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बुखार की चपेट में आकर तीन महिलाओं समेत चार की मौत

Sat, 27 Aug 2016 12:46 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल
ब्यूरो/अमर उजाला, संभल Updated Sat, 27 Aug 2016 12:46 AM IST
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bukhar se char ki gyi jaan
बुख्‍ाार
स्थिति बिगड़ने पर मुरादाबाद और दिल्ली के नामचीन अस्पतालों में इलाज के लिए मशक्कत करते परिजनों की हिम्मत टूट रही है। मरीज इलाज के दौरान या फिर रास्ते में ही दम तोड़ रहे हैं। शुक्रवार को नरौली में शांति देवी(60), ओमवती (40) और भाटौर गांव निवासी गौरी (25) की बुखार की चपेट में आकर हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान मौत हो गई। 
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नरौली के मोहल्ला मंशा देवी निवासी शांति (60) पत्नी इतवारी को बुखार आया। परिजनों ने कस्बे में ही इलाज कराया। स्थिति बिगड़ी तो शांति को परिजन चंदौसी इलाज के लिए ले गए। लेकिन शांति देवी ने जनेटा पहुंचे ही दम तोड़ दिया। शांति देवी पिछले चार दिन से टायफायड बुखार से पीड़ित थीं।
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नरौली के ही मोहल्ला बंजरिया निवासी ओमवती (40) को परिजन बुखार सही नहीं होने पर इलाज के लिए दिल्ली ले गए थे। गुरुवार की रात करीब 11 बजे ओमवती ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। नरौली के नजदीक गांव भाटौर निवासी गौरी (25) पुत्री वीर सिंह कई दिन से बुखार से पीड़ित थी। सुधार नहीं होने पर परिजन गौरी को इलाज के लिए दिल्ली ले जा रहे थे। गजरौला से निकलते ही गौरी ने दम तोड़ दिया। परिजनों में कोहराम मचा हुआ है। लोगों में बुखार से खलबली मची हुई है। 
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संभल(ब्यूरो)। संभल जिले के गांवों में मलेरिया, वायरल और टाइफाइड का कहर है। चालीस दिनों में 13 अधिक मौतें हो चुकी हैं। चपतियों की मढ़ैया में एक और मौत हुई। मोहम्मदपुर मालनी में 100 से अधिक लोग बीमार हैं। चपतियों की मढ़ैया, मंगनपुर 50 लोग और पौटा 200 से ज्यादा लोग बीमार हैं। 



चपतियों की मढ़ैयां में चालीस दिन के भीतर छह मौतें हो चुकी हैं। इसी गांव में बुधवार को रात्रि जनेटा निवासी जाहिद (30 वर्ष) पुत्र हासम की मौत हुई है। जाहिद एक महीने से अपने बहन के यहां रह रहा था। उन्हें अचानक बुखार आया था। इसके बाद उल्टियां हुईं। जब परिजन उन्हें लेकर डाक्टर के पास जा रहे थे तभी रास्ते में उन्होंने दम तोड़ दिया। उनका गुरुवार को दफन किया गया है। इस बीच सीएमओ डा. उमराव सिंह पौटा गांव में चिकित्सकों की टीम लेकर पहुंचे। कुल  562 मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। इसमें 212 मरीज जाड़ा देकर आए बुखार से पीड़ित थे। कुल बुखार पीड़ितों की संख्या 250 थी। पौटा में अधिकतर परिवारों में कोई न कोई सदस्य बीमार है। 
 
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