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जाने को है साल लेकिन नहीं बदला परिषदीय विद्यालयों का हाल
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संभल। वर्तमान वर्ष जाने को है, इस वर्ष ने कई उपलब्धियां दीं। लेकिन पवांसा ब्लाक में बेसिक शिक्षा विभाग का हाल बहुत ज्यादा नहीं बदला। पवांसा ब्लॉक क्षेत्र के गांवों के कई परिषदीय विद्यालयों के परिसरों में गंदगी के अंबार लगे मिले। कहीं विद्यालय बंद मिले तो कहीं सरकारी हैंडपंप के आसपास गंदगी थी।
पवांसा के गांव सादनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 10.20 बजे तक विद्यालय बंद रहा। शिक्षा मित्र मलखान सिंह 10.30 बजे पहुंचे तो गांव के छह बच्चे भी विद्यालय पहुंच गए। सहायक अध्यापक के रूप में तैनात बनवारी लाल गैैरहाजिर रहे। जबकि इस विद्यालय में 59 बच्चों का दाखिला है। लेकिन उपस्थिति के नाम पर केवल छह बच्चे पहुंचे। जो बिना स्वेटर के ही थे। कड़ाके की ठंड में स्वेटर का वितरण नहीं किया गया।
जब इस बाबत जानकारी की तो शिक्षा मित्र ने बताया कि इंचार्ज अध्यापक के पास कई जगह का चार्ज है। इसलिए वह विद्यालय कम ही आ पाते हैं। स्वेटर आ गए हैं, विद्यालय में रखे हुए हैं। वहीं औरंगाबाद देहरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के पानी पीने के लिए सरकारी हैंडपंप तक नहीं है।
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जबकि विद्यालय शिक्षकों का कहना है कि कई बार गांव के प्रधान से हैंडपंप लगवाने की मांग की है। लेकिन अब तक हैंडपंप नहीं लगा। वहीं विद्यालय की बाउंड्रीवाल नहीं है। जिससे विद्यालय आवारा पशुओं का मैदान बना रहता है।
विद्यालय में भरा हुआ है पशुओं का चारा
सादनगर प्राथमिक विद्यालय में एक ग्रामीण ने अपने पशुओं के खाने का भूसा भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस कक्ष में भूसा भरा हुआ है। उस कक्ष में ताला लगा हुआ है और कक्ष में लगे ताले की चाबी भी ग्रामीण के पास है। जब इस बारे मेें जानकारी की गई तो बताया गया कि कई बार मना किया है लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं है। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी है।
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पवांसा के गांव सादनगर स्थित प्राथमिक विद्यालय में 10.20 बजे तक विद्यालय बंद रहा। शिक्षा मित्र मलखान सिंह 10.30 बजे पहुंचे तो गांव के छह बच्चे भी विद्यालय पहुंच गए। सहायक अध्यापक के रूप में तैनात बनवारी लाल गैैरहाजिर रहे। जबकि इस विद्यालय में 59 बच्चों का दाखिला है। लेकिन उपस्थिति के नाम पर केवल छह बच्चे पहुंचे। जो बिना स्वेटर के ही थे। कड़ाके की ठंड में स्वेटर का वितरण नहीं किया गया।
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जब इस बाबत जानकारी की तो शिक्षा मित्र ने बताया कि इंचार्ज अध्यापक के पास कई जगह का चार्ज है। इसलिए वह विद्यालय कम ही आ पाते हैं। स्वेटर आ गए हैं, विद्यालय में रखे हुए हैं। वहीं औरंगाबाद देहरी के उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के पानी पीने के लिए सरकारी हैंडपंप तक नहीं है।
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जबकि विद्यालय शिक्षकों का कहना है कि कई बार गांव के प्रधान से हैंडपंप लगवाने की मांग की है। लेकिन अब तक हैंडपंप नहीं लगा। वहीं विद्यालय की बाउंड्रीवाल नहीं है। जिससे विद्यालय आवारा पशुओं का मैदान बना रहता है।
विद्यालय में भरा हुआ है पशुओं का चारा
सादनगर प्राथमिक विद्यालय में एक ग्रामीण ने अपने पशुओं के खाने का भूसा भरा हुआ है। हैरानी की बात यह है कि जिस कक्ष में भूसा भरा हुआ है। उस कक्ष में ताला लगा हुआ है और कक्ष में लगे ताले की चाबी भी ग्रामीण के पास है। जब इस बारे मेें जानकारी की गई तो बताया गया कि कई बार मना किया है लेकिन ग्रामीण मानने को तैयार नहीं है। इसकी जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को भी है।