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फसलों को भारी नुकसान लेकिन नहीं मिलेगा मुआवजा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 12 Mar 2020 12:06 AM IST
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no compensation of weast crop in sambhal
संभल/चंदौसी/गुन्नौर। मार्च में फसलों को तेज हवा और बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से हुई क्षति का आकलन पूरा हो गया है। जिले में दस हजार से अधिक किसानों की गेहूं की फसल को क्षति हुई है लेकिन राजस्व अधिकारियों ने जो आकलन किया है उसमें क्षति को मुआवजे लायक नहीं माना गया। प्रशासन की रिपोर्ट में अधिकतम क्षति 14 प्रतिशत फसल की मानी गई है। जबकि किसी भी तरह की आर्थिक मदद और क्षतिपूर्ति तभी मिलती है जब क्षति 33 प्रतिशत या इससे अधिक हो। ऐसे में क्षतिपूर्ति की उम्मीद कर रहे किसानों को झटका लगा है।
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अब किसी भी किसान को मार्च में हुुई क्षति के बदले न बीमा क्लेम मिलेगा और न ही दैवी आपदा मद से कोई मुआवजा मिले सकेगा। 12-13 दिसंबर 2019 को ओलावृष्टि से संभल तहसील क्षेत्र में जो क्षति हुई थी उसमें जिला प्रशासन ने संभल तहसील के किसानों के लिए 12 करोड़ रुपये दैवी आपदा मद से मांगे हैं। इसमें आठ करोड़ रुपये आलू किसानों के हैं और चार करोड़ रुपये सरसों की क्षति के बदले किसानों को दिए जाने हैं।
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एक आकलन के मुताबिक 12-13 दिसंबर को हुई क्षति में 200 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य की फसलें बर्बाद हो गईं थीं लेकिन मार्च में कई बार हुई बारिश और ओलावृष्टि हुई क्षति को मुआवजे के लायक नहीं माना गया है। गुन्नौर तहसील में 28234 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था जिसमें 729 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई लेकिन दस प्रतिशत से अधिक नहीं हुई है। संभल तहसील में 75647 हेक्टेयर गेहूं बोया गया था जिसमें 5137 किसानों की 27403 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। गन्नौर और चंदौसी तहसील में भी पांच हजार किसानों की फसल को क्षति हुई है। लेकिन क्षति पंद्रह प्रतिशत भी नहीं मानी गई है। चंदौसी तहसील में दस प्रतिशत तक अधिकतम क्षति हुई है। क्षतिपूर्ति के लिए 33 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए।
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क्षति के आकलन से शासन को अवगत कराया गया
संभल। अपर जिलाधिकारी केके अवस्थी ने बताया कि गेहूं की फसल को 14 प्रतिशत तक ही क्षति हुई है जो मुआवजे के लायक नहीं है। यह आकलन राजस्व कर्मचारियों को खेत में भेजकर कराया गया है। खुद उन्होंने भी गांवों का दौरा किया है और सही स्थिति से शासन को अवगत कराया गया है।
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