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सराय ज्वालापुरी में एफएमडी से 17 पशुओं की मौत
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चंदौसी/कुढ़फतेहगढ़। क्षेत्र में पैगारफातपुर के साथ ही गांव सराय ज्वालापुरी में भी पशु खुरपका-मुंहपका (एफएमडी) रोग की चपेट में हैं। पिछले दस दिनों में 17 पशुओं की मौत हो चुकी है। 25 से अधिक पशु रोग की चपेट में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सूचना के बाद भी गांव पैगारफातपुर में पशुपालन विभाग की टीम पशुओं के उपचार के लिए नहीं पहुंची। पशुपालक निजी चिकित्सकों से उपचार कराने को मजबूर हैं।
बरसात बीतने और मौसम परिवर्तन के साथ ही पशुओं में खुरपका और मुंहपका रोग फैल रहा है। पशुओं के मुंह व पैरों में खुरों के बीच छाले पड़ने के बाद घाव हो गए हैं। उनके कीड़े पड़ रहे हैं। चारा न खा पाने के कारण पशु दम तोड़ रहे हैं। गांव सराय ज्वालापुरी में पिछले दस दिनों में किसान जीराज के दो पशु, नेपाल सिंह के एक, जमील के एक, नन्हे ठाकुर के एक, राजकुमार के एक, धर्मपाल के एक, सुखराम के एक, अवनीश के एक, मोहम्मद अजीज के एक, सन्नू के तीन, साबिर के एक, जमील के एक, उमेश दिवाकर के एक, महिपाल के एक सहित अन्य कई पशुपालकों के पशुओं की मौत खुरपका मुंहपका रोग से हो चुकी है।
इन पशुपालकों के पशु चल रहे हैं बीमार
नन्हे के दो पशु, ओंकार शर्मा के चार पशु, रनवीर के दो, कुमार पाल के दो, कल्याण सिंह के एक, नरेश दिवाकर के एक, मदनलाल के एक, वीरेंद्र के तीन, जगत सिंह के दो, नेम सिंह के तीन, बलवीर के एक, नीशु के दो, महिपाल के एक, चेतन शर्मा के एक पशु सहित अनेकों किसानों की पशु बीमारी से ग्रस्त चल रहे हैं।
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गांव पैगारफातपुर में नहीं पहुंची टीम, निजी चिकित्सकों से करा रहे उपचार
गांव पैगारफातपुर में भी एफएमडी से नौ पशुओं की मौत हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने के बाद भी गुरुवार को पशुपालन विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची। पशुपालक निजी चिकित्सकों से उपचार कराने को मजबूर हैं। इससे किसानों में पशुपालन विभाग के प्रति रोष है। पैगारफातपुर निवासी पन्नू खां ने बताया कि गुरुवार की शाम तक गाँव में पशु स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची हैं।
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बरसात बीतने और मौसम परिवर्तन के साथ ही पशुओं में खुरपका और मुंहपका रोग फैल रहा है। पशुओं के मुंह व पैरों में खुरों के बीच छाले पड़ने के बाद घाव हो गए हैं। उनके कीड़े पड़ रहे हैं। चारा न खा पाने के कारण पशु दम तोड़ रहे हैं। गांव सराय ज्वालापुरी में पिछले दस दिनों में किसान जीराज के दो पशु, नेपाल सिंह के एक, जमील के एक, नन्हे ठाकुर के एक, राजकुमार के एक, धर्मपाल के एक, सुखराम के एक, अवनीश के एक, मोहम्मद अजीज के एक, सन्नू के तीन, साबिर के एक, जमील के एक, उमेश दिवाकर के एक, महिपाल के एक सहित अन्य कई पशुपालकों के पशुओं की मौत खुरपका मुंहपका रोग से हो चुकी है।
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इन पशुपालकों के पशु चल रहे हैं बीमार
नन्हे के दो पशु, ओंकार शर्मा के चार पशु, रनवीर के दो, कुमार पाल के दो, कल्याण सिंह के एक, नरेश दिवाकर के एक, मदनलाल के एक, वीरेंद्र के तीन, जगत सिंह के दो, नेम सिंह के तीन, बलवीर के एक, नीशु के दो, महिपाल के एक, चेतन शर्मा के एक पशु सहित अनेकों किसानों की पशु बीमारी से ग्रस्त चल रहे हैं।
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गांव पैगारफातपुर में नहीं पहुंची टीम, निजी चिकित्सकों से करा रहे उपचार
गांव पैगारफातपुर में भी एफएमडी से नौ पशुओं की मौत हो चुकी है। हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने के बाद भी गुरुवार को पशुपालन विभाग की टीम गांव नहीं पहुंची। पशुपालक निजी चिकित्सकों से उपचार कराने को मजबूर हैं। इससे किसानों में पशुपालन विभाग के प्रति रोष है। पैगारफातपुर निवासी पन्नू खां ने बताया कि गुरुवार की शाम तक गाँव में पशु स्वास्थ्य टीम नहीं पहुंची हैं।