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भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों को चीन, इंडोनेशिया की चुनौती
ब्यूरो अमर उजाला / संभ्ाल
Updated Mon, 26 Feb 2018 01:23 AM IST
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हैंडीक्राफ्ट के उत्पाद देखते बायर्स।
- फोटो : अमर उजाला
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ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में भारतीय हस्तशिल्प एवं उपहार मेले का तीसरा दिन विदेशी बायर्स की उपस्थिति के लिहाज से उत्साहजनक रहा। यूरोप, अमेरिका के साथ यूएई के देशों से आए खरीदारों ने भारतीय हस्तशिल्प उत्पादों की सराहना की लेकिन अबकी बार उन्हें चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया के मुकाबले में भारतीय हस्तशिल्प उत्पाद महंगे लगे। विदेशीय बायर्स के साथ हुए संवाद के आधार पर निर्यातकों ने बताया कि चीन, वियतनाम, इंडोनेशिया की सरकारें वहां के हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन दे रहे हैं। भारत में कर की मार है।
इसका असर उद्योग पर है और उत्पादों के दाम पिछले वर्ष के मुकाबले में 10-15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसकी तुलना में प्रतिद्वंदी चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया के उत्पाद सस्ते हैं। ऐसा प्रतीत होता विदेशी बायर्स की दिलचस्पी उन देशों के हस्तशिल्प उत्पादों में हो रही है। वहीं विदेशी मार्केट में फिलहाल परचेजिंग क्षमता कुछ घटी हुई है। इसलिए अबकी बार मेले के पहले तीन दिनों में आर्डर न के बराबर ही मिले हैं। मेला सोमवार को भी रहेगा। कभी कभी ऐसा भी होता है कि मेले में आर्डर से ज्यादा प्रोडक्ट को लेकर पूछताछ होती है और बाद में प्रोडक्ट पसंद आने पर आर्डर आते रहते हैं। इसलिए निर्यातक अभी नाउम्मीद नहीं हैं। उनका कहना है कि कहीं मांग बढ़ती है तो कहीं घटती हैं. अंत में एक संतुलन पैदा हो जाता है और थोड़े थोड़े आर्डर मिल ही जाते हैं लेकिन अगर सरकार का प्रोत्साहन हस्तशिल्प उद्योग को मिले तो तस्वीर बदल सकती है। ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में मौजूद निर्यातकों ने बताया कि सरकार से ईपीसीएच ने हस्तशिल्प उत्पादों को कर मुक्त करने की मांग की थी जिस पर जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में 29 वस्तुओं को कर मुक्त करने का एलान किया गया है लेकिन अभी तक इसका कोई नोटिफिकेशन नहीं हुआ।
अभी तय यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा उत्पाद कर मुक्त है और कौन से उत्पाद कर लगेगा। कर के बारे में स्थिति स्पष्ट न होने और जीएसटी के रिफंड अभी तक फंसे होने की वजह से निर्यातकों ने आमतौर पर अपने उत्पादों की कीमत 10-15 प्रतिशत तक बढ़ाई है। जब बढ़े हुए दाम की जानकारी विदेशी बायर्स को मिलती है तो वे सबसे पहले वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ चीन में बनने वाले सेम प्रोडक्ट से उनकी तुलना करते हैं। दोनों के भाव में चीन को कुछ सस्ता मानते हैं।निर्यातकों ने यह भी कहा कि अगर सरकारी रियायतों का लाभ ईपीसीएच के इस मेले से पहले इंडस्ट्री को मिल गया होता तो यहां पर प्रोडक्ट सस्ते होते और चीन, वियतनाम तथा इंडोनेशिया जैसे देशों के उत्पादों की चुनौती से निबटा जा सकता था।
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इसका असर उद्योग पर है और उत्पादों के दाम पिछले वर्ष के मुकाबले में 10-15 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसकी तुलना में प्रतिद्वंदी चीन, वियतनाम और इंडोनेशिया के उत्पाद सस्ते हैं। ऐसा प्रतीत होता विदेशी बायर्स की दिलचस्पी उन देशों के हस्तशिल्प उत्पादों में हो रही है। वहीं विदेशी मार्केट में फिलहाल परचेजिंग क्षमता कुछ घटी हुई है। इसलिए अबकी बार मेले के पहले तीन दिनों में आर्डर न के बराबर ही मिले हैं। मेला सोमवार को भी रहेगा। कभी कभी ऐसा भी होता है कि मेले में आर्डर से ज्यादा प्रोडक्ट को लेकर पूछताछ होती है और बाद में प्रोडक्ट पसंद आने पर आर्डर आते रहते हैं। इसलिए निर्यातक अभी नाउम्मीद नहीं हैं। उनका कहना है कि कहीं मांग बढ़ती है तो कहीं घटती हैं. अंत में एक संतुलन पैदा हो जाता है और थोड़े थोड़े आर्डर मिल ही जाते हैं लेकिन अगर सरकार का प्रोत्साहन हस्तशिल्प उद्योग को मिले तो तस्वीर बदल सकती है। ग्रेटर नोएडा के एक्सपो मार्ट में मौजूद निर्यातकों ने बताया कि सरकार से ईपीसीएच ने हस्तशिल्प उत्पादों को कर मुक्त करने की मांग की थी जिस पर जीएसटी काउंसिल की बैठक हुई। बैठक में 29 वस्तुओं को कर मुक्त करने का एलान किया गया है लेकिन अभी तक इसका कोई नोटिफिकेशन नहीं हुआ।
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अभी तय यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सा उत्पाद कर मुक्त है और कौन से उत्पाद कर लगेगा। कर के बारे में स्थिति स्पष्ट न होने और जीएसटी के रिफंड अभी तक फंसे होने की वजह से निर्यातकों ने आमतौर पर अपने उत्पादों की कीमत 10-15 प्रतिशत तक बढ़ाई है। जब बढ़े हुए दाम की जानकारी विदेशी बायर्स को मिलती है तो वे सबसे पहले वियतनाम और इंडोनेशिया के साथ चीन में बनने वाले सेम प्रोडक्ट से उनकी तुलना करते हैं। दोनों के भाव में चीन को कुछ सस्ता मानते हैं।निर्यातकों ने यह भी कहा कि अगर सरकारी रियायतों का लाभ ईपीसीएच के इस मेले से पहले इंडस्ट्री को मिल गया होता तो यहां पर प्रोडक्ट सस्ते होते और चीन, वियतनाम तथा इंडोनेशिया जैसे देशों के उत्पादों की चुनौती से निबटा जा सकता था।
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