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Sambhal News: फर्जी तरीके से बीमा क्लेम हड़पने वाले गिरोह के 5 और सदस्य गिरफ्तार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 06 Jul 2025 01:17 AM IST
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5 more members of the gang involved in fraudulently claiming insurance claims arrested
बहजोई(संभल)। नई दिल्ली शक्तिनगर निवासी त्रिलोक की मृत्यु की तारीख में फर्जीवाड़े के जलिये दस्तावेजों में फेरबदल कर 20 लाख रुपये की बीमा राशि हड़पने वाले गिरोह के पांच सदस्यों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों को पुलिस ने कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया। शनिवार को एसपी कृष्ण विश्नोई ने प्रेसवार्ता कर पूरे मामले का खुलासा किया।
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एसपी ने बताया कि बीती 15 फरवरी को रजपुरा पुलिस ने फर्जी तरीके से बीमा की राशि हड़पने वाले गिरोह के सरगना थाना धनारी के गांव भइयापुर निवासी शाहरुख को गिरफ्तार किया था। इसके बाद अब एएसपी अनुकृति शर्मा की देखरेख में पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर सरगना शाहरुख के संपर्क में फर्जी दस्तावेज बनवाने में मदद करने वाले दिल्ली के थाना तिमारपुर संजय बस्ती निवासी आरोपी वीरेंद्र समेत वेलकम थाना क्षेत्र की सब्जी मंडी निवासी नवाज अहमद, थाना हर्ष विहार के सुबौली निवासी महिला कल्पना, थाना सुलेमान नगर के किराड़ी प्रेमनगर निवासी प्रेम व जिला गाजियाबाद के थाना लोनी के राजनगर कॉलोनी निवासी रविंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया है। कोर्ट ने आरोपियों को जेल भेज दिया।
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आरोपियों ने फर्जीवाड़ा कर नई दिल्ली निवासी मृतक त्रिलोक की बीमा पॉलिसी की धनराशि हड़पने के लिए उसकी मृत्यु की तिथि में बदलाव किया और उसकी बीमा की रकम हड़प ली थी।
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एसपी ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में वीरेंद्र पूर्व में जीबी पंत अस्पताल में गार्ड की नौकरी करता था। आरोपी नवाज जीबी पंत में नर्सिंग सहयोगी के तौर पर काम कर रहा था। वहीं, आरोपी कल्पना सीएसबी बैंक में बिजनेस डवलपमेंट पद पर कार्य करती थी। आरोपी प्रेम एमसीडी के बाहर फॉर्म भरने की दलाली तथा रविंद्र एक कंपनी में बीमा पॉलिसी की इंवेस्टीगेशन का काम करता था।
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शाहरुख के कब्जे से मिले दस्तावेजों के सहारे त्रिलोक के मामले तक पहुंची पुलिस
बहजोई। एसपी ने बताया कि बीती 15 फरवरी को रजपुरा पुलिस ने फर्जी तरीके से बीमा कराकर धनराशि हड़पने वाले गिरोह के सरगना शाहरुख को उसके तीन अन्य साथियों हीरेंद्र, संजू व प्रेमपाल के साथ गिरफ्तार किया था। आरोपियों से बरामद दस्तावेजों में नई दिल्ली निवासी त्रिलोक का मामला सामने आया था। इसमें मृत्यु होने के बाद त्रिलोक की बीमा पॉलिसी कराई गई थीं और क्लेम पाने के लिए उसे फिर से अभिलेखों में मृत दिखाया गया था।
इसके अलावा मिले दस्तावेजों में साफ हुआ कि त्रिलोक की वास्तविक मृत्यु 19 जून 2024 को हुई थी। बाद में आरोपियों ने बीमा क्लेम लेने के लिए दस्तावेजों में दोबारा से उसकी फर्जी मृत्यु 27 दिसंबर 2024 दिखाई गई थी। इसके बाद जीबी पंत अस्पताल के फर्जी दस्तावेज बनवाकर त्रिलोक की दिल की बीमारी का उपचार दिखाया गया। बाद में उपचार के दौरान उसकी मृत्यु दिखा दी गई। बाद में जीबी पंत के दस्तावेजों से एमसीडी से इसी तिथि का मृत्यु प्रमाणपत्र जारी करा लिया गया। जांच में सामने आया कि मृतक की एचडीएफसी लाइफ की पॉलिसी भी 29 अगस्त 2024 को जारी कराने के बाद क्लेम का बीस लाख रुपया एचडीएफसी लाइफ की ओर से नॉमिनी के खाते में डाल दिया गया। यह भी सामने आया कि जीबी पंत में उपचार के दौरान धोखाधड़ी से दस्तावेज बनवाए गए थे। इसमें एमसीडी के दलाल व इंवेस्टीगेशन एजेंसी के लोगों के साथ मिलकर बीमा कंपनियों के साथ धोखाधड़ी की गई है।

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आरोपियों से बरामद हुईं हृदय रोग विशेषज्ञों की चार सील मुहर

