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आ मां आ तुझे दिल ने पुकारा...
अमर उजाला ब्यूरो/चंदौसी
Updated Wed, 13 Apr 2016 12:51 AM IST
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देवी मां के चित्रों संग बच्चे
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मां भगवती के छठे स्वरूप मां कात्यायनी का चैत्र नवरात्र के पांचवें दिन मंगलवार को विधि विधान से पूजन अर्चन किया गया। भोर से ही पूजन अर्चन के लिए भक्तों की भीड़ रही। देर शाम भव्य आरती के बाद मां भगवती को भोग लगाया। श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर अपने व्रत का परायण किया।
मां का जलाभिषेक किया गया। मौलागढ़ स्थित मां कंकाली का प्राचीन मंदिर, श्रीराम बाग धाम स्थित सिद्धिदात्री नव दुर्गा मंदिर, सीता रोड स्थित बगिया वाली माता मंदिर, सुभाष रोड रायसत्ती स्थित माता मंदिर, मिलक मौलागढ़ स्थित मां पूर्णागिरी नव दुर्गा देवी धाम, ब्रह्मबाजार स्थित श्रीदेवी गंगा मंदिर में भक्तों की भीड़ का नजारा रहा।
दिन भर भजन कीर्तन के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान किया गया। देर शाम भक्तों ने मां का पूजन अर्चन कर भोग लगाया। भव्य आरती की गई। इसके बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर व्रत पारायण किया। जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
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नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'आज्ञाचक्र’ में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से मां के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद मां भगवती का नाम कात्यायनी पड़ा।
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मां का जलाभिषेक किया गया। मौलागढ़ स्थित मां कंकाली का प्राचीन मंदिर, श्रीराम बाग धाम स्थित सिद्धिदात्री नव दुर्गा मंदिर, सीता रोड स्थित बगिया वाली माता मंदिर, सुभाष रोड रायसत्ती स्थित माता मंदिर, मिलक मौलागढ़ स्थित मां पूर्णागिरी नव दुर्गा देवी धाम, ब्रह्मबाजार स्थित श्रीदेवी गंगा मंदिर में भक्तों की भीड़ का नजारा रहा।
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दिन भर भजन कीर्तन के माध्यम से मां की महिमा का गुणगान किया गया। देर शाम भक्तों ने मां का पूजन अर्चन कर भोग लगाया। भव्य आरती की गई। इसके बाद भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर व्रत पारायण किया। जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।
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नवरात्र के छठे दिन मां कात्यायनी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन 'आज्ञाचक्र’ में स्थित होता है। योगसाधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस चक्र में स्थित मन वाला साधक मां कात्यायनी के चरणों में अपना सर्वस्व निवेदित कर देता है। परिपूर्ण आत्मदान करने वाले ऐसे भक्तों को सहज भाव से मां के दर्शन प्राप्त हो जाते हैं।
कत नामक एक प्रसिद्ध महर्षि थे। उनके पुत्र ऋषि कात्य हुए। इन्हीं कात्य के गोत्र में विश्वप्रसिद्ध महर्षि कात्यायन उत्पन्न हुए थे। इन्होंने भगवती पराम्बा की उपासना करते हुए बहुत वर्षों तक कठिन तपस्या की थी। उनकी इच्छा थी मां भगवती उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लें। मां भगवती ने उनकी यह प्रार्थना स्वीकार कर ली। पुत्री के रूप में जन्म लेने के बाद मां भगवती का नाम कात्यायनी पड़ा।