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Sambhal News: मोबाइल बढ़ा रहा आंखों की परेशानी, नेत्र रोगियों की संख्या बढ़ी
Thu, 01 Jan 2026 01:21 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 01 Jan 2026 01:21 AM IST
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चंदौसी (संभल)। तेजी से बदलती जीवनशैली में मोबाइल फोन और सोशल मीडिया लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन जरूरत से ज्यादा उपयोग लोगों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। खासकर बच्चे और युवा इसकी चपेट में अधिक आ रहे हैं। मोबाइल के ज्यादा प्रयोग से नींद, आंखों और गर्दन से जुड़ी परेशानियां बढ़ रही हैं। सीएचसी में हर रोज 30 से 35 ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं।
सीएचसी में तैनात नेत्र चिकित्सक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि आंखों से जुड़ी समस्याओं के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण आंखों की परेशानी लेकर पहुंचते हैं। इनमें बच्चों और युवाओं की संख्या अधिक रहती है। हर रोज ऐसे करीब 30 - 35 मरीज सीएचसी आ रहे हैं।
नेत्र चिकित्सक ने बताया कि देर रात तक मोबाइल देखने की आदत से नींद पूरी नहीं हो पाती। मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर की प्राकृतिक नींद प्रक्रिया (मेलाटोनिन हार्मोन) प्रभावित करती है। जिससे अनिद्रा की समस्या बढ़ती है। साथ ही, इससे आंखों में सूखापन, जलन, धुंधला दिखना और आंखों के आसपास भारीपन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। लोग अगर मोबाइल का सीमित उपयोग करें और आंखों व शरीर को समय-समय पर आराम दें। तो ऐसी बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं।
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नेत्र चिकित्सक के सुझाव
- रात में सोने से करीब एक घंटा पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दे।
- मोबाइल चलाते समय गर्दन न झुकाएं।
- बच्चों को मोबाइल से दूर रखे।
- मोबाइल चलाते समय पलकों को झपकाएं।
- आउटडोर खेलकूद और नियमित व्यायाम करें।
- नेत्र संबंधित कोई भी परेशानी होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।
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सीएचसी में तैनात नेत्र चिकित्सक डॉ. एमपी सिंह ने बताया कि आंखों से जुड़ी समस्याओं के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन ओपीडी में आने वाले कुल मरीजों में से बड़ी संख्या ऐसे लोगों की होती है, जो मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल के कारण आंखों की परेशानी लेकर पहुंचते हैं। इनमें बच्चों और युवाओं की संख्या अधिक रहती है। हर रोज ऐसे करीब 30 - 35 मरीज सीएचसी आ रहे हैं।
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नेत्र चिकित्सक ने बताया कि देर रात तक मोबाइल देखने की आदत से नींद पूरी नहीं हो पाती। मोबाइल से निकलने वाली नीली रोशनी शरीर की प्राकृतिक नींद प्रक्रिया (मेलाटोनिन हार्मोन) प्रभावित करती है। जिससे अनिद्रा की समस्या बढ़ती है। साथ ही, इससे आंखों में सूखापन, जलन, धुंधला दिखना और आंखों के आसपास भारीपन जैसी दिक्कतें बढ़ जाती हैं। लोग अगर मोबाइल का सीमित उपयोग करें और आंखों व शरीर को समय-समय पर आराम दें। तो ऐसी बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं।
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नेत्र चिकित्सक के सुझाव
- रात में सोने से करीब एक घंटा पहले मोबाइल का उपयोग बंद कर दे।
- मोबाइल चलाते समय गर्दन न झुकाएं।
- बच्चों को मोबाइल से दूर रखे।
- मोबाइल चलाते समय पलकों को झपकाएं।
- आउटडोर खेलकूद और नियमित व्यायाम करें।
- नेत्र संबंधित कोई भी परेशानी होने पर चिकित्सक से संपर्क करें।