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हाईवे : टोल वसूल रहे भरपूर, पर सुविधाओं से दूर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 01:23 AM IST
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Highway: Toll collection is high, but facilities are far away
बहजोई। जिले में 65 किलोमीटर मुरादाबाद-आगरा हाईवे गुजरता है। जिस पर मुरादाबाद की ओर से घुसते ही और दूसरे छोर पर नरौरा के पास टोल बूथ हैं। जिन राहगीरों से तगड़ा टोल वसूला जाता है। जबकि एनएचएआई की ओर से मिलने वाली सुविधाएं नदारद हैं। हादसा होने पर घायलों अस्पताल ले जाने के लिए एनएचएआई की एंबुलेंस तक नहीं मिल पाती और तो और दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए क्रेन की सुविधा भी नहीं है। जबकि यह सुविधाएं एनएचएआई की ओर से निशुल्क उपलब्ध कराए जाने का नियम है।
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घायलों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाने के लिए 108 नंबर एंबुलेंस व क्षतिग्रस्त वाहन को सड़क से हटाकर यातायात सुचारु करने के लिए निजी क्रेन का इंतजार करना पड़ता है।
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मुरादाबाद-आगरा राष्ट्रीय राजमार्ग 509 जिले में थाना बनियाठेर की सीमा से लेकर अलीगढ़ की ओर से थाना गुन्नौर क्षेत्र में नरौरा के बैराज के सिरे तक है। खास बात यह है कि थाना बनियाठेर की सीमा से लेकर नरौरा बैराज के सिरे तक करीब 65 किलोमीटर लंबाई वाली नेशनल हाईवे की इस सड़क पर आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं, लेकिन इन सड़क हादसों में घायल होने वाले वाहन सवार लोगों को एनएचएआई (नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया) की ओर से एंबुलेंस व क्रेन की मदद नहीं मिल पाती। यह हाल तब है जबकि वाहन में सवार होकर सफर पर निकले इन लोगों को जिले से बाहर अलीगढ़, बुलंदशहर व मुरादाबाद आदि जिलों में जाने पर टोल देना पड़ता है, जब इन वाहन सवारों को सड़क हादसे में घायल होने के बाद एनएचएआई की ओर से एंबुलेंस व क्रेन की सहायता भी नसीब नहीं हो पाती। ऐसे में घायलों को बस 108 नंबर एंबुलेंस व पुलिस व प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराई जाने वाली निजी क्रेन आदि की मदद का ही इंतजार होता है।
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हादसे के बाद 108 या निजी एंबुलेंस का ही सहारा

नेशनल हाईवे पर अक्सर हादसे के बाद एंबुलेंस का लंबा इंतजार करना पड़ता है। हाईवे पर चंदौसी, बहजोई और गुन्नौर में सीएचसी हैं। इन्हीं सीएचसी के क्षेत्र में 108 एंबुलेंस रहती है। या राहगीरों द्वारा निजी एंबुलेंस को कॉल की जाती है। अक्सर सरकारी और निजी एंबुलेंस पहुंचने में तो देरी होती है लेकिन यूपी 112 पुलिस ही घायलों को अस्पताल पहुंचाती है। ऐसे में घायल की जान को खतरा रहता है। यही स्थिति क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाने के लिए रहती है।

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एनएचएआई के हेल्प लाइन नंबर 1033 का नहीं है प्रचार-प्रसार
बहजोई। जहां एक ओर मुरादाबाद-आगरा नेशनल हाईवे पर एनएचएआई की ओर से एंबुलेंस, क्रेन व पेट्रोलिंग कार की सुविधा तो वाहन सवारों को मिल ही नहीं पा रही। वहीं, एनएचएआई के हेल्प लाइन नंबर 1033 का भी अधिक प्रचार-प्रसार न होने से लोगों को एनएचएआई से मिलने वाली एंबुलेंस व क्रेन आदि की सुविधा भी नसीब नहीं हो पा रही है। अब खास बात यह है कि जिले में एनएचएआई की ओर से नेशनल हाईवे पर जगह-जगह हेल्प लाइन नंबर के साइन बोर्ड भी नहीं लगाए गए हैं।

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बीते दिनों कलक्ट्रेट सभागार में हुई सड़क सुरक्षा की बैठक में यह मुद्दा रखा गया है। इसके अलावा गुन्नौर तक सर्वे कराकर एनएचएआई के प्रतिनिधियों को स्पीड लिमिट समेत अन्य साइन बोर्ड के बाबत भी जानकारी ली गई है। अब इस बिंदु पर काम करते हुए नेशनल हाइवे पर यातायात को सुरक्षित बनाने की पूरी कोशिश रहेगी।
डॉ. प्रदीप कुमार, सीओ, यातायात, जिला संभल
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