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चंदौसी हत्याकांड के आरोपी बंदी के भाई की मौत
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बहजोई। पिता की मौत के बाद पुलिस हिरासत से रिहा हुए धर्मेश के चेहरे पर पुलिस टार्चर के निशान चस्पा हैं। थाने से छूटकर गांव पहुंचे धर्मेश का कहना है कि पुलिस ने थाने में उसके साथ मारपीट की। पुलिस को शक था कि वह अपने फरार चाचा धर्मपाल को जंगल में खाना पहुंचाता है। धर्मेश ने इंकार किया लेकिन पुलिस ने उसकी बात नहीं सुनी।
सिपाहियों की हत्या कर फरार हुआ धर्मपाल तो जंगल में जहां - तहां छुपता घूम रहा है लेकिन उसकी करनी की सजा उसके बड़े भाई उदयवीर को झेलनी पड़ रही है। पुलिस के खौफ से चार - पांच दिन से घर छोड़कर इधर उधर भटक रहे उदयवीर का शव पेड़ पर लटका मिला है। उदयवीर चार - पांच दिन कहां था, इस दौरान उसके साथ क्या हुआ, यह परिवार को नहीं पता।
ऐसे में पुलिस पर सवाल उठने लाजिमी हैं। पिता की मौत के बाद गांव पहुंचे धर्मेश ने बताया कि पुलिस की दबिश के कारण वह थाना रजपुरा के गांव गंवा के निकट मारजपुर में अपनी मौसी के घर चला गया था। 21 जुलाई को पुलिस ने उसे मौसी के घर से उठा लिया और थाना धनारी में रखा। मंगलवार को पिता की मौत के बाद पुलिस ने उसे बहजोई में क्राइम ब्रांच के दफ्तर पर लाकर छोड़ दिया।
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वहां से गांव लौटा। उसने धनारी में पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस की पिटाई से उसकी आंख के पास चोट भी आई। ग्रामीणों का कहना था कि उदयवीर की मौत के बाद अब उसके बेटे धर्मेश, बेटी गुड़िया व पिंकी की पढ़ाई और परवरिश पर संकट रहेगा। उदयवीर बहजोई की अनाज मंडी में पल्लेदारी करता था। उसके बेटे धर्मेश (17) ने इसी साल बहजोई के इंटर कालेज से इंटर की परीक्षा पास कर बीएससी में दाखिला लिया था।
करीब 12 वर्षीय बेटी पिंकी व 13 वर्षीय बेटी गुड़िया बहजोई के हीरादेवी तोताराम कन्या इंटर कालेज में कक्षा सात की छात्रा हैं। कमजोर आर्थिक हालात में भी पल्लेदारी करके उदयवीर अपने बच्चों को पढ़ाकर अच्छा नागरिक बनाना चाहता था। गांव वालों का कहना है कि धर्मपाल अपराधी था लेकिन उदयवीर का कभी किसी अपराध से वास्ता नहीं रहा था।
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सिपाहियों की हत्या कर फरार हुआ धर्मपाल तो जंगल में जहां - तहां छुपता घूम रहा है लेकिन उसकी करनी की सजा उसके बड़े भाई उदयवीर को झेलनी पड़ रही है। पुलिस के खौफ से चार - पांच दिन से घर छोड़कर इधर उधर भटक रहे उदयवीर का शव पेड़ पर लटका मिला है। उदयवीर चार - पांच दिन कहां था, इस दौरान उसके साथ क्या हुआ, यह परिवार को नहीं पता।
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ऐसे में पुलिस पर सवाल उठने लाजिमी हैं। पिता की मौत के बाद गांव पहुंचे धर्मेश ने बताया कि पुलिस की दबिश के कारण वह थाना रजपुरा के गांव गंवा के निकट मारजपुर में अपनी मौसी के घर चला गया था। 21 जुलाई को पुलिस ने उसे मौसी के घर से उठा लिया और थाना धनारी में रखा। मंगलवार को पिता की मौत के बाद पुलिस ने उसे बहजोई में क्राइम ब्रांच के दफ्तर पर लाकर छोड़ दिया।
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वहां से गांव लौटा। उसने धनारी में पुलिस द्वारा मारपीट का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस की पिटाई से उसकी आंख के पास चोट भी आई। ग्रामीणों का कहना था कि उदयवीर की मौत के बाद अब उसके बेटे धर्मेश, बेटी गुड़िया व पिंकी की पढ़ाई और परवरिश पर संकट रहेगा। उदयवीर बहजोई की अनाज मंडी में पल्लेदारी करता था। उसके बेटे धर्मेश (17) ने इसी साल बहजोई के इंटर कालेज से इंटर की परीक्षा पास कर बीएससी में दाखिला लिया था।
करीब 12 वर्षीय बेटी पिंकी व 13 वर्षीय बेटी गुड़िया बहजोई के हीरादेवी तोताराम कन्या इंटर कालेज में कक्षा सात की छात्रा हैं। कमजोर आर्थिक हालात में भी पल्लेदारी करके उदयवीर अपने बच्चों को पढ़ाकर अच्छा नागरिक बनाना चाहता था। गांव वालों का कहना है कि धर्मपाल अपराधी था लेकिन उदयवीर का कभी किसी अपराध से वास्ता नहीं रहा था।