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गेहूं 200 क्विंटल से अधिक है तो किसान पर घर पर होगी गेहूं खरीद
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चंदौसी। जनपद में गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा न होने से अधिकारी परेशान हो रहे हैं। लक्ष्य पूरा हो सके, इसके लिए अब ग्राम प्रधान व सचिव के माध्यम से प्रतिदिन एक गांव से 500 क्विंटल गेहूं खरीदे जाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यदि किसी गांव में 200 क्विंटल से अधिक गेहूं है तो संबंधित एजेंसी गांव जाकर ही गेहूं खरीदेगी।
जनपद में गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके लिए जनपद को एक लाख पांच हजार पांच सौ मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था।
शुरुआत में मौसम खराब होने के कारण किसान गेहूं नहीं उठा सका। मौसम मेहरबान हुआ तो किसान ने गेहूं उठाकर खरीद केंद्रों पर लाना शुरू किया, लेकिन इसी दौरान शासन ने काले दाने और बिना चमक वाले गेहूं न खरीदे जाने की आदेश दिए। जबकि मौसम खराबी के कारण अधिकतर गेहूं में काला दाना आ रहा था। खरीद केंद्रों पर इस तरह का गेहूं न खरीदने पर किसान ने गेहूं लाना बंद कर दिया।
उसने नगद में व्यापारियों को अपना गेहूं बेचना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि अब खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। दो माह बीतने को हैं, लेकिन अभी लक्ष्य का आधा भी गेहूं नहीं खरीदा गया है। जबकि खरीद केंद्रों पर गेहूं 15 जून तक खरीदा जाएगा। चूंकि गेहूं खरीद का कार्य मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। इसलिए अधिकारियों को पसीने आ रहे है।
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वह रोज तेज धूप और लू में खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर रहे है, लेकिन किसान गेहूं नहीं ला रहा है। गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो सके इसके लिए प्रशासन ने नई कवायद शुरू की है। अब प्रत्येक गांव से प्रतिदिन 500 क्विंटल गेहूं ग्राम प्रधान और सचिव के माध्यम से खरीदा जाएगा। यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी गांव में 200 क्विंटल से अधिक गेहूं है तो खरीद का कार्य संबंधित एजेंसी गांव में किसान के घर पर जाकर करेगी। जिला प्रशासन ने गेहूं की खरीद को अब आकर गंभीरता से लिया है। इतना गंभीर अगर प्रशासन महीने भर पहले हो जाता तो अब तक खरीद का लक्ष्य पूरा हो चुका होता, लेकिन अब लाख प्रयासों के बाद गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।
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जनपद में गेहूं खरीद एक अप्रैल से शुरू हुई थी। इसके लिए जनपद को एक लाख पांच हजार पांच सौ मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था।
शुरुआत में मौसम खराब होने के कारण किसान गेहूं नहीं उठा सका। मौसम मेहरबान हुआ तो किसान ने गेहूं उठाकर खरीद केंद्रों पर लाना शुरू किया, लेकिन इसी दौरान शासन ने काले दाने और बिना चमक वाले गेहूं न खरीदे जाने की आदेश दिए। जबकि मौसम खराबी के कारण अधिकतर गेहूं में काला दाना आ रहा था। खरीद केंद्रों पर इस तरह का गेहूं न खरीदने पर किसान ने गेहूं लाना बंद कर दिया।
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उसने नगद में व्यापारियों को अपना गेहूं बेचना शुरू कर दिया। इसका नतीजा यह हुआ कि अब खरीद केंद्रों पर सन्नाटा पसरा हुआ है। दो माह बीतने को हैं, लेकिन अभी लक्ष्य का आधा भी गेहूं नहीं खरीदा गया है। जबकि खरीद केंद्रों पर गेहूं 15 जून तक खरीदा जाएगा। चूंकि गेहूं खरीद का कार्य मुख्यमंत्री की प्राथमिकता में शामिल है। इसलिए अधिकारियों को पसीने आ रहे है।
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वह रोज तेज धूप और लू में खरीद केंद्रों का निरीक्षण कर रहे है, लेकिन किसान गेहूं नहीं ला रहा है। गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा हो सके इसके लिए प्रशासन ने नई कवायद शुरू की है। अब प्रत्येक गांव से प्रतिदिन 500 क्विंटल गेहूं ग्राम प्रधान और सचिव के माध्यम से खरीदा जाएगा। यह भी निर्देशित किया गया है कि यदि किसी गांव में 200 क्विंटल से अधिक गेहूं है तो खरीद का कार्य संबंधित एजेंसी गांव में किसान के घर पर जाकर करेगी। जिला प्रशासन ने गेहूं की खरीद को अब आकर गंभीरता से लिया है। इतना गंभीर अगर प्रशासन महीने भर पहले हो जाता तो अब तक खरीद का लक्ष्य पूरा हो चुका होता, लेकिन अब लाख प्रयासों के बाद गेहूं खरीद का लक्ष्य पूरा होता दिखाई नहीं दे रहा है।