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सीसीटीवी कैमरे खोल सकते हैं मारपीट का राज
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संभल। लोकसभा चुनाव में भाजपा की हार पर फेसबुक टिप्पणी करने के मामले में दो युवकों के साथ कोतवाली में मारपीट की गई। मारपीट का आरोप भाजपा जिलाध्यक्ष व उनके भाई पर है। जिन दो लोगों ने शिकायत की है, उनका कहना है कि अगर कोतवाली के सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग खंगाली जाए तो हकीकत सामने आएगी। उन्होंने जांच अधिकारी और मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर जांच के दौरान रिकार्डिंग देखने का आग्रह किया है।
संभल के भाजपा कार्यकर्ता अंशु शर्मा और सुमित गुप्ता को बिना किसी एफआईआर और वारंट के 25 मई की रात अचानक उनके घरों से उठाया गया। इसके बाद कोतवाली में उनके साथ अलग-अलग मारपीट की गई थी। सुमित और अंशु शर्मा ने इस बारे में लिखित शिकायती पत्र दिए हैं। इनकी पैरवी में स्थानीय भाजपा नेता डा. अरविंद गुप्ता और बहजोई के पूर्व चेयरमैन राजेश शंकर राजू, पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव बुधवार को बहजोई में पुलिस अधीक्षक से मिले थे। पुलिस अधीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक को जांच सौंप दी है। जांच अभी शुरू नहीं हुई है।
इस बीच अंशु शर्मा और सुमित गुप्ता ने कहा कि वह जांच अधिकारी से आग्रह कर रहे हैं कि उनकी फेसबुक पोस्ट को देखा जाए। पोस्ट में किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कोई टिप्पणी नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्हें मारापीटा गया और हैरत की बात यह है कि इसमें कोतवाली पुलिस की मिलीभगत रही। पुलिस के सामने कुछ लोगों ने कानून हाथ में लेकर उन्हें पीटा। इस मामले में अगर सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग देख ली जाती है तो काफी साक्ष्य मिल जाएंगे।
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शिकायत कर्ताओं ने यह भी कहा कि पुलिस अपने बचाव में रिकार्डिंग से छेड़खानी कर सकती है। अगर छेड़खानी की जाती है तो भी इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि उनके साथ कोतवाली में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से रिकार्डिंग में छेड़खानी कराना आरोपियों के लिए जरूरी हो गया था।
शिकायत कर्ताओं का कहना है कि इस हालत में भी उन्हें न्याय की उम्मीद है। अगर न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री तक अपनी फरियाद करेंगे। भले ही इसके लिए लखनऊ जाना पड़े। वहीं प्रभारी निरीक्षक धर्मपाल सिंह ने फिर दोहराया है कि कोतवाली में कोई मारपीट नहीं की गई।
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संभल के भाजपा कार्यकर्ता अंशु शर्मा और सुमित गुप्ता को बिना किसी एफआईआर और वारंट के 25 मई की रात अचानक उनके घरों से उठाया गया। इसके बाद कोतवाली में उनके साथ अलग-अलग मारपीट की गई थी। सुमित और अंशु शर्मा ने इस बारे में लिखित शिकायती पत्र दिए हैं। इनकी पैरवी में स्थानीय भाजपा नेता डा. अरविंद गुप्ता और बहजोई के पूर्व चेयरमैन राजेश शंकर राजू, पूर्व एमएलसी भारत सिंह यादव बुधवार को बहजोई में पुलिस अधीक्षक से मिले थे। पुलिस अधीक्षक ने अपर पुलिस अधीक्षक को जांच सौंप दी है। जांच अभी शुरू नहीं हुई है।
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इस बीच अंशु शर्मा और सुमित गुप्ता ने कहा कि वह जांच अधिकारी से आग्रह कर रहे हैं कि उनकी फेसबुक पोस्ट को देखा जाए। पोस्ट में किसी व्यक्ति विशेष के प्रति कोई टिप्पणी नहीं है लेकिन इसके बावजूद उन्हें मारापीटा गया और हैरत की बात यह है कि इसमें कोतवाली पुलिस की मिलीभगत रही। पुलिस के सामने कुछ लोगों ने कानून हाथ में लेकर उन्हें पीटा। इस मामले में अगर सीसीटीवी कैमरों की रिकार्डिंग देख ली जाती है तो काफी साक्ष्य मिल जाएंगे।
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शिकायत कर्ताओं ने यह भी कहा कि पुलिस अपने बचाव में रिकार्डिंग से छेड़खानी कर सकती है। अगर छेड़खानी की जाती है तो भी इस बात की पुष्टि हो जाएगी कि उनके साथ कोतवाली में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी वजह से रिकार्डिंग में छेड़खानी कराना आरोपियों के लिए जरूरी हो गया था।
शिकायत कर्ताओं का कहना है कि इस हालत में भी उन्हें न्याय की उम्मीद है। अगर न्याय न मिला तो मुख्यमंत्री तक अपनी फरियाद करेंगे। भले ही इसके लिए लखनऊ जाना पड़े। वहीं प्रभारी निरीक्षक धर्मपाल सिंह ने फिर दोहराया है कि कोतवाली में कोई मारपीट नहीं की गई।