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ब्राजील की शुगर इंडस्ट्री को भा रही भारत की सहफसली खेती
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ब्राजील की शुगर इंडस्ट्री को भा रही भारत की सहफसली खेती
चंदौसी (संभल)। भारत की सह फसली खेती विदेशियों को लुभा रही है। दुनिया में बड़े पैमाने पर चीनी उत्पादन करने वाले देश ब्राजील का एक प्रतिनिधि मंडल भारत में है। वहां की बड़ी चीनी उत्पादक कंपनियों के अधिकारी देश में गन्ने के उत्पादन का तरीका तो देख ही रहे हैं। साथ ही उन्हें यहां के प्रगतिशील किसानों की सहफसली खेती किसानी भी खूब रही है। ब्राजील के प्रतिनिधियों ने जिले डीएसएम चीनी मिल असमोली व रजपुरा का भ्रमण किया। साथ ही कई किसानों से बातचीत करके सहफसली खेती की बारीकियों को समझा। देश में सहफसली की शुरुआत हो काफी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन अभी तक किसान दो फसलें ही लगाते थे, लेकिन अब सहफसली खेती में किसान एक ही खेत में एक ही समय में चार- चार फसले लेकर मोटा मुनाफा कमाने लगे हैं। हालांकि ब्राजील दुनिया में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन करने वाले देशों में शुमार है, लेकिन भारत की सहफसली खेती ने ब्राजील के कृषि क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को आकर्षिक किया है, जिससे ब्राजील से एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया। इसमें ब्राजील के शुगर मिल सिंडीकेट के प्रेसीडेंट मॉरियो, मिनास गेराइस सिडिकेट के अध्यक्ष मॉरियो फेर्रिया, कोरूराइप के सीईओ मॉरियो लुइज लोरेनकट्टो आदि ब्राजील के मिलर्स व बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पिछले दो दिनों में डीएसएम शुगर मिल असमोली के अध्यक्ष सुभाष पांडेय व रजपुरा मिल के यूनिट हेड रंधीर सिंह के साथ बैठकें कीं। भारत की चीनी मिले, किस तरह गन्ने के पेराई करती है और किस तरह चीनी बनाती है, इसे बारीकी से परखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के आयात और निर्यात को लेकर बातचीत की। इसके अलावा ब्राजील के प्रतिनिधि मंडल ने गवां क्षेत्र में किसान अजय प्रताप के खेत पर जाकर सह फसली खेती का निरीक्षण किया। कितनी फसलें ली जाती हैं, कितना मुनाफा होता है, कितने मजदूर लगते हैं, सभी बिंदुुओं पर बातचीत की। सह फसली खेती उन्हें खूब भाई, जिसे ब्राजील में भी लागू करने की इच्छा जताई। डीएसएम चीनी मिल रजपुरा के भ्रमण के दौरान अधिकारियों को प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि ब्राजील में मशीनीकरण अधिक होने के कारण मैंस पावर कम लगती है, पचास साठ कर्मचारी ही पूरी चीनी मिल संचालित कर लेते हैं, लेकिन भारत में सैकड़ों कर्मचारियों को इससे रोजगार मिला हुआ है।
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चंदौसी (संभल)। भारत की सह फसली खेती विदेशियों को लुभा रही है। दुनिया में बड़े पैमाने पर चीनी उत्पादन करने वाले देश ब्राजील का एक प्रतिनिधि मंडल भारत में है। वहां की बड़ी चीनी उत्पादक कंपनियों के अधिकारी देश में गन्ने के उत्पादन का तरीका तो देख ही रहे हैं। साथ ही उन्हें यहां के प्रगतिशील किसानों की सहफसली खेती किसानी भी खूब रही है। ब्राजील के प्रतिनिधियों ने जिले डीएसएम चीनी मिल असमोली व रजपुरा का भ्रमण किया। साथ ही कई किसानों से बातचीत करके सहफसली खेती की बारीकियों को समझा। देश में सहफसली की शुरुआत हो काफी पहले ही हो चुकी थी, लेकिन अभी तक किसान दो फसलें ही लगाते थे, लेकिन अब सहफसली खेती में किसान एक ही खेत में एक ही समय में चार- चार फसले लेकर मोटा मुनाफा कमाने लगे हैं। हालांकि ब्राजील दुनिया में सर्वाधिक गन्ना उत्पादन करने वाले देशों में शुमार है, लेकिन भारत की सहफसली खेती ने ब्राजील के कृषि क्षेत्र की बड़ी कंपनियों को आकर्षिक किया है, जिससे ब्राजील से एक प्रतिनिधिमंडल भारत आया। इसमें ब्राजील के शुगर मिल सिंडीकेट के प्रेसीडेंट मॉरियो, मिनास गेराइस सिडिकेट के अध्यक्ष मॉरियो फेर्रिया, कोरूराइप के सीईओ मॉरियो लुइज लोरेनकट्टो आदि ब्राजील के मिलर्स व बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने पिछले दो दिनों में डीएसएम शुगर मिल असमोली के अध्यक्ष सुभाष पांडेय व रजपुरा मिल के यूनिट हेड रंधीर सिंह के साथ बैठकें कीं। भारत की चीनी मिले, किस तरह गन्ने के पेराई करती है और किस तरह चीनी बनाती है, इसे बारीकी से परखा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीनी के आयात और निर्यात को लेकर बातचीत की। इसके अलावा ब्राजील के प्रतिनिधि मंडल ने गवां क्षेत्र में किसान अजय प्रताप के खेत पर जाकर सह फसली खेती का निरीक्षण किया। कितनी फसलें ली जाती हैं, कितना मुनाफा होता है, कितने मजदूर लगते हैं, सभी बिंदुुओं पर बातचीत की। सह फसली खेती उन्हें खूब भाई, जिसे ब्राजील में भी लागू करने की इच्छा जताई। डीएसएम चीनी मिल रजपुरा के भ्रमण के दौरान अधिकारियों को प्रतिनिधि मंडल ने बताया कि ब्राजील में मशीनीकरण अधिक होने के कारण मैंस पावर कम लगती है, पचास साठ कर्मचारी ही पूरी चीनी मिल संचालित कर लेते हैं, लेकिन भारत में सैकड़ों कर्मचारियों को इससे रोजगार मिला हुआ है।