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Sambhal News: 62 साल से साम्प्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम किए गणेश मेला
Sun, 17 Sep 2023 02:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sun, 17 Sep 2023 02:01 AM IST
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चंदौसी। गणेश चतुर्थी मेला पिछले 62 साल से साम्प्रदायिक सौहार्द और सर्वधर्म समभाव की मिसाल काम किए हुए हैं। मेला संस्थापक द्वारा सर्वधर्म समभाव को बढ़ावा देने के लिए मेले का उद्घाटन चारों धर्मों के गुरुओं से कराया था, तभी से यह मिसाल कायम हैं।
मेला इंचार्ज रविंद्र कुमार रूपी ने बताया कि इस बार यह 63वां गणेश चतुर्थी मेले का आयोजन हो रहा है। डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता ने इसकी शुरूआत की थी। मेले में सभी धर्मों की सहभागिता थी, इस कारण डॉ. गिरिराज किशोर ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई धर्म के गुरुओं को बुलवाकर उनके हाथ फीता कटवाकर उद्घाटन किया था। तभी से यह परंपरा चली है। यह सर्वधर्म समभाव के प्रतीक है। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। मेला संस्थापक के समय तक मेला द्वार पर चारों धर्मों के प्रतीक के रूप में 2019 तक स्टेचू बनाई बनाई जाती थी। अब मेले का उद्घाटन हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के साथ बौद्ध के गुरु करेंगे। पांचों धर्मों के गुरु पिछले कई साल से उद्घाटन करते रहे हैं।
गणेश चतुर्थी की रथयात्रा में राष्ट्रीय झांकी पर राफेल, महाप्रभु गणेश की झांकी में चंद्रयान-3 तीन की झलक रहेगी। राष्ट्रीय झांकी में राफेल लडाकू विमान, मिसाइल, सेना के जवान और भारत माता दिखाई देगी। वही महाप्रभु गणेश की झांकी बनाई जा रही है। इसको कौडी से बनाया जा रहा है। इसमें भगवान गणेश के हाथ में चंद्रयान-तीन की झलक भी दिखाई देगी। इसके अलावा गणेश जी की प्रतिमा को माचिस की तीलियाें से सजाया गया है।
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अघोरी भगवान शिव, शंकर पार्वती झांकी, वराह भगवान, हंस पर गणेश जी, गणेश चूहा, खाटू श्याम झांकी, मां दुर्गा, बाहुबली हनुमान, हवा में तैरते हनुमान जी, राष्ट्रीय झांकी, मक्खन मत्थे हुए गणेश जी, माता महाकाली, महादेव भगवान का विराट रूप, महावीर सिंह हनुमान, महाकाल की पालकी, महा प्रभु गणेश जी आदि की झांकी रहेगी। रथयात्रा में गाजियाबाद, हापुड, मोदीनगर, मेरठ, चंदौसी, बिलारी, मुरादाबाद, बुलंदशहर के बैंडबाजे शामिल रहे। इसके अलावा ऊंट, घोड़े, हाथी भी शामिल रहेंगे।
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मेला इंचार्ज रविंद्र कुमार रूपी ने बताया कि इस बार यह 63वां गणेश चतुर्थी मेले का आयोजन हो रहा है। डॉ. गिरिराज किशोर गुप्ता ने इसकी शुरूआत की थी। मेले में सभी धर्मों की सहभागिता थी, इस कारण डॉ. गिरिराज किशोर ने हिंदू, मुस्लिम, सिख, इसाई धर्म के गुरुओं को बुलवाकर उनके हाथ फीता कटवाकर उद्घाटन किया था। तभी से यह परंपरा चली है। यह सर्वधर्म समभाव के प्रतीक है। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। मेला संस्थापक के समय तक मेला द्वार पर चारों धर्मों के प्रतीक के रूप में 2019 तक स्टेचू बनाई बनाई जाती थी। अब मेले का उद्घाटन हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई के साथ बौद्ध के गुरु करेंगे। पांचों धर्मों के गुरु पिछले कई साल से उद्घाटन करते रहे हैं।
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गणेश चतुर्थी की रथयात्रा में राष्ट्रीय झांकी पर राफेल, महाप्रभु गणेश की झांकी में चंद्रयान-3 तीन की झलक रहेगी। राष्ट्रीय झांकी में राफेल लडाकू विमान, मिसाइल, सेना के जवान और भारत माता दिखाई देगी। वही महाप्रभु गणेश की झांकी बनाई जा रही है। इसको कौडी से बनाया जा रहा है। इसमें भगवान गणेश के हाथ में चंद्रयान-तीन की झलक भी दिखाई देगी। इसके अलावा गणेश जी की प्रतिमा को माचिस की तीलियाें से सजाया गया है।
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अघोरी भगवान शिव, शंकर पार्वती झांकी, वराह भगवान, हंस पर गणेश जी, गणेश चूहा, खाटू श्याम झांकी, मां दुर्गा, बाहुबली हनुमान, हवा में तैरते हनुमान जी, राष्ट्रीय झांकी, मक्खन मत्थे हुए गणेश जी, माता महाकाली, महादेव भगवान का विराट रूप, महावीर सिंह हनुमान, महाकाल की पालकी, महा प्रभु गणेश जी आदि की झांकी रहेगी। रथयात्रा में गाजियाबाद, हापुड, मोदीनगर, मेरठ, चंदौसी, बिलारी, मुरादाबाद, बुलंदशहर के बैंडबाजे शामिल रहे। इसके अलावा ऊंट, घोड़े, हाथी भी शामिल रहेंगे।