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लो-वोल्टेज होने की वजह से 400 सरकारी नलकूपों की मोटरें खतरे में, नहीं हो पा रही सिंचाईं

Updated Mon, 05 Jun 2017 01:07 AM IST
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नलकूपों पर भी संकट, फसलें सूखने की कगार पर
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लो-वोल्टेज होने की वजह से 400 सरकारी नलकूपों की मोटरें खतरे में, नहीं हो पा रही सिंचाईं
400 वोल्टेज के स्थान पर 150-300 वोल्टेज का मिल रहा है करेंट, कैसे हो सिंचाईं
अमर उजाला ब्यूरो
संभल। लो-वोल्टेज की वजह से जिले के सिरसी, जुनावई, गवां, रजपुरा, गुन्नौर, बनियाखेड़ा ब्लाक में किसानों की फसलें सूखने की कगार पर पहुंच गई है। कारण भी है यहां स्थित 400 सरकारी नलकूपों की मोटरों को खतरा पैदा हो गया है। चौबीस घंटे में एक-दो घंटे बिजली के वोल्टेज ठीक मिलते हैं तब थोड़ी सिंचाईं हो पाती है लेकिन बाकी समय सिंचाईं के लिए किसान तरसते रह जाते हैं। खेत सूख रहे हैं। सरकारी सिंचाई व्यवस्था का हाल बेहाल है।
संभल जिले में 632 सरकारी नलकूप हैं। इसमें 400 सरकारी नलकूप लो-वोल्टेज शिकार हो गए हैं। इसके चलते सिंचाईं व्यवस्था प्रभावित हो गई है। नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता शील त्रिपाठी ने खुद माना कि जिले में 400 नलकूप लो वोल्टेज का शिकार हैं। इसमें 440 के स्थान पर 150-300 वोल्टेज का करेंट मिल रहा है। करेंट कम मिलने के चलते मोटरों के फुंक जाने का खतरा है। उनका कहना है कि कम वोल्टेज के कारण कई नलकूप चल नहीं पा रहे हैं। यह मुद्दा जिलाधिकारी के सामने भी उठा था। तब जिलाधिकारी ने समस्या के समाधान का आदेश दिया था, लेकिन समस्या जस की तस है। लो-वोल्टेज में मोटर फुंकने का खतरा रहता है। इसी तरह 3000 से अधिक निजी नलकूप भी लो वोल्टेज से प्रभावित हो रहे हैं। भाकियू ने पिछले दिनों किसान दिवस में लो वोल्टेज का मुद्दा उठाया था पर समाधान नहीं हो सका। बिजली विभाग यह कह कर अपना पल्ला झाड़ रहा है कि गर्मी के दिनों में तो लो-वोल्टेज की समस्या हो ही जाती है। बारिश शुरू होने पर राहत मिलेगी लेकिन सवाल यह है कि जब तक फसलों की क्षति का कौन जिम्मेदार होगा?

कोट--
यह बात तो सही है गर्मी के दिनों में लो वोल्टेज हो जाती है लेकिन इसकी समस्या कहीं-कहीं ही हो सकती है। सब जगह नहीं है। नलकूप प्रभावित होने के कारण कुछ दूसरे होंगे। इस बारे में हकीकत की जांच हो सही स्थिति सामने आएगी। यदि किसी स्टेट ट्यूबवेल के बारे में लो वोल्टेज की समस्या है तो उसके बारे में आइडेंटीफाइ किया जाए।
अनिल कुमार, अधिशासी अभियंता विद्युत।

किसानों से सिंचाईं के नाम पर होती है वसूली
संभल। किसानों से पानी देने के बदले में रुपये लिए जा रहे हैं। नलकूप खंड के अधिशासी अभियंता शील त्रिपाठी भी वसूली के आरोप से इनकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि कुछ स्थानों पर उन्हें नलकूप आपरेटरों द्वारा सिंचाईं के बदले धन उगाही करने की मौखिक शिकायतें मिलीं। जब वह जांच को पहुंचे तो लोग मुकर गए। असल में जिन आपरेटरों के माध्यम से उन्हें सिचाईं करनी है उनके खिलाफ कोई बोलना नहीं चाहता है। इसलिए सिंचाईं के नाम पर वसूली की शिकायतों पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। अगर किसान लिखित शिकायत करें तो एक्शन होगा।

मढ़न में जनरेटर से चलता है सरकारी नलकूप
संभल। असमोली क्षेत्र के मढ़न गांव में सरकारी नलकूप जनरेटर से चलता है। जिस किसान को सिंचाई करनी होती है वह अपना जनरेटर लाता है। जनरेटर की पॉवर से सरकारी नलकूप को चलाया जाता है। नलकूप पर तैनात ऑपरेटर के संरक्षण में यह सब काम चप्तलता है। किसान अपना डीजल और जनरेटर का खर्चा तो करता ही है साथ ही सुविधा शुल्क भी देता है। इससे किसान को दोहरी मार पड़ रही है। लेकिन किसान चुप हैं।

जिले में कुल नलकूप-632
लो-वोल्टेज और विद्युत दोष का शिकार -400
पूरी तरह से फेल नलकूप-100
बालू दे रहे नलकूप-28
(आंकड़े नलकूप विभाग से हुई बातचीत के आधार पर)

योगी सरकार में भी राहत नहीं मिली
ओबरी(संभल)। कहीं लो वोल्टेज की समस्या के चलते सरकारी नलकूप नहीं चल रहे पा रहे तो कहीं नलकूप ऑपरेटर सिंचाई के बदले रुपये वसूल रहे हैं। किसान परेशान हो रहे हैं। ओबरी गांव में दो नलकूप हैं। दोनों लो वोल्टेज के चलते चल नहीं पा पा रहे हैं। किसानों को योगी सरकार से भी राहत मिलती नहीं दिख रही है। उन्हें जहां आर्थिक हानि हो रही वहीं परेशानी का सामना भी करना पड़ रहा है।

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