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Sambhal News: पशुओं का बीमा कराएं पशुपालक, नुकसान से बचें
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संभल। जोखिम प्रबंधन एवं पशुधन बीमा योजना के तहत जिले को 1245 का लक्ष्य आंवटित हुआ है। इसके क्रम में पशु चिकित्सा विभाग की ओर से पशुओं का बीमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। किसान अधिकतम पांच पशुओं का बीमा करा सकते हैं। पशु की मौत होने पर किसान को उसकी पूरी कीमत दी जाएगी।
संभल के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.राजपाल वर्मा ने बताया कि संभल ब्लॉक क्षेत्र में अब तक 10 किसानों ने पशुओं का बीमा करा लिया है। बताया कि एक वर्ष के लिए प्रीमियम राशि कुल धनराशि के सापेक्ष 2.99 फीसदी देनी पड़ेगी। ऐसे समझिए कि पशु की कुल कीमत पर तीन फीसदी राशि। इस राशि को देकर एक वर्ष और 4.53 फीसदी धनराशि देकर दो वर्ष और 7.02 फीसदी धनराशि देकर तीन वर्ष के लिए बीमा कराया जा सकता है।
दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आय का साधन कृषि और पशुपालन है। कम भूमि वाले कमोवेश सभी ककासन पशु पालन कर अपने परिवार का लालन-पोषण करते हैं। ऐसे में जब पशुओं की मृत्यु हो जाती है तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जाता है।
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इसी के मद्देनजर शासन ने जोखिम प्रबंधन और पशुधन बीमा योजना शुरू की थी। डा.राजपाल वर्मा ने बताया कि बीमा कराने के इच्छुक किसानों को अपने निकट के पशु चिकित्सालय पहुंचकर अपना नाम, पता और फोन नंबर लिखवाना होगा। इसके बाद पशु चिकित्सक किसान के घर पहुंचकर पशु का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। स्वस्थ्य परीक्षण करने के बाद पशुओं का बीमा किया जाएगा। बताया कि पशु की मौत होने पर उसकी कीमत आंकी जाएगी। मृत्यु के समय आंकी गई कीमत के आधार पर ही किसानों को बीमे का लाभ मिलेगा।
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संभल के उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा.राजपाल वर्मा ने बताया कि संभल ब्लॉक क्षेत्र में अब तक 10 किसानों ने पशुओं का बीमा करा लिया है। बताया कि एक वर्ष के लिए प्रीमियम राशि कुल धनराशि के सापेक्ष 2.99 फीसदी देनी पड़ेगी। ऐसे समझिए कि पशु की कुल कीमत पर तीन फीसदी राशि। इस राशि को देकर एक वर्ष और 4.53 फीसदी धनराशि देकर दो वर्ष और 7.02 फीसदी धनराशि देकर तीन वर्ष के लिए बीमा कराया जा सकता है।
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दरअसल, ग्रामीण क्षेत्र में किसानों की आय का साधन कृषि और पशुपालन है। कम भूमि वाले कमोवेश सभी ककासन पशु पालन कर अपने परिवार का लालन-पोषण करते हैं। ऐसे में जब पशुओं की मृत्यु हो जाती है तो उनके सामने रोजी-रोटी का संकट उत्पन्न हो जाता है।
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इसी के मद्देनजर शासन ने जोखिम प्रबंधन और पशुधन बीमा योजना शुरू की थी। डा.राजपाल वर्मा ने बताया कि बीमा कराने के इच्छुक किसानों को अपने निकट के पशु चिकित्सालय पहुंचकर अपना नाम, पता और फोन नंबर लिखवाना होगा। इसके बाद पशु चिकित्सक किसान के घर पहुंचकर पशु का स्वास्थ्य परीक्षण करेंगे। स्वस्थ्य परीक्षण करने के बाद पशुओं का बीमा किया जाएगा। बताया कि पशु की मौत होने पर उसकी कीमत आंकी जाएगी। मृत्यु के समय आंकी गई कीमत के आधार पर ही किसानों को बीमे का लाभ मिलेगा।