टिकैत के हुक्के की गड़गड़ाहट से कांप जाती थीं सरकारें

ब्यूरो/अमर उजाला, संभल Updated Thu, 06 Oct 2016 12:52 AM IST
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उनके दिखाए रास्ते पर चलकर आज भी कई किसान नेता समस्याओं को उठाकर किसानों की रहनुमाई कर रहे हैं।
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मुजफ्फरनगर जिले के सिसौली गांव में छह अक्तूबर-1935 को साधारण किसान परिवार चौहल सिंह व मुख्तयारी देवी के आंगन में जन्मे बालक महेंद्र ने चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत बनकर किसानों के दिलों पर तीन दशक तक राज किया। उनके हुक्के की गुड़गुड़ाहट से सरकारें डगमगाने लगती थीं। खासकर पश्चिमी यूपी उनकी कर्मस्थली रही है। उन्हें कभी महात्मा टिकैत तो कभी किसानों के मसीहा की उपाधि मिली। उनकी यादों को ताजा करने के लिए किसानों ने उनकी जयंती को किसान दिवस के रूप में धूमधाम से मनाने का निर्णय लिया है।
यह सच सभी स्वीकारते हैं कि चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों को अपनी बात रखना सिखाया तो अपने हक के लिए उठकर खड़े होने का जज्बा दिया। वह जहां सरल स्वभाव के ईमानदार नेता थे, वहीं अपने अक्खड़पन के लिए जाने जाते थे। उनकी जन्मस्थली किसानों के लिए एक देवस्थान के समान ही हे।

1980 के दशक में विद्युत दरों की बढ़ोत्तरी के खिलाफ आंदोलन कर वीर बहादुर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार को झुकाने का कमा करने वाले टिकैत ने कई आंदोलनों की अगुवाई की। उनके जन्म दिन पर चंदौसी में जहां भाकियू (अअ) मंडी समिति चंदौसी से किसान जनजागरण रैली शुरू करेगी तो सिंहपुरसानी में जयंती धूमधाम से मनाया जाएगा। 
 
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