{"_id":"6a9734b7be9b762bca03a141","slug":"roof-missing-lessons-under-a-tarpaulin-sambhal-news-c-204-1-chn1003-132303-2026-09-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sambhal News: छत लापता... तिरपाल तले ककहरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sambhal News: छत लापता... तिरपाल तले ककहरा
Wed, 02 Sep 2026 01:55 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Wed, 02 Sep 2026 01:55 AM IST
विज्ञापन
जुनावई के लतीफपुर टोड़ी गांव में स्थित प्राथमिक विद्यालय में तिरपाल के नीचे शिक्षा ग्रहण करते
- फोटो : Archive
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जुनावई (संभल)। सरकार के 'सब पढ़े-सब बढ़े' के सुनहरे नारों के बीच जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कई सरकारी स्कूलों में बच्चे पक्की छत के नीचे नहीं, बल्कि तिरपाल के नीचे बुनियादी शिक्षा (ककहरा) सीखने के लिए मजबूर हैं।
ऐसा ही एक प्राथमिक विद्यालय जुनावई ब्लॉक के गांव लतीफपुर टोड़ी में संचालित है, जो शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल रहा है। स्कूल के तीन जर्जर कक्षों को दो साल पहले नीलाम कर तोड़ दिया गया, लेकिन विभाग नए कक्ष बनाना भूल गया। स्कूल में शेष बचे एक कक्ष में पहली से पांचवीं तक के 139 बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। जगह कम होने की वजह से कक्षा एक और तीन के बच्चों को स्कूल परिसर में तिरपाल डालकर पढ़ाई कराई जाती है।
लतीफपुर टोड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में 139 बच्चों का नामांकन है। रोजाना करीब 100 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए केवल एक ही कक्ष है। एक ही कक्ष में कक्षा दो, चार और पांचवीं के बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। शोर-शराबे में न तो शिक्षक पढ़ा पाते हैं, न बच्चे समझ पाते हैं।
विज्ञापन
जब एक कमरे में जगह नहीं बची तो बाकी कक्षाओं और आंगनबाड़ी के नौनिहालों के लिए स्कूल के मैदान में तिरपाल डालकर पढ़ाया जाता है। प्रधानाध्यापक लेखपाल सिंह ने बताया कि तीन कक्षों की नीलामी के बाद से एक ही कमरा बचा है। मजबूरी में दो कक्षाओं को मैदान में पढ़ाना पड़ रहा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब इन बच्चों को पंचायत भवन में शिफ्ट करने की तैयारी है।
मौसम संग शिक्षा विभाग की संवदेनहीनता की मार
गर्मियों में तपते तिरपाल के नीचे भट्ठी जैसा माहौल, बारिश में ऊपर से टपकता पानी और सर्दियों में ठिठुरती अंगुलियों से कलम साधने की जद्दोजहद। यह इन बच्चों की रोजमर्रा की नियति बन चुकी है। यह केवल मौसम की मार नहीं बल्कि शिक्षा विभाग की प्रशासनिक संवेदनहीनता और लचर रवैये की जीती-जागती तस्वीर है।
खंड शिक्षा बोले- जल्द बनेंगे कक्ष
खंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने माना कि एक कक्ष में पांच कक्षाएं नहीं चल सकतीं, इसलिए तिरपाल के नीचे पढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि नए कक्षों का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जल्द ही निर्माण होगा। सवाल यह है कि जब दो साल में प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं आया तो बच्चों का भविष्य कब तक तिरपाल के नीचे रहेगा। ग्रामीणों में विभाग की इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने डीएम से जल्द नए कक्षों का निर्माण कराने और बच्चों को सुरक्षित छत मुहैया कराने की मांग की है।
विज्ञापन
ऐसा ही एक प्राथमिक विद्यालय जुनावई ब्लॉक के गांव लतीफपुर टोड़ी में संचालित है, जो शिक्षा विभाग के दावों की पोल खोल रहा है। स्कूल के तीन जर्जर कक्षों को दो साल पहले नीलाम कर तोड़ दिया गया, लेकिन विभाग नए कक्ष बनाना भूल गया। स्कूल में शेष बचे एक कक्ष में पहली से पांचवीं तक के 139 बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। जगह कम होने की वजह से कक्षा एक और तीन के बच्चों को स्कूल परिसर में तिरपाल डालकर पढ़ाई कराई जाती है।
विज्ञापन
लतीफपुर टोड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय में 139 बच्चों का नामांकन है। रोजाना करीब 100 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं, लेकिन उनके बैठने के लिए केवल एक ही कक्ष है। एक ही कक्ष में कक्षा दो, चार और पांचवीं के बच्चों को भेड़-बकरियों की तरह एक साथ बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। शोर-शराबे में न तो शिक्षक पढ़ा पाते हैं, न बच्चे समझ पाते हैं।
विज्ञापन
जब एक कमरे में जगह नहीं बची तो बाकी कक्षाओं और आंगनबाड़ी के नौनिहालों के लिए स्कूल के मैदान में तिरपाल डालकर पढ़ाया जाता है। प्रधानाध्यापक लेखपाल सिंह ने बताया कि तीन कक्षों की नीलामी के बाद से एक ही कमरा बचा है। मजबूरी में दो कक्षाओं को मैदान में पढ़ाना पड़ रहा है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर अब इन बच्चों को पंचायत भवन में शिफ्ट करने की तैयारी है।
मौसम संग शिक्षा विभाग की संवदेनहीनता की मार
गर्मियों में तपते तिरपाल के नीचे भट्ठी जैसा माहौल, बारिश में ऊपर से टपकता पानी और सर्दियों में ठिठुरती अंगुलियों से कलम साधने की जद्दोजहद। यह इन बच्चों की रोजमर्रा की नियति बन चुकी है। यह केवल मौसम की मार नहीं बल्कि शिक्षा विभाग की प्रशासनिक संवेदनहीनता और लचर रवैये की जीती-जागती तस्वीर है।
खंड शिक्षा बोले- जल्द बनेंगे कक्ष
खंड शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिंह ने माना कि एक कक्ष में पांच कक्षाएं नहीं चल सकतीं, इसलिए तिरपाल के नीचे पढ़ाया जा रहा है। उनका कहना है कि नए कक्षों का प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जल्द ही निर्माण होगा। सवाल यह है कि जब दो साल में प्रस्ताव कागजों से बाहर नहीं आया तो बच्चों का भविष्य कब तक तिरपाल के नीचे रहेगा। ग्रामीणों में विभाग की इस लापरवाही को लेकर भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने डीएम से जल्द नए कक्षों का निर्माण कराने और बच्चों को सुरक्षित छत मुहैया कराने की मांग की है।