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गन्ने का मूल्य तो बढ़ा नहीं फिर किसानों की आमदनी दोगुनी कैसे होगी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2019 01:21 AM IST
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farmer speaks on sugarcane frp
संभल। केंद्र सरकार की कैबिनेट ने गन्ने के मूल्य पर फैसला करते हुए कोई वृद्धि न करने का निर्णय लिया है। कैबिनेट की बैठक के बाद गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य 275 रुपये प्रति क्विंटल करने की घोषणा की गई है। किसान संगठनों और उनके नेताओं की नजर में यह फैसला किसानों के की कमर तोड़ने वाला है। उनका कहना है कि किसानों की उत्पादन लागत में इस वर्ष डीजल, खाद, बीज, बिजली, खरपतवार नष्ट करने की दवाई आदि में 15 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई है। ऐसे में गन्ने का दाम न बढ़ाना साबित करता है कि किसानों की आमदनी दोगुनी करने का सिर्फ नारा ही है। सरकार बताए कि इन हालातों में आमदनी दोगुनी कैसे होगी। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के राष्ट्रीय संयोजक और किसान नेता बीएम सिंह ने मोदी सरकार ने गांव, गरीब और किसान के साथ छल किया गया है। अभी तो इसकी शुरूआत है। आगे और क्या क्या होगा? देखते जाइए। उन्होंने कहा कि जब किसानों ने लोकसभा चुनाव में अपना हित नहीं देखा है और सिर्फ नारों में खो गए तो यह हाल होना ही था।
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किसानों को 450 रुपये प्रति क्विंटल की कीमत मिले
भाकियू असली के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि लागत का डेढ़ गुन्ना मूल्य होना चाहिए। कृषि वैज्ञानिक भी मानते हैं कि गन्ने की लागत 300 रुपये प्रति क्विंटल आ रही है। ऐसे में किसानों को गन्ने की कीमत 450 रुपये प्रति क्विंटल मिलनी चाहिए लेकिन सरकार इस दिशा में कोई कदम नहीं उठा रही है।
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यूपी के किसानों को नहीं होगा कोई नुकसान
अखिल भारतीय किसान मजदूर संगठन अध्यक्ष बीएम सिंह ने कहा कि उनकी 5 अप्रैल 2004 को गई याचिका पर हुए सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले की वजह से केंद्र सरकार का एफआरसी यूपी में लागू नहीं होगा क्योंकि यूपी न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करता है लेकिन महाराष्ट्र समेत जिन राज्यों में एफआरसी लागू है वहां किसानों को नुकसान उठाना पड़ेगा।
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किसान विरोधी है केंद्र सरकार का फैसला
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष शंकर सिंह यादव ने कहा कि सरकार द्वारा घोषित मूल्य विरोधी सोच को दर्शाता है। सरकार ने पहले भी रिकवरी के आधार पर तय होने वाले फार्मूले को बदलकर किसानों को 60 रुपये प्रति क्विंटल का नुकसान किया है। उनका सवाल है प्रधानमंत्री बताएं 2022 तक आमदनी दोगुनी कैसे होगी?

बिजली महंगी हुई तो गन्ना क्यों नहीं
भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश उपाध्यक्ष आनंद कुमार चाहल ने कहा कि डीजल की कीमत बढ़ी है। बिजली महंगी हो गई पर अभी गन्ने का दाम बढ़ाने के नाम पर सरकार कंजूसी कर गई। इससे किसान का नुकसान हुआ है। मेरा सवाल है कि जब बिजली महंगी हुई। डीजल महंगा है तो गन्ना महंगा क्यों नहीं हुआ।
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