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बकाया गन्ना भुगतान न मिलने पर भड़के किसान, रेलवे ट्रैक किया जाम
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चंदौसी। बकाया गन्ना भुगतान न मिलने, न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीदारी नहीं होने, स्वामी नाथ आयोग की रिपोर्ट लागू नहीं होने आदि विभिन्न मुद्दों को लेकर भाकियू (अअ) कार्यकर्ता आज भड़क गए। किसानों ने मंडी समिति में सभा कर रेलवे स्टेशन की ओर कूच किया। पुलिस प्रशासन की रोकने की सभी कोशिशों को विफल करते हुए रेलवे प्लेटफार्म पर कब्जा कर लिया। यात्रियों की सुविधाओं का ध्यान रखते हुए किसानों ने ट्रेन रोककर यात्रियों को गन्ने बांटे।
चालक को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन व गन्ने सौंपे। इस दौरान किसानों ने कहा कि 2019 का चुनाव न तो राम के नाम पर होगा और ही मंदिर के नाम पर होगा। चुनाव अब किसानों के नाम पर उनके लिए होगा।
तयशुदा कार्यक्रम के तहत भारतीय किसान यूनियन (असली अराजनीतिक) के कार्यकर्ता सुबह से ही चंदौसी कृषि उत्पादन मंडी में एकत्र होने लगे थे। हजारों की संख्या में किसान यहां पहुंच गए। भाकियू (अअ) प्रमुख चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों में 165 करोड़ पिछले साल हैं।
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1000 करोड़ इस साल का गन्ना मूल्य बकाया है। यूपी की चीनी मिलों पर पांच हजार करोड़ इस साल का और 2759 करोड़ पिछले साल का बकाया है, जिसे सरकार दिलाने में नाकामयाब रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बिक रही। वीनस शुगर मिल लगातार वादाखिलाफी कर रही है।
डीसीओ चीनी मिल का एजेंट बनकर कार्य कर रहे हैं। इसी बीच एसडीएम, सीओ, जिला गन्नाधिकारी और वीनस चीनी मिल के जीएम (केन) को लेकर पहुंचे। 4.50 करोड़ के बकाये का चेक भी दिखाया लेकिन किसानों ने एक नहीं सुनी। दोपहर बाद किसानों ने रेलवे स्टेशन की ओर कूच कर दिया। भारी पुलिस बल तैनात था। जिसने किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसान नहीं रुके। जुलूस की शक्ल में रेलवे स्टेशन पहुंचे।
स्टेशन परिसर में सभा की। अलीगढ़ से बरेली पैसेंजर को पांच मिनट रोककर यात्रियों को गन्ने वितरित किए। इसके बाद फिर प्लेटफार्म पर इंतजार करते रहे। बरेली-दिल्ली ऊंना हिमाचल एक्सप्रेस के आने पर किसान ट्रैक पर पहुंच गए। ट्रेन को पांच मिनट रोका। यात्रियों को गन्ने बांटे। किसानों की दुर्दशा सुनाई। चौधरी हरपाल सिंह ने चालक को राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन और गन्ने की एक पोटली सौंपी। स्टेशन पर भी मौजूद सभी यात्रियों को गन्ने बांटे गए। ट्रेन के इंजन पर भी गन्ने लगा दिए गए। किसानों ने बिना किसी यात्री को कोई कष्ट पहुंचाए अपने आंदोलन को समाप्त किया।
इसमें प्रदेश प्रभारी रिषभ चौधरी, प्रवीण यादव, रिषी पाल सिंह यादव, वीरेश यादव, ओमप्रकाश, वारिश, दिलशाद हुसैन, राजपाल यादव, जयवीर सिंह यादव, संजीव गांधी, हसीब, हुकुम सिंह, आशिक रजा, मलखान सिंह, किशनपाल, होशियार, सौरभ, नवित चौधरी, मनोहर सिंह, ब्रजपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, रामवीर यादव, हरि सिंह यादव आदि बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
अब प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा
चंदौसी। भाकियू (अअ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने किसान अब और वादा खिलाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। गन्ने का बकाया भुगतान ब्याज के साथ लिया जाएगा। जिसका गन्ना एक्ट में प्राविधान है। इसके लिए फरवरी के प्रथम सप्ताह में बड़ा प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जाएगा। बकाया भुगतान के लिए प्रदेश शासन कोे 31 जनवरी तक का समय दिया गया है।
चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि यदि दिए गए समय में बकाया गन्ना भुगतान नहीं किया गया तो फरवरी के पहले सप्ताह में जिलाधिकारियों के कार्यालयों पर कम से कम 25-25 ट्राली गल्ला डाला जाएगा या रेलवे ट्रैक पर इतना गन्ना डालकर अनिश्चितकाल के लिए ट्रेनों को रोक दिया जाएगा। यदि किसी किसान का कनेक्शन बिजली बिल को लेकर काटा गया तो संबंधित बिजली घर पर ताले डाल दिए जाएंगे। यदि आरसी काटी गई तो प्रशासन के खिलाफ आंदोलन होगा। यदि बकाया चाहिए तो किसान के बकाया गन्ने की पर्ची ले ली जाए। सरकार को खाद व बिजली के बढे़ हुए रेटों को वापस लेना होगा।
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चालक को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन व गन्ने सौंपे। इस दौरान किसानों ने कहा कि 2019 का चुनाव न तो राम के नाम पर होगा और ही मंदिर के नाम पर होगा। चुनाव अब किसानों के नाम पर उनके लिए होगा।
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तयशुदा कार्यक्रम के तहत भारतीय किसान यूनियन (असली अराजनीतिक) के कार्यकर्ता सुबह से ही चंदौसी कृषि उत्पादन मंडी में एकत्र होने लगे थे। हजारों की संख्या में किसान यहां पहुंच गए। भाकियू (अअ) प्रमुख चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि मुरादाबाद मंडल की चीनी मिलों में 165 करोड़ पिछले साल हैं।
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1000 करोड़ इस साल का गन्ना मूल्य बकाया है। यूपी की चीनी मिलों पर पांच हजार करोड़ इस साल का और 2759 करोड़ पिछले साल का बकाया है, जिसे सरकार दिलाने में नाकामयाब रही है। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बिक रही। वीनस शुगर मिल लगातार वादाखिलाफी कर रही है।
डीसीओ चीनी मिल का एजेंट बनकर कार्य कर रहे हैं। इसी बीच एसडीएम, सीओ, जिला गन्नाधिकारी और वीनस चीनी मिल के जीएम (केन) को लेकर पहुंचे। 4.50 करोड़ के बकाये का चेक भी दिखाया लेकिन किसानों ने एक नहीं सुनी। दोपहर बाद किसानों ने रेलवे स्टेशन की ओर कूच कर दिया। भारी पुलिस बल तैनात था। जिसने किसानों को रोकने की कोशिश की लेकिन किसान नहीं रुके। जुलूस की शक्ल में रेलवे स्टेशन पहुंचे।
स्टेशन परिसर में सभा की। अलीगढ़ से बरेली पैसेंजर को पांच मिनट रोककर यात्रियों को गन्ने वितरित किए। इसके बाद फिर प्लेटफार्म पर इंतजार करते रहे। बरेली-दिल्ली ऊंना हिमाचल एक्सप्रेस के आने पर किसान ट्रैक पर पहुंच गए। ट्रेन को पांच मिनट रोका। यात्रियों को गन्ने बांटे। किसानों की दुर्दशा सुनाई। चौधरी हरपाल सिंह ने चालक को राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन और गन्ने की एक पोटली सौंपी। स्टेशन पर भी मौजूद सभी यात्रियों को गन्ने बांटे गए। ट्रेन के इंजन पर भी गन्ने लगा दिए गए। किसानों ने बिना किसी यात्री को कोई कष्ट पहुंचाए अपने आंदोलन को समाप्त किया।
इसमें प्रदेश प्रभारी रिषभ चौधरी, प्रवीण यादव, रिषी पाल सिंह यादव, वीरेश यादव, ओमप्रकाश, वारिश, दिलशाद हुसैन, राजपाल यादव, जयवीर सिंह यादव, संजीव गांधी, हसीब, हुकुम सिंह, आशिक रजा, मलखान सिंह, किशनपाल, होशियार, सौरभ, नवित चौधरी, मनोहर सिंह, ब्रजपाल सिंह, धर्मवीर सिंह, रामवीर यादव, हरि सिंह यादव आदि बड़ी संख्या में किसान मौजूद थे।
अब प्रदेशव्यापी आंदोलन होगा
चंदौसी। भाकियू (अअ) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी हरपाल सिंह ने किसान अब और वादा खिलाफी बर्दाश्त नहीं करेंगे। गन्ने का बकाया भुगतान ब्याज के साथ लिया जाएगा। जिसका गन्ना एक्ट में प्राविधान है। इसके लिए फरवरी के प्रथम सप्ताह में बड़ा प्रदेश व्यापी आंदोलन किया जाएगा। बकाया भुगतान के लिए प्रदेश शासन कोे 31 जनवरी तक का समय दिया गया है।
चौधरी हरपाल सिंह ने कहा कि यदि दिए गए समय में बकाया गन्ना भुगतान नहीं किया गया तो फरवरी के पहले सप्ताह में जिलाधिकारियों के कार्यालयों पर कम से कम 25-25 ट्राली गल्ला डाला जाएगा या रेलवे ट्रैक पर इतना गन्ना डालकर अनिश्चितकाल के लिए ट्रेनों को रोक दिया जाएगा। यदि किसी किसान का कनेक्शन बिजली बिल को लेकर काटा गया तो संबंधित बिजली घर पर ताले डाल दिए जाएंगे। यदि आरसी काटी गई तो प्रशासन के खिलाफ आंदोलन होगा। यदि बकाया चाहिए तो किसान के बकाया गन्ने की पर्ची ले ली जाए। सरकार को खाद व बिजली के बढे़ हुए रेटों को वापस लेना होगा।