एसपी ने बताया कि पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों में वीरेंद्र व नवाज से एक-एक मोबाइल फोन व कल्पना से दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के एक हृदय रोग के विशेषज्ञ समेत अन्य चिकित्सकों की चार सील मोहर बरामद की गई हैं।
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क्रिकेटर बनने की चाह में शाहरुख का सहयोगी बन गया वीरेंद्र

एसपी ने बताया कि आरोपी वीरेंद्र के मुताबिक उसने कक्षा 12 तक पढ़ाई की है। बचपन से वह क्रिकेटर बनना चाहता था। रुपयों के अभाव में ट्रेनिंग नहीं ले पा रहा था। वर्ष 2020-22 तक दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल के बाहर गार्ड की नौकरी करता था। वहीं, अस्पताल में चिकित्सक को दिखाने के लिए मरीजों की जल्दी पर्ची बनवा देता था। इससे उसे दलाली के सौ दो सौ रुपये मिल जाते थे। इसके बाद उसने गार्ड की नौकरी छोड़ दी। इसके बाद उसे शाहरुख मिला, तो उसने रुपयों के लिए शाहरुख के लिए अस्पताल में बीमार व मरने वाले लोगों की जानकारी देनी शुरू कर दी। इसके बाद रुपया आने पर उसने गार्ड की नौकरी छोड़ दी। बाद में वर्ष 2024 में बीमार होने पर त्रिलोक को अस्पताल में भर्ती करने की पर्ची बनवाने के लिए एक रिश्तेदार का फोन आया। त्रिलोक की हालत गंभीर थी। उसने शाहरुख को जानकारी दी, तो शाहरुख ने उससे त्रिलोक के कागजात मांगने को कहा। उसने त्रिलोक की पत्नी से आधार कार्ड व पैन कार्ड ले लिए। इसके बाद त्रिलोक की मृत्यु होने के बाद फिर से दिल की बीमारी से मौत होने के दस्तावेज बनवाकर शाहरुख को दे दिए थे।
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आरोपी नवाज ने दूसरे मरीज की निकालकर दी थी ईसीजी रिपोर्ट
एसपी ने बताया कि जानकारी लेने पर आरोपी नवाज ने बताया कि वह कक्षा आठ पास है और करीब 11 वर्ष से जीबी पंत में नर्सिंग सहयोगी के तौर पर कार्य करता था। लंबे समय से नौकरी करने से वह ईसीजी मशीन अच्छी तरह से चला लेता था। करीब आठ माह से वेतन नहीं मिला था। आर्थिक स्थिति कमजोर थी। इसलिए ही एक दिन वीरेंद्र के कहने पर उसने दिल के एक मरीज की ईसीजी निकालकर त्रिलोक के नाम से बनाकर वीरेंद्र को दी थी। इसी के सहारे त्रिलोक की मृत्यु की तारीख में फेरबदल किया गया।
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सीएसबी बैंक में बिजनेस डवलपमेंट के पद पर थी आरोपी कल्पना
एसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी कल्पना का कहना था कि बीएस पास कर वह सीएसबी बैंक में बिजनेस डवलपमेंट के पद पर काम करती थी। इसके बाद शाहरुख उसके संपर्क में आया। उसने उसके अधिक से अधिक बैंक खाते खुलवाने की बात कही, तो बैंक खाते का टारगेट पूरा करने के लालच में वह शाहरुख के गैंग से जुड़ गई। इसके बाद उसने त्रिलोक व उसकी पत्नी सपना का खाता खोला। बाद में त्रिलोक की मृत्यु हो जाने के बाद उसने के-वाईसी के समय एक अन्य व्यक्ति हीरेंद्र की फोटो खींचा और त्रिलोक के नाम से खाता खोल दिया।

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एमसीडी के बाहर फॉर्म भरवाने की दलाली करता था आरोपी प्रेम
बहजोई। एसपी ने बताया कि आरोपी प्रेम ने बताया कि कक्षा आठ तक पढ़ाई करने के बाद वह एमसीडी के बाहर लोगों के फार्म भरवाने की दलाली करता था। इसके बाद वह शाहरुख के संपर्क में आया और अच्छी कमाई के लालच में दो वर्षों में शाहरुख को फर्जी तरीके से कई मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर दिए थे।

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बीमा पॉलिसी की इंवेस्टीगेशन करता था आरोपी रविंद्र
बहजोई। एसपी ने बताया कि आरोपी रविंद्र से बातचीत की गई, तो उसने बताया कि कक्षा 12 तक की पढ़ाई करने के बाद कंपनियों में इंवेस्टीगेशन का काम कर रहा था। शाहरुख से मुलाकात होने के बाद त्रिलोक की एचडीएफसी बीमा क्लेम की इंवेस्टीगेशन उसके पास ही आई थी। शाहरुख के कहने पर उसने गलत तरीके से त्रिलोक कुमार की इंवेस्टीगेशन करके संबंधित बीमा कंपनी को भेज दी थी।




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