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Sambhal News: खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से खड़ा हुआ भ्रष्टाचार का महल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 05 Jul 2026 02:17 AM IST
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A palace of monuments built through the partnership between the mining mafia and musicians.
गुन्नौर (संभल)। तहसील क्षेत्र में 850 बीघा (71.5500 हेक्टेयर) सरकारी जमीन को अवैध पट्टों से खुर्दबुर्द करने के पीछे खनन का खेल था। जमीन खनन माफिया और अफसरों की जुगलबंदी से गंगा किनारे न सिर्फ भ्रष्टाचार का बड़ा महल खड़ा किया गया बल्कि 18 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन दूसरों के नाम कर दी। साल 2013 में हुई इस मनमानी का राजफाश होने के बाद बर्खास्त एसडीएम, सहायक चकबंदी अधिकारी, राजस्व निरीक्षक, लेखपाल, पूर्व प्रधान समेत छह आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। गुन्नौर के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में सुल्तानपुर में तैनात एसडीएम करम सिंह चौहान समेत 13 आरोपियों की पुलिस तलाश कर रही है। इनमें शामिल चकबंदी और राजस्व विभाग के कुछ कर्मचारी सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं। डीएम अंकित खंडेलवाल का कहना है कि सभी अवैध पट्टों को निरस्त किया जाएगा।
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जून 2019 में गुन्नौर तहसील के गैर आबाद गांव सुखैला हल्का क्षेत्र भौना नंगला के अंतर्गत गंगा के किनारे की जमीन पर चकबंदी विभाग की मिलीभगत से गंगा की रेतीली जमीन पर 162 पट्टे कर दिए गए थे। नियमों को दरकिनार करके की गई इस मनमानी में ग्राम पंचायत असदपुर के तत्कालीन प्रधान विक्रांत और भू प्रबंध समिति के सदस्यों का भी हाथ था। जानकार बताते हैं कि इस रेतीली भूमि पर उपजाऊ मिट्टी की तरह फसलें पैदा नहीं की जा सकतीं। इस खेल के पीछे असल मकसद का अवैध खनन का था। किसानों के नाम पट्टे की आड़ में जमीन से माफिया को बेरोकटोक खनन की छूट देना मकसद था। इसी मकसद को पूरा करने के लिए गंगा किनारे की जमीन में पैदा होने वाली खरबूजे-तरबूज जैसी फसलें भी नहीं की गईं। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे खेल में तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की रिश्वत चली, हालांकि आधिकारिक स्तर से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
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विभागीय लोग बताते हैं कि जमीन खुर्दबुर्द करने के इस खेल में कुल 162 पट्टे किए गए। 31 मार्च 2023 में 17 पट्टे निरस्त किए गए थे। अभी रिकॉर्ड में 145 पट्टे हैं। गुन्नौर के सब रजिस्ट्रार के मुताबिक सर्किल रेट के हिसाब से प्रश्नगत जमीन की दर 24 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर निर्धारित है। पट्टों से जुड़ी कुल 71.5500 हेक्टेयर (800 बीघा से ज्यादा) जमीन का अनुमानित मूल्य लगभग 18 करोड़ रुपये बनता है। ग्राम पंचायत असदपुर की मौजूदा प्रधान पिंकी यादव बताती हैं कि लंबे समय से इस जमीन का कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा, जो खनन के लिए इसे खाली रखने का संकेत है।
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तीन करोड़ से ज्यादा की रिश्वत का खेल



ग्राम पंचायत असदपुर की ग्राम प्रधान पिंकी यादव के पिता मनवीर सिंह का कहना है कि वर्ष 2019 में पट्टे आवंटित होने के दौरान किसानों व ग्रामीणों को पट्टे दिलाने के नाम पर खूब अवैध वसूली हुई थी। उनका मानना है कि तत्कालीन अफसरों, कर्मचारियों ने तीन करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की थी। उन्होंने बताया कि कई को पट्टे की जमीन पर कब्जे नहीं दिलाए गए। कुछ समय बाद 135 किसानों से वसूली करके उन्हें भी पट्टे दिलाने का भरोसा दिया गया।



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