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अंधेरे में रोशनी देने वाला अभियान, बंद पड़ा ऑपरेशन कक्ष, मरीज परेशान
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संभल। नेत्रदान पखवाड़ा संभल जिले में अब तक बेअसर रहा है। इस पखवाड़े के दौरान मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों के ऑपरेशन किए जाने थे और अन्य कई तरह की सुविधाएं मुहैया करानी थी। जिससे आम लोगों को राहत मिल सके। जिला अस्पताल में बना नेत्र ऑपरेशन कक्ष इस समय बदहाल है। यहां ताला लगा है। इससे जाहिर है कि नेत्रदान पखवाड़ा कितना कामयाब हो रहा है।
चिकित्सक का दावा है कि पखवाड़े के दौरान तीन ऑपरेशन किए गए हैं। जब नेत्र ऑपरेशन कक्ष ही बदहाल है तो ऑपरेशन कहां किए गए। दरअसल नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलना है। इस अवधि में मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन होना है। नेत्र चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना है।
निशुल्क चश्मों का वितरण होना है। अगर कोई नेत्रदान करना चाहता है तो उसकी प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। शासन की ओर से तो पखवाड़ा जनहित में चलाया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। जिला अस्पताल का नेत्र ऑपरेशन कक्ष ही बदहाल है तो पखवाड़ा कैसे कामयाब होगा।
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प्रचार-प्रसार की कमी, कैसे मिले लोगों को राहत
संभल। नेत्रदान पखवाड़ा जरूरतमंदों के लिए शासन की अच्छी पहल है। इस पखवाड़ा के दौरान लोग अपनी नेत्र संबंधित समस्याओं का निदान करा सकते हैं। जिसको चश्मे की आवश्यकता है वह चश्मा भी निशुल्क बनवा सकता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन भी किए जाते हैं, लेकिन प्रचार प्रसार नहीं किया गया और जिम्मेदारों ने भी ध्यान नहीं दिया।
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चिकित्सक का दावा है कि पखवाड़े के दौरान तीन ऑपरेशन किए गए हैं। जब नेत्र ऑपरेशन कक्ष ही बदहाल है तो ऑपरेशन कहां किए गए। दरअसल नेत्रदान पखवाड़ा 25 अगस्त से 8 सितंबर तक चलना है। इस अवधि में मोतियाबिंद के मरीजों का ऑपरेशन होना है। नेत्र चिकित्सकीय परीक्षण किया जाना है।
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निशुल्क चश्मों का वितरण होना है। अगर कोई नेत्रदान करना चाहता है तो उसकी प्रक्रिया को पूरा किया जाना है। शासन की ओर से तो पखवाड़ा जनहित में चलाया जा रहा है लेकिन जिम्मेदार लापरवाही बरत रहे हैं। जिला अस्पताल का नेत्र ऑपरेशन कक्ष ही बदहाल है तो पखवाड़ा कैसे कामयाब होगा।
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प्रचार-प्रसार की कमी, कैसे मिले लोगों को राहत
संभल। नेत्रदान पखवाड़ा जरूरतमंदों के लिए शासन की अच्छी पहल है। इस पखवाड़ा के दौरान लोग अपनी नेत्र संबंधित समस्याओं का निदान करा सकते हैं। जिसको चश्मे की आवश्यकता है वह चश्मा भी निशुल्क बनवा सकता है। मोतियाबिंद के ऑपरेशन भी किए जाते हैं, लेकिन प्रचार प्रसार नहीं किया गया और जिम्मेदारों ने भी ध्यान नहीं दिया।