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बंदूक,भाला लेकर तेंदुए को तलाश रहे ग्रामीण

Thu, 27 Sep 2018 01:46 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल
अमर उजाला ब्यूरो/ संभल Updated Thu, 27 Sep 2018 01:46 AM IST
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leoprard seen in village.
लखौरी जलालपुर में तेंदुए की तलाश में वन विभाग के अधिकारी। - फोटो : amar ujala

संभल। वन विभाग ने लखौरी जलालपुर और भारतल सिरसी के बीच खेतों में पग चिह्न देखने के बाद तेंदुए की पुष्टि कर दी है। गांव वालों से सतर्क रहने के लिए कहा गया है। वन कर्मियों ने तेंदुए को पकड़ने के लिए लोहे के जाल वाला पिंजरा बनवाना शुरू करा दिया है। अगले 24 घंटे में पिंजरा उस खेत के पास रखा जाएगा जिस खेत में तेंदुआ छुपे होने का अंदेशा है। 

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  इसके बाद चारों तरफ से घेराबंदी की जाएगी, ताकि तेंदुआ पिंजड़े में आ सके। इस बीच वन विभाग की टीम तेंदुआ की दहशत से प्रभावित हुए क्षेत्र में डेरा डाले है। तेंदुए की तलाश में ग्रामीण बंदूक और भाला लेकर कांबिंग कर रहे हैं। अगर तेंदुआ निकला तो लोग अपने बचाव में उस पर हमला कर सकते हैं। इससे सतर्क हुए वन विभाग ने लोगों से कहा कि वे किसी भी जानवर की हत्या न करें बल्कि सतर्कता दिखाएं।  लखौरी जलालपुर और भारतल सिरसी गांव के बीच गन्ने के खेत में सोमवार को तेंदुआ दिखाई पड़ा था। वन विभाग ने सोमवार को हो ही अपना सर्च आपरेशन शुरू कर दया था लेकिन तेंदुआ हाथ नहीं आया। अलबत्ता ग्रामीणों को वह कई बार दिखा। उसके पंजों के निशान खेतों की गीली जमीन पर देखकर वन विभाग ने मंगलवार को शाम तेंदुआ क्षेत्र में होने की पुष्टि की है। संभल जिले के डीएफओ डीके चतुर्वेदी ने बताया कि तेंदुआ के निकलने का यह सीजन है। यह जानवर कहीं से इस क्षेत्र में आया है। मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा, बरेली और अमरोहा में भी तेंदुआ दिखा है। वन  विभाग के अधिकारी  तेंदुआ की दहशत प्रभावित क्षेत्र में निगरानी कर रहे हैं। एक टीम को भारतल थिसरसी और लखौरी  जलालपुर के बीच उस स्थान पर 24 घंटे रोका गया है जहां पर तेंदुआ सामने आने का अंदेशा है। अभी ऐसा माना जा रहा है कि तेंदुआ गन्ने के खेत में छुपा बैठा है। उसको पकड़ने के लिए आसपास के जनपदों में पिंजरा तलाशा गया था लेकिन कहीं कोई पिंजड़ा नहीं मिल सका क्योंकि पड़ोसी जनपद भी तेंदुआ निकलने से प्रभावित हैं। संभल जिले में वन विभाग अब अपना पिंजड़ा बनवा रहा है जो संभल तथा आसपास के जनपदों में जरूरत के वक्त काम आएगा। उन्होंने बताया कि लोग अपने बचाव में जानवर को न मारें, यह बात गांव जाकर उन्होंने लोगों को समझाई है क्योंकि तेंदुआ एक दो दिन में खुद ही यह क्षेत्र छोड़कर जा सकता है।

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