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संसाधनों के अभाव में कहीं हांफ न जाएं दमकल की गाड़ियां
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संभल। गर्मी के शुरूआत में ही रबी की फसल पककर तैयार होती है और इसी समय में जरा सी चिंगारी फसलों को तबाह कर देती है। जहां तक हादसों का सवाल है तो अक्सर खेत के ऊपर से गुजरे बिजली के तार आग का कारण बनते हैं। समय रहते इस पर ध्यान न देना भारी पड़ जाता है। इसलिए यदि कहीं पर बिजली के तार झूल रहे हैं तो तुरंत विद्युत विभाग में शिकायत कर उसको दुरुस्त कराने का प्रयास शुरू कर दें।
सोमवार को दमकल विभाग की तैयारियों को परखा तो संसाधनों का अभाव नजर आया। जहां तक आग की घटनाओं से निपटने के लिए विभागीय तैयारियों का सवाल है तो विभाग ने अपने पास मौजूद संसाधनों के जरिए कमर कस ली है। मगर विभाग के पास मौजूद संसाधन सीमित हैं। ऐसे में आग पर कैसे काबू पा सकेंगे यह प्रश्न बना हुआ है। जिले की भौगोलिक स्थित ऐसी है कि यदि असमोली, रजपुरा और मढ़न क्षेत्र में हादसा हो गया तो दमकल पहुंचने में हांफ जाएगी। वहीं जिले की खराब सड़कें भी बाधा बनेंगी।
पूरे जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए सिर्फ पांच गाड़ियां और दो पंप हैं। इनमें दो गाड़ियां संभल और एक पंप है। चंदौसी तहसील के लिए भी दो गाड़ियां और एक पंप मिला हुआ है। वहीं जनपद की तीसरी तहसील गुन्नौर के लिए एक गाड़ी दी हुई है। यदि जिले के किसी भी हिस्से में कोई आग की घटना होती है तो इन्हीं दमकलों में से भेजा जाता है। कभी-कभी कई स्थानों पर आग की घटनाएं ऐसी होती है, जिसमें अग्निशमन विभाग अपने को असहाय महसूस करता है।
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कुछ ऐसी है विभाग की हालत
जिले में सीएफओ का एक पद है। जिस पर अग्निशमन अधिकारी कार्यरत हैं। इसके अलावा एफएसओ के भी तीन पद हैं जिसमें एक पर भी तैनाती नहीं है। सीनियर फायरमैन, चालक, फायरमैन के सभी पदों पर तैनाती है। बस दमकल गाड़ियों और जिले में कई स्टेशन का अभाव है। सबसे बड़ी समस्या असमोली विधान सभा और रजपुरा क्षेत्र के लिए है। इन क्षेत्रों में स्टेशन की दरकार है।
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सोमवार को दमकल विभाग की तैयारियों को परखा तो संसाधनों का अभाव नजर आया। जहां तक आग की घटनाओं से निपटने के लिए विभागीय तैयारियों का सवाल है तो विभाग ने अपने पास मौजूद संसाधनों के जरिए कमर कस ली है। मगर विभाग के पास मौजूद संसाधन सीमित हैं। ऐसे में आग पर कैसे काबू पा सकेंगे यह प्रश्न बना हुआ है। जिले की भौगोलिक स्थित ऐसी है कि यदि असमोली, रजपुरा और मढ़न क्षेत्र में हादसा हो गया तो दमकल पहुंचने में हांफ जाएगी। वहीं जिले की खराब सड़कें भी बाधा बनेंगी।
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पूरे जिले में आग की घटनाओं पर काबू पाने के लिए सिर्फ पांच गाड़ियां और दो पंप हैं। इनमें दो गाड़ियां संभल और एक पंप है। चंदौसी तहसील के लिए भी दो गाड़ियां और एक पंप मिला हुआ है। वहीं जनपद की तीसरी तहसील गुन्नौर के लिए एक गाड़ी दी हुई है। यदि जिले के किसी भी हिस्से में कोई आग की घटना होती है तो इन्हीं दमकलों में से भेजा जाता है। कभी-कभी कई स्थानों पर आग की घटनाएं ऐसी होती है, जिसमें अग्निशमन विभाग अपने को असहाय महसूस करता है।
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कुछ ऐसी है विभाग की हालत
जिले में सीएफओ का एक पद है। जिस पर अग्निशमन अधिकारी कार्यरत हैं। इसके अलावा एफएसओ के भी तीन पद हैं जिसमें एक पर भी तैनाती नहीं है। सीनियर फायरमैन, चालक, फायरमैन के सभी पदों पर तैनाती है। बस दमकल गाड़ियों और जिले में कई स्टेशन का अभाव है। सबसे बड़ी समस्या असमोली विधान सभा और रजपुरा क्षेत्र के लिए है। इन क्षेत्रों में स्टेशन की दरकार है।