीजान को कच्चा मकान होने के बावजूद प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिल सका और न ही मुख्यमंत्री आवास योजना।
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वैसे तो जिले भर में गांव-गांव सर्वे कराकर वर्ष 2011 की सूची के पात्र लाभार्थियों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मुहैय्या करा दिए गए हैं। अलीजान का नाम वर्ष 2011 की सूची में न होने के कारण आवास नहीं मिल सका होगा। रही बात मुख्यमंत्री आवास योजना की, तो मुख्यमंत्री आवास योजना में चार कैटेगरी के लोगों को ही आवास मुहैय्या कराया जा सकता है, जिनमें कि व्यक्ति मुसहर जाति का हो, कालाजार रोग से पीड़ित हो, दैवीय आपदा से प्रभावित हो या फिर इंसेफ्लाइटिस बीमारी से ग्रस्त हो। रमेश चंद्र, परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण, जिला संभल।