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Sambhal News: 1986 में नेजा मेले के दौरान उड़ी अफवाह के बाद भगवत शरण की हुई थी निर्मम हत्या
Thu, 20 Mar 2025 01:24 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Thu, 20 Mar 2025 01:24 AM IST
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संभल। नेजा मेले की अनुमति नहीं दिए जाने पर बहस छिड़ गई है। कोई इस अनुमति नहीं दिए जाने का समर्थन कर रहा है तो कोई विरोध जता रहा है। अब इस बहस के बीच वह जख्म भी ताजा हो रहे हैं जो नेजा मेले से जुड़े हैं। नगर के मोहल्ला कोटपूर्वी निवासी राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने मेले की अनुमति नहीं दिए जाने की कार्रवाई को सही ठहराया है। साथ ही बताया है कि जब नेजा मेला आता है तो उन्हें अपने पिता भगवत शरण रस्तोगी की याद आती है। 8 अप्रैल 1986 को नेजा मेले के दौरान ही उनके पिता की निर्मम हत्या कर दी गई थी।
बुधवार को राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने बताया कि 9 अप्रैल 1986 को उनके पिता बाजार से चीनी खरीदने के लिए गए थे। वह राजनीतिक व्यक्ति थे और लोगों से खासी पहचान थी। इसी दौरान नेजा मेले में किसी ने अफवाह फैलाई थी कि दो मुसलमानाें को हिंदुओं ने मार दिया है। इस अफवाह के फैलने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। बताया कि जिस दुकान से चीनी खरीदने के लिए गए थे उसी दुकानदार ने अंदर बुलाकर शटर बंद कर दिया था और अन्य लोगों के साथ मिलकर निर्मम हत्या कर दी थी। बताया कि आंख फोड़ दी थी और कान काट लिए थे। माथे पर 54 जख्म मिले थे। शव शहर से दो किलोमीटर दूर पड़ा मिला था। अंडरवियर और शरीर पर निकले एक मस्से से की थी। बताया कि उस समय सात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कई वर्ष तक पैरवी की लेकिन न्याय नहीं मिला। मुरादाबाद की अदालत से आरोपी बरी कर दिए गए। राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने बताया कि जब भी नेजा मेला आता है तो पिता की हत्या से मिले जख्म फिर से ताजा हो जाते हैं।
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बुधवार को राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने बताया कि 9 अप्रैल 1986 को उनके पिता बाजार से चीनी खरीदने के लिए गए थे। वह राजनीतिक व्यक्ति थे और लोगों से खासी पहचान थी। इसी दौरान नेजा मेले में किसी ने अफवाह फैलाई थी कि दो मुसलमानाें को हिंदुओं ने मार दिया है। इस अफवाह के फैलने के बाद अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। बताया कि जिस दुकान से चीनी खरीदने के लिए गए थे उसी दुकानदार ने अंदर बुलाकर शटर बंद कर दिया था और अन्य लोगों के साथ मिलकर निर्मम हत्या कर दी थी। बताया कि आंख फोड़ दी थी और कान काट लिए थे। माथे पर 54 जख्म मिले थे। शव शहर से दो किलोमीटर दूर पड़ा मिला था। अंडरवियर और शरीर पर निकले एक मस्से से की थी। बताया कि उस समय सात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कई वर्ष तक पैरवी की लेकिन न्याय नहीं मिला। मुरादाबाद की अदालत से आरोपी बरी कर दिए गए। राष्ट्रबंधु रस्तोगी ने बताया कि जब भी नेजा मेला आता है तो पिता की हत्या से मिले जख्म फिर से ताजा हो जाते हैं।
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