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राजघाट क्षेत्र में गंगा ने बदला बहाव मार्ग
Updated Sun, 09 Sep 2018 01:07 AM IST
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बबराला। तीन सप्ताह तक उफान पर रही गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे कम हो रहा है। जलस्तर घटने के साथ ही गंगा ने अपना बहाव मार्ग बदल लिया है। राजघाट पर बीच में दिखने वाला टापू भी बहाव से कट गया है और वहां अब तेज धारा प्रवाहित हो रही है। संभल जनपद के किसानों की खेती योग्य वाला रकवा पानी की धारा में जाना तय है।
संभल की गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे हजारों बीघा ऐसा रकवा है। जहां गंगा में पानी घटने के बाद खेती योग्य हो जाता है। क्षेत्रीय किसान उसे अस्थाई तौर पर राजस्व विभाग से हासिल कर उसमें खेती करते हैं। लेकिन इस बार गंगा के उफान के बाद उसकी धारा के मार्ग पर परिवर्तन हुआ है। राजघाट पर पूर्व में गंगा बुलंदशहर जिले की सीमा में बहती रही है। संभल की सीमा में पानी कम होने के साथ अक्सर सूख जाती रही है या फिर बीच में टापू बनने के बाद एक नाले का रूप लेती रही है लेकिन इस बार वह दक्षिण दिशा से पांच सौ मीटर हटकर उत्तर दिशा की ओर संभल की सीमा वाले राजघाट गंगा तट के किनारे से तीव्र वेग से बह रही है। जबकि बुलंदशहर जिले वाले हिस्से में बहाव नहीं हो रहा है। नाविक पप्पू ने बताया कि इस बार गंगा के तीव्र बहाव के चलते बीच का टापू कट गया है और बहाव ने अपनी रास्ता बदल लिया है। ऐसा लगता है कि इस बार गंगा संभल की सीमा में बहेगी। जिससे खेती योग्य बचने वाली जमीन खत्म हो जाएगी। जिसके बाद दोनों जनपदों के किसानों के बीच भूमि चिन्हांकन को लेकर विवाद भी पनपना संभव है।
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संभल की गुन्नौर तहसील में गंगा किनारे हजारों बीघा ऐसा रकवा है। जहां गंगा में पानी घटने के बाद खेती योग्य हो जाता है। क्षेत्रीय किसान उसे अस्थाई तौर पर राजस्व विभाग से हासिल कर उसमें खेती करते हैं। लेकिन इस बार गंगा के उफान के बाद उसकी धारा के मार्ग पर परिवर्तन हुआ है। राजघाट पर पूर्व में गंगा बुलंदशहर जिले की सीमा में बहती रही है। संभल की सीमा में पानी कम होने के साथ अक्सर सूख जाती रही है या फिर बीच में टापू बनने के बाद एक नाले का रूप लेती रही है लेकिन इस बार वह दक्षिण दिशा से पांच सौ मीटर हटकर उत्तर दिशा की ओर संभल की सीमा वाले राजघाट गंगा तट के किनारे से तीव्र वेग से बह रही है। जबकि बुलंदशहर जिले वाले हिस्से में बहाव नहीं हो रहा है। नाविक पप्पू ने बताया कि इस बार गंगा के तीव्र बहाव के चलते बीच का टापू कट गया है और बहाव ने अपनी रास्ता बदल लिया है। ऐसा लगता है कि इस बार गंगा संभल की सीमा में बहेगी। जिससे खेती योग्य बचने वाली जमीन खत्म हो जाएगी। जिसके बाद दोनों जनपदों के किसानों के बीच भूमि चिन्हांकन को लेकर विवाद भी पनपना संभव है।
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