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मदरसों को नहीं मिली पुस्तकें, कैसे हो पढ़ाई

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 30 Apr 2019 01:38 AM IST
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मदरसों को नहीं मिली पुस्तकें, कैसे हो पढ़ाई
संभल। मदरसों का नया सत्र शुरू हुए महीनाभर हो चुका है लेकिन अभी तक पुस्तकें मदरसों तक नहीं पहुंची हैं। इससे उनकी पढ़ाई सही तरीके से शुरू नहीं हो पा रही है। बच्चे रोजाना पुस्तकें आने का इंतजार करते हैं लेकिन उन्हें मायूसी मिल रही है। वहीं मदरसा शिक्षक पुरानी पुस्तकों से शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन बच्चों को इस स्थिति में तालीम हासिल करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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पुस्तकें समय से मिल जाएं इसके लिए मदरसा संचालक कई बार आवाज उठा चुके हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। मालूम हो जिले में सहायता प्राप्त 3 और मान्यता प्राप्त 53 मदरसे संचालित होते हैं। इन मदरसों में सैकड़ों की संख्या में बच्चे तालिम हासिल कर रहे हैं। लेकिन बीते दो-तीन वर्षों से शिक्षा विभाग से पुस्तकें नहीं आने के कारण बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में परेशानी हो रही है। निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से बच्चे तालीम हासिल करने को मजबूर हैं। ऐसे में अभिभावकों की जेब पर बोझ बढ़ रहा है। जबकि शासन का दावा मदरसे आधुनिकरण करने का है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही नजर आ रही है।
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जहां पुस्तकों के लिए संचालक इधर उधर भटक रहे हैं तो कैसे आधुनिकीकरण का सपना साकार हो सकता है। इस आधुनिकीकरण के दावे में शिक्षा की पहली कड़ी पुस्तक ही बच्चों की पहुंच से दूर है। मदरसा संचालकों की मानें तो बीते वर्ष पुस्तकें नहीं आने से बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। मजबूरन इधर उधर से पुस्तकें लेकर परीक्षा दी। इस बार भी पुस्तकों का कोई पता नहीं हैं। ऐसे में शिक्षण कार्य बाधित हो रहा है।
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क्या बोले मदरसा संचालक
मदरसा सिराज उल उलूम के प्रधानाचार्य मौलाना मोहम्मद मियां ने कहा कि दो वर्ष पहले सत्र शुरू होने के छह महीने बाद पुस्तकें आई थीं। उनमें भी पुस्तकें अधूरी थीं। बीते वर्ष कोई पुस्तक नहीं मिली। यह हाल कई वर्षों से चलता चला आ रहा है। इस बार भी पुस्तकें अब तक नहीं आईं हैं। ऐसे में बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शासन को बच्चों के बारे में संज्ञान लेते हुए समय से पुस्तकें मदरसों तक पहुंचानी चाहिए।


क्या बोले अधिकारी
जिला समाज कल्याण अधिकारी राजेश कुमार से जब इस बारे में जानकारी ली तो वह जानकारी देने में असमर्थ नजर आए। उन्हें यह मालूम नहीं है कि पुस्तकें मिलती हैं या नहीं। सत्र कब से शुरू होता हैै यह भी अन्य कर्मचारी से पूछ कर बताया। उनका कहना था कि जानकारी की जाएगी, जो प्रक्रिया होगी वह पुस्तक मंगाने के लिए करेंगे।
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