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Sambhal News: बंगाली कॉलोनी में गूंजे मां दुर्गा के जयकारे
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जुनावई। क्षेत्र के दीपा नगला स्थित बंगाली कॉलोनी में मां दुर्गा की पूजा को लेकर जबरदस्त उत्साह है। मां दुर्गा के जयकारे गूंज रहे हैं। यहां बसे बंगाली प्रवासी परिवार पिछले 37 वर्षों से पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ यह परंपरा निभाते आ रहे हैं।
पूजा के पहले दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई। बंगाली प्रवासी महिलाओं ने लाल-सफेद साड़ी और पुरुषों ने पारंपरिक कुर्ता-धोती पहनकर मां दुर्गा के दर्शन किए। पंडित अजय चक्रवर्ती ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।
कमेटी के अध्यक्ष नारायण चंद, सचिव श्याम लाल, कोषाध्यक्ष निशांत हीरा और सलाहकार प्रभाष सरकार भी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के समक्ष माथा टेककर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
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दिन-रात पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें नवयुवकों और युवतियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ढाक की थाप, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
सिर्फ पूजा नहीं, संस्कृति को संजोने का माध्यम
दीपा नगला बंगाली कॉलोनी में यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को संजोए रखने का माध्यम भी है। 37 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गा पूजा के बहाने सभी परिवार एकजुट होते हैं। यह आयोजन आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता है।
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पूजा के पहले दिन मंदिर परिसर में सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई। बंगाली प्रवासी महिलाओं ने लाल-सफेद साड़ी और पुरुषों ने पारंपरिक कुर्ता-धोती पहनकर मां दुर्गा के दर्शन किए। पंडित अजय चक्रवर्ती ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधि-विधान से पूजा संपन्न कराई।
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कमेटी के अध्यक्ष नारायण चंद, सचिव श्याम लाल, कोषाध्यक्ष निशांत हीरा और सलाहकार प्रभाष सरकार भी उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के समक्ष माथा टेककर परिवार, समाज और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।
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दिन-रात पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखा गया, जिसमें नवयुवकों और युवतियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। ढाक की थाप, शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।
सिर्फ पूजा नहीं, संस्कृति को संजोने का माध्यम
दीपा नगला बंगाली कॉलोनी में यह पूजा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है। यह अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को संजोए रखने का माध्यम भी है। 37 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गा पूजा के बहाने सभी परिवार एकजुट होते हैं। यह आयोजन आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता का संदेश देता है।