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गुन्नौर में राजस्व विभाग में बड़े स्तर पर हुआ भ्रष्टाचार : अजीत सिंह
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चंदौसी(संभल)। भाजपा विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने डीएम को पत्र लिखकर गुन्नौर तहसील के राजस्व विभाग में बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। पत्र में कहा कि एक उच्चाधिकारी ने हल्का लेखपाल से मिलकर तत्कालीन एसडीएम के हस्ताक्षर कर असंक्रमणीय भूमि को संक्रमणीय में दर्ज करा दिया था।
शासन के आदेश के बावजूद सरकारी जमीन से कब्जे नहीं हटाए गए है। डीएम को पत्र लिखकर जांच कराने को कहा है। जांच के समय साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है।
गुन्नौर विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने डीएम संभल को लिखे पत्र में बताया कि क्षेत्र के 50 से अधिक किसानों से एक-एक लाख रुपये की रकम ली गई है। एक उच्चाधिकारी ने हल्का लेखपाल से मिलकर तत्कालीन एसडीएम के हस्ताक्षर कर फर्जी तरीके से जमीन अभिलेखों में दर्ज कर दी है। इस फर्जीवाड़े में ढाका, रेता दर्ज सैकड़ों बीघा जमीन को असंक्रमणीय से संक्रमणीय में दर्ज कर दिया है।
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उन्होंने आरोप लगाया है कि तहसील में किसानों की समस्याओं को टाला जाता है। मुकदमों में पैसे न देने पर किसानों को न्याय नहीं मिलता है। सुविधा शुल्क आने के बाद ही काम किया जाता है। गांव में कुछ लोगों ने चकरोड, तालाब, ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे कर रखे हैं। पर कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी ग्राम पंचायतों की जमीन को कब्जा मुक्त नहीं कराया गया। अधिकारी घंटों कार्यालयों में बैठे रहते हैं, पर किसानों से नहीं मिलते हैं। मामले की जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।
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शासन के आदेश के बावजूद सरकारी जमीन से कब्जे नहीं हटाए गए है। डीएम को पत्र लिखकर जांच कराने को कहा है। जांच के समय साक्ष्य उपलब्ध कराने की बात कही है।
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गुन्नौर विधायक अजीत कुमार उर्फ राजू यादव ने डीएम संभल को लिखे पत्र में बताया कि क्षेत्र के 50 से अधिक किसानों से एक-एक लाख रुपये की रकम ली गई है। एक उच्चाधिकारी ने हल्का लेखपाल से मिलकर तत्कालीन एसडीएम के हस्ताक्षर कर फर्जी तरीके से जमीन अभिलेखों में दर्ज कर दी है। इस फर्जीवाड़े में ढाका, रेता दर्ज सैकड़ों बीघा जमीन को असंक्रमणीय से संक्रमणीय में दर्ज कर दिया है।
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उन्होंने आरोप लगाया है कि तहसील में किसानों की समस्याओं को टाला जाता है। मुकदमों में पैसे न देने पर किसानों को न्याय नहीं मिलता है। सुविधा शुल्क आने के बाद ही काम किया जाता है। गांव में कुछ लोगों ने चकरोड, तालाब, ग्राम पंचायत की जमीन पर कब्जे कर रखे हैं। पर कई बार अधिकारियों को अवगत कराने के बाद भी ग्राम पंचायतों की जमीन को कब्जा मुक्त नहीं कराया गया। अधिकारी घंटों कार्यालयों में बैठे रहते हैं, पर किसानों से नहीं मिलते हैं। मामले की जांच कराकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।