धनारी थाने में आग लगाने वाले बगढेर निवासी मोरध्वज की दिल्ली एम्स में मौत हो गई। दुख और तनाव में घिरे गांव बगढेर के लोग खुद को आग के हवाले करने वाले मोरध्वज मामले में अब तक किसी पुलिसकर्मी पर कोई कार्रवाई न होने से हैरान हैं। लोग कह रहे हैं कि थाने पर इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद भी अब तक किसी पुलिसकर्मी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
जबकि उस वक्त थाने पर भारी भरकम फोर्स था। गेट पर पहरा ड्यूटी भी चल रही थी। रविवार को गमगीन माहौल में मोरध्वज के शव का अंतिम संस्कार किया गया। ग्रामीणों के बीच आपसी चर्चा में यह सवाल उठता रहा कि मोरध्वज ने थाने के गेट पर पहुंचकर खुद पर पेट्रोल डाला। आग लगाकर थाने में घुस गया और इस बीच उसे एक भी पुलिसकर्मी आग लगाने से नहीं रोक सका।
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मोरध्वज ने धनारी थाने में लगा ली आग
- फोटो : संवाद
यही नहीं, जिनकी थाने से रिहाई न होने की बात ने मोरध्वज को इस नौबत तक पहुंचाया, उसके आग लगाते ही उन्हें छोड़ दिया गया, जबकि कुछ वक्त पहले तक पुलिस मोरध्वज के चचेरे भाई लखपत सिंह और रिश्ते के भतीजे भारत सिंह को छोड़ने के बजाय शांतिभंग में कार्रवाई की बात कह रही थी।
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मोरध्वज ने धनारी थाने में लगा ली आग
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लोग बोले, अगर पुलिस दोनों को पहले ही छोड़ देती तो मोरध्वज के इस तरह का कदम उठाने की स्थिति ही नहीं बनती। खुद को आग लगाने से लेकर जान जाने तक के इतने बड़े और गंभीर मामले में किसी पुलिसकर्मी की जवाबदेही और जिम्मेदारी तय न होना हर किसी को चौंका रहा है। धनारी थाने पर खुद को आग लगाकर दिल्ली में इलाज के दौरान दम तोड़ने वाले गांव बगढेर निवासी मोरध्वज का शव पहुंचने से पहले ही क्षेत्र में फोर्स की मुस्तैदी बढ़ गई।
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मोरध्वज ने धनारी थाने में लगा ली आग
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शव आने से लेकर अंतिम संस्कार तक परिजनों का या ग्रामीणों का गुस्सा भड़कने की आशंका में रविवार को चप्पे-चप्पे पर पुलिस थी। यही नहीं, अतिरिक्त सतर्कता बरतते हुए एक प्लाटून पीएसी भी गांव में लगाई गई थी। जबकि हर गतिविधि पर निगाह रखने के लिए ड्रोन कैमरे भी इलाके में गतिशील थे। हालांकि शव आने से लेकर अंत्येष्टि पूरी होने तक ग्रामीणों या परिजनों की कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। शव पहुंचते ही परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया। गमगीन माहौल में शाम चार बजे अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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मोरध्वज ने धनारी थाने में लगा ली आग
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इसके बाद भी रात तक फोर्स की निगरानी बनी रही। अधिकारी भी फोन से माहौल की जानकारी ले रहे थे। मृतक के भाई राकेश कुमार ने आर्थिक मदद की मांग उठाई। राकेश के मुताबिक मोरध्वज की दो पत्नियां हैं और पांच साल की उम्र का एक बेटा है। इन तीनों के सामने आमदनी का कोई मजबूत साधन नहीं है। लिहाजा इनकी आर्थिक मदद होनी चाहिए।