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अल्लाह की बारगाह में गुनाहों की माफी के लिए उठा हर हाथ
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चंदौसी। शाम होते ही कब्रिस्तान महक उठे, मस्जिदें रोशन हो उठी। अल्लाह की बारगाह में हर हाथ उठा। अपने गुनाहों की माफी मांगी। रातभर लोगों ने इबादत की। कब्रिस्तानों में जाकर अपने पूर्वजों की कब्रों पर फातेहा पढ़ीं। मस्जिदें व कब्रिस्तान रातभर जगमगाते रहे। कई स्थानों पर आतिशबाजी भी की गई।
शब-ए-बरात पर मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तानों की साफ सफाई पहले ही कर रखी थी। शाम होते ही लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की ओर निकल पड़े। सारे कब्रिस्तानों को रोशनी से सजाया है। शहर में भी यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया गया।
सभी ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर अगरबत्ती जलाकर फूल चढ़ाए और पूर्वजों के लिए मगफिरत की दुआ की। शहर काजी हाजी मरगूब कादरी नौशाही ने कहा कि यह रात इबादत की रात है और कब्रिस्तान पर जाकर अपने पूर्वजों को मगफिरत की जा रही है।
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शब-ए-बरात का अर्थ आजादी की रात से है। क्योंकि अल्लाह ताला आज अपने बंदों के बहुत करीब होता है। साथ ही तौबा करने वालों की तौबा को कबूल करते हुए उनके सारे गुनाहों को माफ कर देता है।
उधर स्टेशन रोड स्थित मजिस्द नौशाही में शब-ए-बरात को लेकर बैठक हुई। जिसमें गुनाह की बात बताते हुए शब-ए-बरात पर आतिशबाजी न करने को कहा गया। हाजी कलीम अनवर ने कहा कि 23 अप्रैल को मतदान अवश्य करें और दूसरों को मतदान करने के लिए प्रेरित कर देश के विकास में सहयोग करें। बैठक में काजी मरगूब, हाफिज आसिफ, हाफिज मोहब्बे अली, हाफिज शुएब, अब्दुल रउफ शैरी, जाहिद शैरी, अब्दुल बदूद, साबिर आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता मौलाना इफ्तेखार मिस्बाही ने की तथा संचालन मोहम्मद नजर कुरैशी ने किया।
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शब-ए-बरात पर मुस्लिम समाज के लोगों ने कब्रिस्तानों की साफ सफाई पहले ही कर रखी थी। शाम होते ही लोग अपने पूर्वजों की कब्रों की ओर निकल पड़े। सारे कब्रिस्तानों को रोशनी से सजाया है। शहर में भी यह त्योहार परंपरागत तरीके से मनाया गया।
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सभी ने अपने पूर्वजों की कब्रों पर जाकर अगरबत्ती जलाकर फूल चढ़ाए और पूर्वजों के लिए मगफिरत की दुआ की। शहर काजी हाजी मरगूब कादरी नौशाही ने कहा कि यह रात इबादत की रात है और कब्रिस्तान पर जाकर अपने पूर्वजों को मगफिरत की जा रही है।
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शब-ए-बरात का अर्थ आजादी की रात से है। क्योंकि अल्लाह ताला आज अपने बंदों के बहुत करीब होता है। साथ ही तौबा करने वालों की तौबा को कबूल करते हुए उनके सारे गुनाहों को माफ कर देता है।
उधर स्टेशन रोड स्थित मजिस्द नौशाही में शब-ए-बरात को लेकर बैठक हुई। जिसमें गुनाह की बात बताते हुए शब-ए-बरात पर आतिशबाजी न करने को कहा गया। हाजी कलीम अनवर ने कहा कि 23 अप्रैल को मतदान अवश्य करें और दूसरों को मतदान करने के लिए प्रेरित कर देश के विकास में सहयोग करें। बैठक में काजी मरगूब, हाफिज आसिफ, हाफिज मोहब्बे अली, हाफिज शुएब, अब्दुल रउफ शैरी, जाहिद शैरी, अब्दुल बदूद, साबिर आदि मौजूद रहे। अध्यक्षता मौलाना इफ्तेखार मिस्बाही ने की तथा संचालन मोहम्मद नजर कुरैशी ने किया।