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जहरीली फली से रहें सावधान, नहीं तो चली जाएगी जान

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 26 Nov 2019 12:33 AM IST
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3 child death to eating poisoning plant in chandausi
जुनावई के मल्लाह का घेर गांव में शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करते चिकि त्सक। - फोटो : CHANDAUSI
चंदौसी/जुनावई। जुनावई के कादराबाद के मजरा मल्लाह का घेर में शनिवार को जहरीली फलियां खाने से तीन बालिकाओं की मौत के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग में भी खलबली मच गई है। डाक्टरों की टीम ने मौके पर जाकर जांच की तो बताया गया कि जहरीले फल खाने से ही बालिकाओं की मौत हुई है। साथ ही विभाग ने गांव में शिविर लगाकर करीब सौ लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। किसी अन्य व्यक्ति में ऐसे कोई लक्षण नहीं पाए गए हैं।
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जुनावई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्सा प्रभारी डा. मनोज कुमार ने बताया कि सोमवार को मल्लाह का घेर गांव में डा. चंद्रकेश की अगुवाई में एक टीम भेजी गई थी। मृतक बालिकाओं के परिजनों से भी पूछताछ की गई। मौके पर जाकर भी देखा गया तो यही पाया गया कि तीनों बालिकाओं ने खेल के दौरान जहरीली फलियां खा ली थी। ग्रामीणों ने मौके पर बताया कि खलिहान में कई तरह के फल हैं। इनमें कुछ तो खाने योग्य हैं, कुछ जहरीले व कड़वे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया कि बालिकाओं ने कौन सी फली खाई हैं लेकिन इतना तो स्पष्ट है कि बालिकाओं ने फली ही खाईं थी।
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ऐसे में खलिहान पर उगले वाले पौधों पर तो रोक नहीं लगाई जा सकती लेकिन अभिभावकों को बच्चों को यह जानकारी देनी चाहिए कि कौन सा फल खाने योग्य हैं और कौन सा नहीं है। क्योंकि जानकारी का अभाव बच्चों के लिए जानलेवा हो सकता है। गांव में टीम ने शिविर लगाकर करीब सौ ग्रामीणों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। इसमें मौसम की सामान्य बीमारियों के मरीज मिले। जिन्हेें दवाइयां दे दी गई हैं लेकिन कोई भी मरीज दिमागी बुखार का नहीं मिला। न ही किसी अन्य व्यक्ति में फलियां खाने के कोई लक्ष्मण मिले हैं।
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तेरह साल पहले भी फलियां खाने से हुई थी तीन बच्चों की मौत
मल्लाह का घेर से सिर्फ दो किलोमीटर दूर स्थित बदायूं जिले के कोठरा गांव में भी तेरह साल पहले ऐसी ही घटना सामने आई थी। जिसमें दो बच्चे तो फलियां खाने के बाद तत्काल मौत का शिकार हो गए थे, एक बच्चे की उपचार के दौरान जान चली गई थी।

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. मनोज कुमार ने बताया कि तेरस साल पहले ऐसी घटना सामने आई थी। जो निकटस्थ गांव कोठरा में घटित हुई थी, यह गांव जुनावई सीमा पर ही है। यहां भी जंगली फल खा लेने से दो बच्चों की मौके पर मौत हो गई थी। एक बच्चे की उपचार के दौरान जान गई थी। इसके बाद ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। लेकिन खेत खलिहान में तो सभी तरह के पौधे उगते होते हैं। कुछ लाभदायक होते है तो कुछ नुकसान देने वाले भी होते हैं। इनके प्रति स्थानीय लोगों को जागरूक होना चाहिए। ऐसे जागरूक लोगों को अपने बच्चों को भी फलों की जानकारी देनी चाहिए।
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