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गन्ने की 0238 प्रजाति में बढ़ा रोग, विभाग दूसरी प्रजाति बदलने के प्रयास में
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जिले में अच्छी पैदावार दे रही गन्ने की प्रजाति सीओ-0238 में अब रोग की चपेट में आ गई है। गन्ना विभाग अब इस प्रजाति को बदलने की तैयारी कर रहा है। इस रोग के कारण जिले में करीब 20 फीसदी उत्पादन घटने की आशंका है। गन्ना विभाग कृषि विज्ञान केंद्र के प्रस्ताव पर अन्य प्रजातियों की बुआई कराने की किसानों से अपील कर रहा है। विभाग का प्रयास है कि इस बार जिले में सीओ-0238 के बजाय किसान दूसरी फसलों की बुआई करें।
संभल जिले में करीब 54 हजार हेक्टेअर में गन्ने की फसल की बुआई होती है। पिछले करीब पांच साल पहले जिले में गन्ने की सीओ-0238 आई थी। इस प्रजाति ने मिले में अच्छा उत्पादन दिया और किसानों को लाभ भी मिला। किसानों ने अगेती प्रजाति के रूप में इसे खूब पसंद किया। चीनी मिलों के लिए भी यह प्रजाति फायदेमंद रही। अब इस प्रजाति में रोगों की भरमार हो गई है। पिछले एक साल से रोगों के कारण फसल ज्यादा प्रभावित हो रही है। कीटनाशक, दवाइयों के इस्तेमाल के बाद भी रोग पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा है। कृषि अधिकारियों के सर्वे में 20 फीसदी से अधिक फसल प्रभावित बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को रिजेक्ट कर दिया है तथा दूसरी नई प्रजातियों की बुआई कराने का सुझाव दिया जा रहा है।
सीओ-0238 प्रजाति में लगे हैं यह रोग
गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति में इस वर्ष पोक्का बोइंग रोग, लाल सड़न रोग, टॉपर बोरर रोग लगा है। तीनों ही रोग गन्ने के लिए हानिकारक हैं। दवाओं के इस्तेमाल से भी बीमारी दूर नहीं हो रही है।
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नई प्रजाति की बुआई के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक
गन्ना विभाग के अधिकारी व कृषि विभाग मिलकर किसानों को अब बजाय शाहजहांपुर की सीओएस-13235, सीओ-0238 के बजाय, सीओएलके-14201 तथा सीओएलके-15023 गन्ने की बुआई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनका उत्पादन करीब 900 क्विंटल प्रति हेक्टेअर बताया जा रहा है।
जिले में किसानों को सीओ-0236 प्रजाति में अब रोग अधिक लगने लगा है। इस प्रजाति के स्थान पर किसानों को दूसरी प्रजाति के गन्ने का बीज मुहैया कराया गया है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि उन्हें नुकसान न हो।
राजेश्वर कुमार यादव, जिला गन्ना अधिकारी, संभल
गन्ने की प्रजाति सीओ-0238 में तीन से अधिक गंभीर रोग देखे जा रहे हैं। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इस कारण अब सीओ-0238 को रिजेक्ट प्रजाति में रखा जा सकता है। गन्ना विभाग को भी अन्य प्रजातियों की बुआई का सुझाव दिया गया है।
डॉ. अरविंद कुमार, कृषि विज्ञान जिला कृषि केंद्र पथरा, संभल
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संभल जिले में करीब 54 हजार हेक्टेअर में गन्ने की फसल की बुआई होती है। पिछले करीब पांच साल पहले जिले में गन्ने की सीओ-0238 आई थी। इस प्रजाति ने मिले में अच्छा उत्पादन दिया और किसानों को लाभ भी मिला। किसानों ने अगेती प्रजाति के रूप में इसे खूब पसंद किया। चीनी मिलों के लिए भी यह प्रजाति फायदेमंद रही। अब इस प्रजाति में रोगों की भरमार हो गई है। पिछले एक साल से रोगों के कारण फसल ज्यादा प्रभावित हो रही है। कीटनाशक, दवाइयों के इस्तेमाल के बाद भी रोग पर नियंत्रण करना मुश्किल हो रहा है। कृषि अधिकारियों के सर्वे में 20 फीसदी से अधिक फसल प्रभावित बताई जा रही है। कृषि वैज्ञानिकों ने इस प्रजाति को रिजेक्ट कर दिया है तथा दूसरी नई प्रजातियों की बुआई कराने का सुझाव दिया जा रहा है।
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सीओ-0238 प्रजाति में लगे हैं यह रोग
गन्ने की सीओ-0238 प्रजाति में इस वर्ष पोक्का बोइंग रोग, लाल सड़न रोग, टॉपर बोरर रोग लगा है। तीनों ही रोग गन्ने के लिए हानिकारक हैं। दवाओं के इस्तेमाल से भी बीमारी दूर नहीं हो रही है।
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नई प्रजाति की बुआई के लिए किसानों को किया जा रहा जागरूक
गन्ना विभाग के अधिकारी व कृषि विभाग मिलकर किसानों को अब बजाय शाहजहांपुर की सीओएस-13235, सीओ-0238 के बजाय, सीओएलके-14201 तथा सीओएलके-15023 गन्ने की बुआई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इनका उत्पादन करीब 900 क्विंटल प्रति हेक्टेअर बताया जा रहा है।
जिले में किसानों को सीओ-0236 प्रजाति में अब रोग अधिक लगने लगा है। इस प्रजाति के स्थान पर किसानों को दूसरी प्रजाति के गन्ने का बीज मुहैया कराया गया है। किसानों को जागरूक किया जा रहा है, ताकि उन्हें नुकसान न हो।
राजेश्वर कुमार यादव, जिला गन्ना अधिकारी, संभल
गन्ने की प्रजाति सीओ-0238 में तीन से अधिक गंभीर रोग देखे जा रहे हैं। इसका असर उत्पादन पर भी पड़ रहा है। इस कारण अब सीओ-0238 को रिजेक्ट प्रजाति में रखा जा सकता है। गन्ना विभाग को भी अन्य प्रजातियों की बुआई का सुझाव दिया गया है।
डॉ. अरविंद कुमार, कृषि विज्ञान जिला कृषि केंद्र पथरा, संभल