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Sambhal News: मेहनत से बदली तकदीर... खुद के साथ दूसरों का भी सहारा बनीं रानीं
Sat, 03 Oct 2026 01:37 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
Updated Sat, 03 Oct 2026 01:37 AM IST
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संभल। अलावलपुर गांव की रानी शर्मा ने अपनी कड़ी मेहनत से तकदीर बदली है। बीए पास रानी अब सिद्ध बाबा ब्रांड के तहत शुद्ध खाद्य उत्पादों का कारोबार कर रही हैं। उन्हें सालाना करीब 3 लाख रुपये की आय हो रही है।
रानी ने वर्ष 2022 में दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उद्यमिता की राह चुनी। उन्होंने इसी वर्ष एक स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। समूह के माध्यम से रानी ने 1.5 लाख रुपये का सीसीएल ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने खेती की और समूह की अन्य महिलाओं को भैंस खरीदने में मदद की।
वर्ष 2025 में 1.5 लाख रुपये का सीआईएफ फंड लेकर उन्होंने एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की। यहां उन्होंने शुद्ध पिसे मसाले, पीली सरसों का तेल और मल्टीग्रेन आटा बनाना शुरू किया। इस पहल से समूह की 10 महिलाओं को रोजगार मिला है।
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सरकारी सहयोग से मिली बाजार तक पहुंच
जिला प्रशासन के सहयोग से रानी के उत्पादों को बाजार मिला। पिछले वर्ष जून में उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर के सरस फूड आउटलेट में एक दुकान आवंटित हुई। मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी ने उनके उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की। सरकारी मदद से अब तक 4 लाख रुपये से अधिक के उत्पाद बिक चुके हैं। इससे रानी को सालाना करीब 3 लाख रुपये की आय हो रही है।
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ग्रामीण परिवेश में सबसे बड़ी बाधा संकोच और हिचकिचाहट होती है। जब तक महिलाएं चारदीवारी से बाहर नहीं निकलेंगी, तब तक उन्हें अपनी वास्तविक क्षमता और सरकारी योजनाओं का एहसास नहीं होगा। सरकार एनआरएलएम के जरिए महिलाओं को पैरों पर खड़ा करने के भरपूर मौके और वित्तीय सहायता दे रही है। महिलाएं समूह बनाकर संगठित हों और खुद के हुनर पर भरोसा रखें।
रानी शर्मा, सिद्ध बाबा महिला स्वयं सहायता समूह
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रानी ने वर्ष 2022 में दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर उद्यमिता की राह चुनी। उन्होंने इसी वर्ष एक स्वयं सहायता समूह का गठन किया था। समूह के माध्यम से रानी ने 1.5 लाख रुपये का सीसीएल ऋण लिया। इस राशि से उन्होंने खेती की और समूह की अन्य महिलाओं को भैंस खरीदने में मदद की।
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वर्ष 2025 में 1.5 लाख रुपये का सीआईएफ फंड लेकर उन्होंने एक प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित की। यहां उन्होंने शुद्ध पिसे मसाले, पीली सरसों का तेल और मल्टीग्रेन आटा बनाना शुरू किया। इस पहल से समूह की 10 महिलाओं को रोजगार मिला है।
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सरकारी सहयोग से मिली बाजार तक पहुंच
जिला प्रशासन के सहयोग से रानी के उत्पादों को बाजार मिला। पिछले वर्ष जून में उन्हें कलेक्ट्रेट परिसर के सरस फूड आउटलेट में एक दुकान आवंटित हुई। मुख्य विकास अधिकारी और जिला विकास अधिकारी ने उनके उत्पादों की गुणवत्ता की जांच की। सरकारी मदद से अब तक 4 लाख रुपये से अधिक के उत्पाद बिक चुके हैं। इससे रानी को सालाना करीब 3 लाख रुपये की आय हो रही है।
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ग्रामीण परिवेश में सबसे बड़ी बाधा संकोच और हिचकिचाहट होती है। जब तक महिलाएं चारदीवारी से बाहर नहीं निकलेंगी, तब तक उन्हें अपनी वास्तविक क्षमता और सरकारी योजनाओं का एहसास नहीं होगा। सरकार एनआरएलएम के जरिए महिलाओं को पैरों पर खड़ा करने के भरपूर मौके और वित्तीय सहायता दे रही है। महिलाएं समूह बनाकर संगठित हों और खुद के हुनर पर भरोसा रखें।
रानी शर्मा, सिद्ध बाबा महिला स्वयं सहायता समूह