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अवैध तरीके से संचालित अल्ट्रा साउंड केंद्रों की चेकिंग, एक केंद्र सील
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संभल। स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की टीम ने अल्ट्रासाउंड केंद्रों की चेकिंग की तो हड़कंप मच गया। कई अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक बंद कर भाग गए। एक अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील कर दिया गया है। टीम ने कई केंद्र देखे लेकिन सभी बंद मिले। जिससे साफ जाहिर हुआ कि चेकिंग की सूचना पहले ही लीक हो गई थी और यही कारण है कि अवैध तरीके से संचालित कई केंद्र बंद हो गए थे। इस बात को चेकिंग करने गए एसीएमओ ने भी माना और आगे से योजना के तहत कार्रवाई करने की बात कही है।
चेकिंग के दौरान एक पैथोलॉजी लैब संचालक ने एक स्वास्थ्य कर्मी को 50 हजार रुपये वार्षिक देने की बात कही। रजिस्ट्रेशन वह दिखा नहीं पाए। चेकिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग की घपलेबाजी के कई मामले सामने आए। बुधवार को एसीएमओ डा. अजय वर्मा व नायब तहसीलदार भरत सिंह ने शहर में संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर चेकिंग की। मोहल्ला जगत के रोडवेज बस अड्डे के सामने संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर न चिकित्सक मिला और न दस्तावेज ही उपलब्ध कराए गए। मानक के विपरीत केंद्र का संचालन किया जा रहा था। इसी के चलते टीम ने अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील कर दिया गया।
चौधरी सराय में अल्ट्रासाउंड केंद्र को संचालक बंद कर भाग गया। शंकर चौराहे पर स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर टीम पहुंची तो संचालक बंद कर निकल गया। पैथोलॉजी लैब खुली मिली। टीम ने पंजीकरण की जानकारी की तो पैथोलॉजी लैब संचालक रजिस्ट्रेशन नहीं दिखा सका। संचालक ने बताया कि वह स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मी को लैब संचालन के एवज में 50 हजार रुपये देेते हैं। इसको टीम ने रिकॉर्ड किया है। इस टीम में चिकित्साधिकारी डा. मनीष अरोड़ा व एआरओ महेश गौतम भी शामिल रहे।
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जिले में कुल 49 वैध अल्ट्रासाउंड केंद्र, अवैध की संख्या दोगुनी
संभल। जिलेभर में कुल 49 वैध अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। जिनका पंजीकरण चिकित्सक के नाम से है। इसके अलावा अवैध तरीके से संचालित होने वालों की संख्या इस संख्या से दोगुनी होने का अनुमान है। जो वैध अल्ट्रासाउंड हैं उनमें भी काफी ऐसे हैं जिन्होंने चिकित्सक के नाम से पंजीकरण तो कराया है पर चिकित्सक कभी नहीं मिलते। यह भी जांच का विषय है। एसीएमओ डा. अजय वर्मा ने कहा कि मानक के विपरीत संचालन हो रहा है। चेकिंग की सूचना पहले से ही लीक हो गई थी। इसलिए अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक बंद कर भाग गए। बताया कि कई अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं हुआ है। जबकि इनकी अवधि भी कई महीने पहले निकल चुकी है। जल्द ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों की चेकिंग रूटीन थी। इस दौरान काफी खामियां मिली हैं। ऐसी भी जानकारी मिली है जिन अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया था उसको संचालक ने खुद खोल लिया। जबकि सील केंद्र पर कोर्ट का निर्णय होना होता है। चेकिंग लगातार की जाएगी। बुधवार को चेकिंग के दौरान सूचना लीक होने का अनुमान है। आगे से चेकिंग योजना के साथ की जाएगी।
डा. अजय वर्मा, एसीएमओ, संभल
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चेकिंग के दौरान एक पैथोलॉजी लैब संचालक ने एक स्वास्थ्य कर्मी को 50 हजार रुपये वार्षिक देने की बात कही। रजिस्ट्रेशन वह दिखा नहीं पाए। चेकिंग के दौरान स्वास्थ्य विभाग की घपलेबाजी के कई मामले सामने आए। बुधवार को एसीएमओ डा. अजय वर्मा व नायब तहसीलदार भरत सिंह ने शहर में संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर चेकिंग की। मोहल्ला जगत के रोडवेज बस अड्डे के सामने संचालित हो रहे अल्ट्रासाउंड केंद्र पर न चिकित्सक मिला और न दस्तावेज ही उपलब्ध कराए गए। मानक के विपरीत केंद्र का संचालन किया जा रहा था। इसी के चलते टीम ने अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील कर दिया गया।
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चौधरी सराय में अल्ट्रासाउंड केंद्र को संचालक बंद कर भाग गया। शंकर चौराहे पर स्थित एक अल्ट्रासाउंड केंद्र पर टीम पहुंची तो संचालक बंद कर निकल गया। पैथोलॉजी लैब खुली मिली। टीम ने पंजीकरण की जानकारी की तो पैथोलॉजी लैब संचालक रजिस्ट्रेशन नहीं दिखा सका। संचालक ने बताया कि वह स्वास्थ्य विभाग के एक कर्मी को लैब संचालन के एवज में 50 हजार रुपये देेते हैं। इसको टीम ने रिकॉर्ड किया है। इस टीम में चिकित्साधिकारी डा. मनीष अरोड़ा व एआरओ महेश गौतम भी शामिल रहे।
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जिले में कुल 49 वैध अल्ट्रासाउंड केंद्र, अवैध की संख्या दोगुनी
संभल। जिलेभर में कुल 49 वैध अल्ट्रासाउंड केंद्र हैं। जिनका पंजीकरण चिकित्सक के नाम से है। इसके अलावा अवैध तरीके से संचालित होने वालों की संख्या इस संख्या से दोगुनी होने का अनुमान है। जो वैध अल्ट्रासाउंड हैं उनमें भी काफी ऐसे हैं जिन्होंने चिकित्सक के नाम से पंजीकरण तो कराया है पर चिकित्सक कभी नहीं मिलते। यह भी जांच का विषय है। एसीएमओ डा. अजय वर्मा ने कहा कि मानक के विपरीत संचालन हो रहा है। चेकिंग की सूचना पहले से ही लीक हो गई थी। इसलिए अल्ट्रासाउंड केंद्र संचालक बंद कर भाग गए। बताया कि कई अल्ट्रासाउंड केंद्र के पंजीकरण का नवीनीकरण नहीं हुआ है। जबकि इनकी अवधि भी कई महीने पहले निकल चुकी है। जल्द ऐसे अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
अल्ट्रासाउंड केंद्रों की चेकिंग रूटीन थी। इस दौरान काफी खामियां मिली हैं। ऐसी भी जानकारी मिली है जिन अल्ट्रासाउंड केंद्र को सील किया गया था उसको संचालक ने खुद खोल लिया। जबकि सील केंद्र पर कोर्ट का निर्णय होना होता है। चेकिंग लगातार की जाएगी। बुधवार को चेकिंग के दौरान सूचना लीक होने का अनुमान है। आगे से चेकिंग योजना के साथ की जाएगी।
डा. अजय वर्मा, एसीएमओ, संभल