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गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए कटेंगे 4000 पेड़
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जिले की दो तहसीलों से गुजर रहे 31 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए 4000 पेड़ जल्द काटे जाएंगे। निर्माण एजेंसी यूपीडा (उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण) ने किसानों के पेड़ों का अधिग्रहण नहीं किया है जबकि पेड़ कटाने के लिए एजेंसी ने सामूहिक रूप से आवेदन किया है। वन विभाग से परमिशन मिलते ही किसान स्वयं अपने पेड़ों को कटवाकर बेच सकेंगे। उसके बाद ही गंगा एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हो सकेगा।
मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे जिले की तहसील चंदौसी व संभल से होकर गुजर रहा है। पिछले दो साल से एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है। 33 गांवों के किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे में गई है। किसानों से जमीन का अधिग्रहण हो गया है। निर्माण एजेंसी यूपीडा ने जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है तथा जिले में कार्यालय भी बना लिया है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए करीब 4000 काटे जाएंगे। इनमें अधिकांश पेड़ किसानों के हैं और कुछ पेड़ सड़क किनारे वाले सरकारी हैं। इन पेड़ों का कटान वन विभाग की परमिशन के बाद ही हो सकेगा।
यूपीडा ने किसानों ने जमीन का अधिग्रहण किया है लेकिन उनके पेड़ों का दाम नहीं दिया है। किसानों की सुविधा के लिए वन विभाग में संयुक्त रूप से सभी किसानों और सरकारी विभाग (सड़क किनारे) के पेड़ों के काटने के लिए स्वयं ही आवेदन किया है। पेड़ कटान पर वन विभाग में जमा होने वाला शुल्क भी जमा करने का दावा किया है। पेड़ों के कटान की परमिशन डीएफओ व रेंजर की रिपोर्ट के बाद ही मिलेगी लेकिन संभल में अभी तक इन पेड़ों के कटान की परमिशन जारी नहीं की गई है। परमिशन मिलने के बाद किसानों को पेड़ बेचने में भी समय लगेगा। ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगातार देरी होती जा रही है।
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किसानों को स्वयं अपने पेड़ काटकर बेचने का अधिकार
तहसीलदार संभल मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण एजेंसी यूपीडा ने किसानों के पेड़ों का अधिग्रहण नहीं किया है। पेड़ किसानों के ही हैं। पेड़ों के कटान में परेशानी न हो, इसके लिए यूपीडा ने संयुक्त रूप से कटान की परमिशन के लिए वन विभाग में आवेदन किया गया है। परमिशन मिलने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जिस जमीन का अधिग्रहण हुआ है। उसमें खड़े पेड़ों को किसान स्वयं अपनी मर्जी कटवाकर बेच सकेंगे।
यूपीडा की ओर से संयुक्त से पेड़ों के कटान की परमिशन के लिए आवेदन आया है। स्थानीय टीम से रिपोर्ट लगवाई जा रही है। जल्द ही परमिशन जारी कर दी जाएगी। इसके बाद निर्माण एजेंसी अथवा किसान गंगा एक्सप्रेसवे के बीच आने वाले पेड़ों को कटवा सकेंगे। सरकारी विभाग यानी सड़क किनारे वाले पेड़ों को वन निगम की टीम काटेगी।
अरविंद सिंह, डीएफओ, संभल
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मेरठ से प्रयागराज तक बन रहा गंगा एक्सप्रेसवे जिले की तहसील चंदौसी व संभल से होकर गुजर रहा है। पिछले दो साल से एक्सप्रेसवे पर काम चल रहा है। 33 गांवों के किसानों की जमीन एक्सप्रेसवे में गई है। किसानों से जमीन का अधिग्रहण हो गया है। निर्माण एजेंसी यूपीडा ने जमीन अधिग्रहण के बाद निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है तथा जिले में कार्यालय भी बना लिया है। एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए करीब 4000 काटे जाएंगे। इनमें अधिकांश पेड़ किसानों के हैं और कुछ पेड़ सड़क किनारे वाले सरकारी हैं। इन पेड़ों का कटान वन विभाग की परमिशन के बाद ही हो सकेगा।
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यूपीडा ने किसानों ने जमीन का अधिग्रहण किया है लेकिन उनके पेड़ों का दाम नहीं दिया है। किसानों की सुविधा के लिए वन विभाग में संयुक्त रूप से सभी किसानों और सरकारी विभाग (सड़क किनारे) के पेड़ों के काटने के लिए स्वयं ही आवेदन किया है। पेड़ कटान पर वन विभाग में जमा होने वाला शुल्क भी जमा करने का दावा किया है। पेड़ों के कटान की परमिशन डीएफओ व रेंजर की रिपोर्ट के बाद ही मिलेगी लेकिन संभल में अभी तक इन पेड़ों के कटान की परमिशन जारी नहीं की गई है। परमिशन मिलने के बाद किसानों को पेड़ बेचने में भी समय लगेगा। ऐसे में गंगा एक्सप्रेसवे के निर्माण में लगातार देरी होती जा रही है।
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किसानों को स्वयं अपने पेड़ काटकर बेचने का अधिकार
तहसीलदार संभल मनोज कुमार सिंह ने बताया कि एक्सप्रेसवे निर्माण एजेंसी यूपीडा ने किसानों के पेड़ों का अधिग्रहण नहीं किया है। पेड़ किसानों के ही हैं। पेड़ों के कटान में परेशानी न हो, इसके लिए यूपीडा ने संयुक्त रूप से कटान की परमिशन के लिए वन विभाग में आवेदन किया गया है। परमिशन मिलने के बाद गंगा एक्सप्रेसवे के लिए किसानों की जिस जमीन का अधिग्रहण हुआ है। उसमें खड़े पेड़ों को किसान स्वयं अपनी मर्जी कटवाकर बेच सकेंगे।
यूपीडा की ओर से संयुक्त से पेड़ों के कटान की परमिशन के लिए आवेदन आया है। स्थानीय टीम से रिपोर्ट लगवाई जा रही है। जल्द ही परमिशन जारी कर दी जाएगी। इसके बाद निर्माण एजेंसी अथवा किसान गंगा एक्सप्रेसवे के बीच आने वाले पेड़ों को कटवा सकेंगे। सरकारी विभाग यानी सड़क किनारे वाले पेड़ों को वन निगम की टीम काटेगी।
अरविंद सिंह, डीएफओ, संभल