{"_id":"5eceb1b58ebc3e90a1758fe1","slug":"market-open-after-62-days-in-sambhal-sambhal-news-mbd3505792165","type":"story","status":"publish","title_hn":"लॉक डाउन के बाद पहली बार खुला संभल का बाजार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लॉक डाउन के बाद पहली बार खुला संभल का बाजार
विज्ञापन
संभल के मुख्य बाजार में बर्तन बेचतीं बुजुर्ग महिला मुख्तरी।
- फोटो : SAMBHAL
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संभल। संभल का बाजार 25 मार्च से बंद था। सिर्फ आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खुल रहीं थीं। अब दुकानें 62 दिन बाद बुधवार को पहली बार खुलीं हैं। इन दुकानों के खुलने के बाद बाजार में रौनक है। जो लोग छोटे कामों से जुड़ेे हैं उन्होंने परिवार की गुजर के लिए कुछ कमाई भी की। इन चेहरों पर रौनक दिखाई दी।
मोची का काम करने वाले सीताराम 3 बजे कोतवाली के नजदीक अपनी फड़ लगाए बैठे थे। जूतों पर पॉलिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से पहली बार काम किया है। ग्राहक तो कम आए पर परिवार की गुजर के लिए कमाई हो गई।
अब तक घर पर ही रहे परिवार की गुजर के लिए मुश्किल खड़ी हो गई थी। प्रशासन ने अब राहत दी है तो कुछ उम्मीद जागी है। शाम 4.15 बजे सब्जी मंडी के मोड़ पर 75 वर्षीय मुख्तरी मिट्टी के बर्तन बेचने के लिए बैठी थी। जब कोई ग्राहक नहीं था। लेकिन, सुबह 9 बजे से दोपहर तक कई ग्राहक आए जो बर्तन खरीदकर ले गए। उन्होंने बताया कि वह बर्तन खरीदकर लातीं हैं। बर्तन बेचकर जो मुनाफा मिलता है उससे परिवार की गुजर हो जाती है।
विज्ञापन
बुधवार को पहली बार कुछ बर्तन बेचे हैं। परिवार की गुजर के लिए कुछ रुपये भी मिल गए हैं। अब गांवों से लोग शहर तक पहुंचे तो शायद ज्यादा बर्तन बिकेंगे। शाम 5 बजे दुकान बंद कर रहे किराना व्यापारी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि राहत का पहला दिन था। इसलिए ग्राहक पूरी तरह नहीं पहुंच सके। ग्रामीण क्षेत्रों से ग्राहक आएं तो कुछ बिक्री बढ़े।
विज्ञापन
मोची का काम करने वाले सीताराम 3 बजे कोतवाली के नजदीक अपनी फड़ लगाए बैठे थे। जूतों पर पॉलिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से पहली बार काम किया है। ग्राहक तो कम आए पर परिवार की गुजर के लिए कमाई हो गई।
विज्ञापन
अब तक घर पर ही रहे परिवार की गुजर के लिए मुश्किल खड़ी हो गई थी। प्रशासन ने अब राहत दी है तो कुछ उम्मीद जागी है। शाम 4.15 बजे सब्जी मंडी के मोड़ पर 75 वर्षीय मुख्तरी मिट्टी के बर्तन बेचने के लिए बैठी थी। जब कोई ग्राहक नहीं था। लेकिन, सुबह 9 बजे से दोपहर तक कई ग्राहक आए जो बर्तन खरीदकर ले गए। उन्होंने बताया कि वह बर्तन खरीदकर लातीं हैं। बर्तन बेचकर जो मुनाफा मिलता है उससे परिवार की गुजर हो जाती है।
विज्ञापन
बुधवार को पहली बार कुछ बर्तन बेचे हैं। परिवार की गुजर के लिए कुछ रुपये भी मिल गए हैं। अब गांवों से लोग शहर तक पहुंचे तो शायद ज्यादा बर्तन बिकेंगे। शाम 5 बजे दुकान बंद कर रहे किराना व्यापारी मोहम्मद इकबाल ने बताया कि राहत का पहला दिन था। इसलिए ग्राहक पूरी तरह नहीं पहुंच सके। ग्रामीण क्षेत्रों से ग्राहक आएं तो कुछ बिक्री बढ़े।