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स्वच्छता ग्राहियों के साथ गांवों से निष्क्रिय हुईं निगरानी समितियां

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 14 Dec 2021 12:51 AM IST
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Monitoring committees deactivated from villages along with sanitation recipients
संभल। ग्रामीणों को शौचालय का प्रयोग करने और गांव में साफ-सफाई रखने के साथ अन्य कार्यों में जागरूकता लाने के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर स्वच्छता ग्राही को तैनात किया गया था। निगरानी समितियां बनाई गईं थी। बाकायदा इन्हें विशेष ट्रेनिंग भी दी गई थी, लेकिन अब यह गांवों में सक्रिय नहीं हैं। जिससे गांवों में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हैं।
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मोदी सरकार ने साल 2014 में पहले स्वच्छ भारत अभियान की शुरुआत की थी, इसके तहत देश में बड़े स्तर पर शौचालय बनाए गए। सफाई अभियान भी चलाया गया। जिसके बाद शौचालयों के रख-रखाव और खुले में शौच जाने वालों पर नजर रखने के लिए स्वच्छता ग्राही तैनात किए गए। तैनाती की मंशा केवल नजर रखने के लिए ही नहीं बल्कि, शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने से लेकर खुले में शौच से होने वाले दुष्प्रभावों से भी अवगत कराने और ग्रामीणों के बीच जागरूकता की अलख जगाने का भी जिम्मा सौंपा गया था। भले ही इस पूरी प्रक्रिया पर विभागीय अफसरों की नजर रखने के दावे हों लेकिन हकीकत यह है कि न गांवों में स्वच्छता ग्राही कहीं नजर आ रहे हैं और न निगरानी समितियां कोई काम करती दिख रही हैं।
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स्थिति यह है कि गांवों में अभी भी जहां-तहां कूड़े के ढेर लगे हुए हैं और गंदगी फैली हुई है। इससे जहां राहगीरों को आने-जाने में दिक्कत है तो वहीं गांव के लोगों को भी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। बताते चले कि संभल जनपद में 670 ग्राम पंचायतें हैं। हरेक ग्राम पंचायत में निगरानी समिति का गठन है और स्वच्छता ग्राही तैनात हैं, लेकिन इनके सक्रिय न होने से सरकार के स्वच्छता अभियान की मंशा पर पानी फिर रहा है।
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केस-एक
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव बिचपुरी में मुख्य मार्ग पर गंदगी फैली हुई है। कीचड़ और जलभराव है। इसे आठ माह का वक्त बीत गया है, कोई ध्यान देने को तैयार नहीं है। यह रास्ता गांव के प्राथमिक विद्यालय को जाता है। आने-जाने वाले बच्चे भी खूब परेशान होते हैं।

केस-दो
पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांव मल्लाह मुस्तफाबाद में नालियों की कीचड़ न निकलने से मुख्य मार्ग पर जलभराव है। दो पहिया वाहन चालक गिरकर चोटिल हो रहे हैं। समस्या कई माह से बनी हुई है, लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है। जिसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
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