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Saharanpur News: 13 साल पहले योगेश ने लिया था पिस्टल का लाइसेंस
Sun, 23 Mar 2025 12:58 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, सहारनपुर
Updated Sun, 23 Mar 2025 12:58 AM IST
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गंगोह सीएचसी में योगेश की पत्नी नेहा को उपचार के लिए स्टेचर पर लेकर जाते स्वास्थ्यकर्मी। संवाद
सहारनपुर। जिस पिस्टल से योगेश रोहिला ने अपनी पत्नी नेहा, बेटी श्रद्धा, बेटे देवांश व शिवांश को गोली मारी है, उसका लाइसेंस करीब 13 साल पहले लिया था। 2013 में अपने नाम से ही पिस्टल का लाइसेंस नाम कराया था। वह पिस्टल को ज्यादातर अपने पास ही रखता था। बताया जा रहा है कि पिछले करीब दो माह से पत्नी को परेशान कर रहा था।
-- पहले शिवांश, फिर पहुंचे देवांश व उनकी मां नेहा
एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सबसे पहले एंबुलेंस से शिवांश पहुंचा। उसके बाद देवांश और उसकी मां नेहा को लाया गया। चिकित्सकों ने चेक किया तो देवांश व शिवांश को मृत घोषित कर दिया, जबकि नेहा की सांस चलती मिली। इसके बाद चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। रेफर करने के लिए एएलएस एंबुलेंस को बुलाने के लिए कहा, लेकिन एएलएस एंबुलेंस वीआईपी कार्यक्रम के चलते नहीं आई। इसलिए बाद में नेहा को 108 एंबुलेंस से ही राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
मंत्री जैसे ठाठ-बाट से रहता था योगेश
लखनौती। गांव में योगेश रोहिला ने घर के पास ही कैंप कार्यालय बना रखा था। कैंप कार्यालय को देखने से लगता है कि उसके ठाठ-बाट किसी विधायक, सांसद या मंत्री से कम नहीं थे। कार्यालय के अंदर तमाम बड़े नेताओं के फोटोग्राफ लगे हुए थे। उसने बुलेट और बोलेरो गाड़ी भी ले रखी थी। उसके साथ गाड़ी का ड्राइवर और डायरी लेकर चलने वाला सहायक भी मौजूद रहता था। उसने एक तरह से मंत्री की तरह छवि बना रखी थी। उसके पास एक लाइसेंसी रिवाल्वर था। उसी लाइसेंसी रिवाल्वर की दो मैगजीन से उसने अपनी पत्नी और बच्चों को गोलियां मारी।
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पार्टी ने भी कई बार किया निष्कासित
योगेश के पिता अपने समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे, जिससे उनका राजनीतिक परिवेश मजबूत रहा। इसी प्रभाव के चलते योगेश की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से पहचान बनी। इसी आधार पर वह लंबे समय तक भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला उपाध्यक्ष पद पर रहा। हालांकि, इस दौरान कई बार पार्टी से निष्कासित किया गया, लेकिन हाईकमान की सिफारिश पर दोबारा भाजपा की जिला कार्यकारिणी समिति में शामिल किया गया। भाजपा मंडल अध्यक्ष वीरसेन कश्यप के अनुसार, वर्तमान में योगेश रोहिला पार्टी के किसी पद पर नहीं है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को बधाई संदेश भेजा था। उनकी तरफ से धन्यवाद संदेश भी मिला था।
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एसबीडी जिला अस्पताल की इमरजेंसी में सबसे पहले एंबुलेंस से शिवांश पहुंचा। उसके बाद देवांश और उसकी मां नेहा को लाया गया। चिकित्सकों ने चेक किया तो देवांश व शिवांश को मृत घोषित कर दिया, जबकि नेहा की सांस चलती मिली। इसके बाद चिकित्सकों ने हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। रेफर करने के लिए एएलएस एंबुलेंस को बुलाने के लिए कहा, लेकिन एएलएस एंबुलेंस वीआईपी कार्यक्रम के चलते नहीं आई। इसलिए बाद में नेहा को 108 एंबुलेंस से ही राजकीय मेडिकल कॉलेज भेजा गया।
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मंत्री जैसे ठाठ-बाट से रहता था योगेश
लखनौती। गांव में योगेश रोहिला ने घर के पास ही कैंप कार्यालय बना रखा था। कैंप कार्यालय को देखने से लगता है कि उसके ठाठ-बाट किसी विधायक, सांसद या मंत्री से कम नहीं थे। कार्यालय के अंदर तमाम बड़े नेताओं के फोटोग्राफ लगे हुए थे। उसने बुलेट और बोलेरो गाड़ी भी ले रखी थी। उसके साथ गाड़ी का ड्राइवर और डायरी लेकर चलने वाला सहायक भी मौजूद रहता था। उसने एक तरह से मंत्री की तरह छवि बना रखी थी। उसके पास एक लाइसेंसी रिवाल्वर था। उसी लाइसेंसी रिवाल्वर की दो मैगजीन से उसने अपनी पत्नी और बच्चों को गोलियां मारी।
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पार्टी ने भी कई बार किया निष्कासित
योगेश के पिता अपने समय में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य थे, जिससे उनका राजनीतिक परिवेश मजबूत रहा। इसी प्रभाव के चलते योगेश की भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से पहचान बनी। इसी आधार पर वह लंबे समय तक भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला उपाध्यक्ष पद पर रहा। हालांकि, इस दौरान कई बार पार्टी से निष्कासित किया गया, लेकिन हाईकमान की सिफारिश पर दोबारा भाजपा की जिला कार्यकारिणी समिति में शामिल किया गया। भाजपा मंडल अध्यक्ष वीरसेन कश्यप के अनुसार, वर्तमान में योगेश रोहिला पार्टी के किसी पद पर नहीं है। तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने पर नरेंद्र मोदी को बधाई संदेश भेजा था। उनकी तरफ से धन्यवाद संदेश भी मिला था।